
दशरथ के जीवन में तीन प्रकार के धर्म संकट आये।।
सब से बडा संकट नाम स्मरण भजन न हो पाये वह है।।
तीनों काल में जो फिरता नहीं वह सत्य केतु है और स्वार्थी होता है वह काल केतु होता है।।
सोनगढ-व्यारा-तापी के पास से चल रही रामकथा के आंठवे दिन पर समाज में किसी कोने पर भ्रांति है वह दूर करने के लिए बापू बोल रहे हैं।।
आज गुजरात के शिक्षा मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने प्रासंगिक उद्बोधन किया।।
बापू ने कहा कि मूल में यह भूमि आदि और सनातनी भूमि है इसलिए अपनी सनातनी परंपरा को भूलना मत।। साथ ही द्वारिका पीठ के जगत गुरु शंकराचार्य आजकल झारखंड के आदिवासी विस्तार में घूम रहे हैं और बहुत से परिवारों को फिर सनातनी धर्म स्थापित किया है वह आनंद बापू ने व्यक्त किया।।
वाल्मीकि रामायण में रावण मारिच को लेकर सीता जी के अपहरण की योजना बनाते हैं तब मारिच रावण को कहता है प्रीति और विरोध समान के साथ ही होता है।।ऐसा क्यों हुआ क्योंकि राम ने बिना फले का बाण मारिच को मार दिया था और राम का बान लगा हो हो निर्भीकता से रावण जैसी सत्ता के सामने भी बोल सकता है।।
रावण विश्व का सबसे बड़ा संकट था।। आठ प्रकार के संकट की बात हुई:धर्म संकट-दशरथ के जीवन में तीन प्रसंग में धर्म संकट दिखता है।जब श्रवण का वध हुआ, विश्वामित्र राम लक्ष्मण की माग करते हैं और कैकयी वरदान मांगती है।। इसी तरह सुग्रीव को प्राण संकट हुआ। जटायु के पास देह संकट आया।।राजा प्रताप भानु ने पारिवारिक संकट खड़ा किया और बापू ने कहा तीनों काल में जो फिरता नहीं वह सत्य केतु है और स्वार्थी होता है वह काल केतु होता है।। रावण ने सामाजिक संकट और राष्ट्र संकट भी खड़ा किया और वाली ने भी राष्ट्र संकट खड़ा किया।। विश्व का संकट रावण ने खड़ा किया लेकिन सबसे बड़ा संकट मां जानकी को भजन और स्मरण का हुआ जो हनुमान जी कहते हैं अशोक वाटिका में हनुमान जी नोंध लेते है।।
राम जन्म के बाद एक महीने तक दिवस रहा फिर नामकरण और विद्या संस्कार के बाद विश्वामित्र राम लक्ष्मण को लेने के लिए आते हैं और विश्वामित्र के साथ राम लक्ष्मण का वन गमन जहां यज्ञ रक्षा के लिए ताड़का का वध किया गया।।

