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विश्व प्रसिध्ध पवित्र जैन तिर्थभूमिपालिताणा से पांच दशक बाद मोरारिबापु की व्यास पीठ से चौपाइयां गुंज उठी।।

 

हरि इच्छा प्रबल है।।

हरि की इच्छा के अनुसार ही भावि बलवान होता है या निर्बल बनता है।।

पंचदेवों की जो निंदा करें उनका संग नहीं करना।

हो सके तो उनके वहां अपनी बेटी को भी नहीं देना।।

साधु समाज की औषधि है।।

जिनकी प्रथम गुरु एक नारी है वह नारीनिंदक कैसे हो सकता है?

 

हरि इच्छा भावी बलवाना।

ह्रदयबिचारतसंभु सुजाना।।

तब संकर प्रभु पद सिरुनावा।

सुमिरतरामुह्रदय अस आवा।।

एहि तन सतिहि भेट मोहिनाहीं।

सिवसंकल्पुकिन्ह मन माही।।

-बालकॉंड

 

इन्ही बीज पंक्तियों के गायन के साथ

विश्व विख्यात पवित्र जैन स्थान की तीर्थभूमिपालीताणा-भावनगर(गुजरात) की पवित्र भूमि में रामचरितमानस की व्यास पीठ को लेकर शनिवार से मोरारि बापू की कथा क्रम की ९७६ वीं कथा यहां सगापरा धार कैलाश टेकरी और स्वयंभूजडेश्वर महादेव मंदिर के सानिध्य में एवं श्री लालगिरी बापू गुरु श्री विजय गिरी बापू की पावन निश्रा में आरंभ हुआ।।

कथा पूर्व भूमिका स्वामी जाते हुए बापू ने कहा कि ५० साल के बाद कथा को यहां लाने की प्रसन्नता है ब्रह्मलीन विजय गिरी बापू और उनके आश्रित लाल गिरी बापू के शिव संकल्प से यहां आने का हुआ। लेकिन परमात्मा की इच्छा होती है वहीं घटना घटती है।।जब हमने तय किया था कि यहां के जैन परिवार दोशी परिवार की इच्छा के अनुसार जैन तीर्थ में ‘मानस नवकार मंत्र’ पर कथा करने का था।।और जैन धर्म,बौध धर्म अन्य धर्म और सनातन धर्म के एक-एक मंत्र को लेकर संवाद करने की बात कही थी।।मानसनवकार मंत्र का पहला मंत्र गायत्री मंत्र से शुरू करना था।लेकिन हरि इच्छा प्रबल है।।हरि की इच्छा के अनुसार ही भावि बलवान होता है या निर्बल बनता है।।

दो विचारधारा के बीच संवाद होना चाहिए।।साधु का शिव संकल्प यहां पूरा हुआ है।। धर्म संवाद जगत में बहुत जरूरी है।।यहां सनातन धर्म के कितने स्थान है।काशी विश्वनाथ उज्जैन के भैरवनाथ भी यहां विराजमान है।वैष्णव साधु समाज के भी स्थान है।।लेकिन लाल गिरी बापू का शिव संकल्प पूरा हुआ और हमने समरसता दिखाते हुए फिर यह तय किया कि मानस शिव संकल्प पर कथा संवाद करेंगे।।

जो पहले तय किया था वह किसी जैन तीर्थ में जाकर फिर कभी हम उन पर संवाद करेंगे।। रामचरितमानस के हर एक कांड में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष संकल्प और विकल्प की बात है।शिव संकल्प वैदिक शब्द है।।कथा के साथ बहुत प्रकल्प जुड़े हुए हैं लेकिन कथा का आध्यात्मिक केंद्र में रहना चाहिए।मूल बात यह है यह रामकथा है।।

इतनी पूर्व भूमिका के बाद बताया कि भगवान शंकर और सती कुंभज के आश्रम में जाकर कथा सुनकर निकलते हैं इस प्रसंग से तीन पंक्ति ले गई है।।

और और तुलसीदास जी के रामचरितमानस के ग्रंथ माहत्म्य बताते हुए बापू ने कहा कि रामचरितमानस की रचना सात सोपान,पहले सोपान के सात मंत्र और मंत्र के बाद तुलसी जी अपनी ग्राम्या गिरा में सोरठे लिखते हैं और वहां से वंदना शुरू होती है। तुलसी के बारे में एक भ्रम फैलाया गया है कि तुलसी नारी निंदक है, लेकिन जिनकी प्रथम गुरु एक नारी- तुलसी की पत्नी पहली गुरु है-जो प्रथम गुरु नारी है वह नारी निंदक कैसे हो सकता है?

