Homeगुजरातसाधु निष्पक्ष होता है, निर्भय होता है और निर्वैर होता है।।

साधु निष्पक्ष होता है, निर्भय होता है और निर्वैर होता है।।

वेदों में ७४५ बार गौ शब्द का उल्लेख किया है।।

पशु गाय का नाम है,लेकिन गाय पशु नहीं है।।

गाय बचाने के लिए ठोस निर्णय होना चाहिए:बापु

पूरे विश्व को जो राम से आराम मिले वो राम है।।

विनोबा जी ने बताये वेद विदित २१ गाय के नाम

 

ऊंची अटारी वाली राधा जी की प्रेम नगरी बरसाना में बह रही रामकथा के आठवें दिन आज वल्लभ कुल के विदविद आचार्य महाराजश्री आए और सबने अपने शब्द भाव रखें और बताया कि राधा और कृष्ण की लीला नित्य है।। ऐसा कभी नहीं कहा जा सकता कि राधा और कृष्ण ने लीला की थी। लेकिन बांके बिहारी जी नित्य लीला करते हैं।। चार प्रकार की लीला:दान लीला,मान लीला,पान लीला और गौ चरण लीला करते हैं।।

आज विशिष्ट मेहमान के रूप में लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला जी सपत्नी आए और बापू ने चुटकी लेते हुए कहा,कि जब वह बहुत देरी से आए और सबको राह देखनी पड़ी तो बापू ने कहा कि हमने इतनी देर राह देखी तो आप समय पर आते रहिए!

चित्रकूट में जब भरत जी जाते हैं कोई निर्णय नहीं आता है तब जनक आदि ऋषि मुनियों कहते हैं कि चार प्रकार के मत लेने चाहिए।।सबसे पहले साधु मत,क्योंकि साधु निष्पक्ष होता है। निर्भय होता है और निर्वैर होता है।।फिर लोकमत लेना चाहिए बाद में वेदों का वेद मत और आखिर में जिनके पास राष्ट्र प्रीति है ऐसे कोई राष्ट्र महापुरुष का राज मत लेना चाहिए।।

सत्ता को सत्य कह सकता है, प्रेम और करुणा कह सकती है।।

विनोबा जी ने बताया कि वेदों में 745 बार गौ शब्द का उल्लेख किया है।।और विनोबा जी ने 21 नाम बताएं जो गायों के हैं इनमें:

अहल्या,अदिति,अष्टाकर्णी,अष्टापदी,इवा,उश्रा,श्रेया गो,गौरी,दक्षिणा,दूधा, धना,धेनु,पशु,प्रस्मी,मातृ, रोहिणी,वस्त्रा,वसरा,सुरभि और नंदिनी है।।

पशु गाय का नाम है लेकिन गाय पशु नहीं है।। और यह वेद प्रमाण है।।उसी को तुलसी जी ने भी दिखाया कि जब रावण के दरबार में राम की ओर से संधि का प्रस्ताव लेकर अंगद जाता है राजदूत के रूप में वहां कहता है कि रावण! गाय पशु नहीं है। कल्पवृक्ष वृक्ष नहीं है और अमृत कोई पीने का पिणा नहीं है।। गाय का मुख वेद है।। और वेद में गाय का स्मरण किया है।।गौ सूक्त का एक मंत्र:

न तानशन्ति न दभातितस्करो

नासामामित्रोव्यथिरादधर्षति।

देवांश्र्चयाभिर्यजतेददाति च

ज्योगित्ताभिः स च तेगोपतिः सह।।

हमारे देश की गाय की नस्ल नष्टन ना हो। ऋषि कहते हैं हमारी गायों को कोई तस्करी ना करें। शत्रु बलात उसे काटे नहीं। कष्ट ना दे।। हमें ऐसी गायें मिले जिस गाय के दूध से देवताओं का हम यज्ञ करें और हमें दान करने की प्रेरणा मिले।।

यहां के बाबा जी रमेश बाबा जी इतनी उम्र पर भी बहुत ज्यादा संकल्प करते हुए और भी एक संकल्प किया है कि यदि मंजूरी मिले तो राजस्थान सहित सभी जगह पर गौशाला के साथ-साथ नंदी शाला भी शुरू करनी है।। क्योंकि नंदी की भी बहुत कटाई होती है।। महापुरुष जब बैठे हैं तो गाय बचाने के लिए ठोस निर्णय होना चाहिए।।ठोस निर्णय आवश्यक है,क्योंकि हमारा देश गौ प्रधान है ऐसा कहते हुए बापू ने कहा कि कल कथा का विराम दिन है।।

कथा के क्रम में भगवान राम के प्रागट्य के बाद मानो एक महीने तक उत्सव चलें।। शिवजी ज्योतिष का रूप लेकर भविष्य देखने बहाने लिए राम के दर्शन करने के लिए आए।। नामकरण संस्करण हुआ और चारों भाइयों के नाम हुए।।वैश्विक नाम राम है। हमारे यहां तीन राम:राघव राम,भार्गव राम और यादव राम हमें कृत कृत्य करते हैं।। पूरे विश्व को जो राम से आराम मिले वो राम है।। राम को जपने वाले बाकी के तीनों भाइयों का नाम का आधार रखें।हो सके तो जगत का भरन पोषण करें, शत्रुता नष्ट करें और सबका आधार बने।। यह भरत शत्रुघ्न और लक्ष्मण के नाम से हम कह सकते हैं।। फिर विद्या के लिए जाते हैं।

गुरु ग्रह पढन गए रघुराई।

अलपकाल सब विद्या आई।।

विश्वामित्र का आगमन होता है और सोचते हैं की मारे और तारे ऐसा कोई तत्व हमें चाहिए और समाधि में देखते हैं वह तत्व अयोध्या में है।। राम भी पदयात्रा करते हैं क्योंकि पदयात्रा से कोई अहल्या उद्धार के लिए राह देख कर बैठी है।। अहल्या का उद्धार करके राम जनकपुर में आते हैं।।

कल रामकथा का आखिरी दिन है।।

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