तुलसी जी के बारे में बात कर के यह भी कहा कि सबसे पहले भवानी की वंदना की।।बाद में शिव की वंदना की।।श्रद्धा के रूप में भी नारी की वंदना प्रथम हुई है।।पृथ्वि के देवता ब्राह्मणो की वंदना के बाद साधु की वंदना की।।साधु समाज की औषधि है।।वंदना प्रकरण के बाद तुलसी जी ने पंचदेवों की पूजा की बात की।।और बापू ने बताया कि पंचदेवों की जो निंदा करें उनका संग नहीं करना।।हो सके तो उनके वहां अपनी बेटी को भी नहीं देना।।

सबसे पहले पृथ्वी के देवता ब्राह्मणों की वंदना से तुलसी जी ने वंदना प्रकरण में शुरू किया और गुरु वंदना प्रकरण का गान किया गया।।विद-विदवंदनाओं के बाद हनुमान जी महाराज की वंदना करके आज की कथा को विराम दिया गया।।

यह रामकथा कुछ विशेष प्रकल्पों से भी जुड़ी हुई है मोरारि बापू २१ सितंबर १९७४-जो कथाक्रम की ८८ वीं और १२ मार्च १९७७ में व्यासपीठ की कथा क्रम की १४५ वीं रामकथा पालिताणा में हो चुकी है

करीब करीब ५० साल के बाद मोरारि बापू की व्यास पीठ फिर एक बार पालिताणा में आइ है।। यहां सगापरा धार में स्वयंभू भगवान जडेश्वर महादेव के सानिध्य में यह कथा गान ब्रहमलीन संत श्री विजय गिरि बापू के शिष्य श्री लाल गिरि बापू की सन्निधि में होने जा रही है।।

यह राम कथा के नव दिवस के नव मनोरथीहै।।पहले दिन सगापरागॉंव की समस्त बस्ती की यजमानी है।।

और एक विशेषता यह है कि मोरारी बापू यहां से ३६ किलोमीटर दूर कदम गिरी स्थित कैलाश कुटिया में निवास करेंगे और हर रोज हेलीकॉप्टर द्वारा आवागमन करेंगे।।

कथा के दरमियान अनेक महत् पाद राष्ट्रीय संत उपस्थित रहेंगे।।जिन में द्वारिका शारदा पीठ पीठाधीश अनंत श्री विभूषित जगतगुरु सदानंद सरस्वती के शिष्य श्री नारायण नंद जी,संत श्री शेरनाथ बापू,सोहमगिरि जी-उज्जैन,भक्तिबापु-मानव मंदिर,केशवानंद जी-सनातन आश्रम-द्वारका,संघमित्रा जी-विरायतन,

महामंडलेश्वरपीठाधीश श्री अवधेशानंद गिरि महाराज,जैनाचार्य लोकेश मुनि जी और राजकीय अग्रणीयों का समावेश हो रहा है।।

आरंभ में संतोमहंतो के हाथों दीप प्रागट्य और लालगिरि जी बापु द्वारा सभी का स्वागत किया गया।।

यह कथा की समग्र व्यवस्था ओशो सन्यासी

और जीएसटी ऑफीसरलालजी भाई जोगराना संभाल रहे हैं।।

गांव के युवा युवा मित्र भरत भाई सोनी,किशोर कुकड़िया,सुरेश भाई चोसला,मनोज जेठवा,सूरत के राकेश भाई व्यवस्थापन में जुड़े हुए हैं।।

कथा के दरमियान अनेक नए-नए प्रकल्प भी यहां पर होंगे।।आश्रम में नवनिर्मित श्री गणेश जी एवं श्री हनुमान जी मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा साथ ही १३ करोड़ राम मंत्र लेखन की साधना,राम रथ यात्रा, पालखी यात्रा,साधु संतों को प्रसाद और किट वितरण और राम वाटिकाओं में वृक्षारोपण भी होने वाला है।।

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