Homeगुजरातहमारे देश के वीर, धीर और गंभीर प्रधान मंत्री जी को प्रयोग...

हमारे देश के वीर, धीर और गंभीर प्रधान मंत्री जी को प्रयोग करने के एक साधु का बहूत अभिनंदन।।

सर्वभूत हिताय,सर्वभूत प्रीताय,सर्वभूत सुखाय जो प्रयोग किया वो बहूत अभिनंदन के काबिल।।

हमारी सेना के तीनों पंख और सभी देश वासियों को बापु ने अभिनंदन दिया।।

जिस घटना में न सुख है ना दुख है उसे आनंद कहते हैं।।

सुख-दुख से पर घटना आनंद है।।

आनंद केवल केवल किसी की कृपा और करुणा का फल है।।

जिसकी मति कभी व्यभिचारिणी नहीं हुई हो वह अनन्य है।।

चमौली के पास नंद प्रयाग के तट पर चल रही रामकथा के पांचवे दिन मौसम भी आशिकाना,बुंदा बादी और स्थानिक श्रोताओं के उत्साह से भरे पंडाल में बापु का आगमन और मधुर सूरों में शहनाइ की गुंज…

पांचवें दिन की कथा के आरंभ में ही बापू ने कहा कि आज सुबह-सुबह सुबह खबर मिली कि भारत ने सर्वभूत हिताय,सर्वभूत सुखाय और सर्वभूत प्रीताय आतंकवाद के नाश के लिए और उन्हें सपोर्ट करने वालों के खिलाफ रात के एक और दो बजे के बीच में एक प्रयोग किया।जिसमें सब का शुभ है।।इस प्रयोग के लिए हमारे वीर धीर और गंभीर प्रधानमंत्री को बहुत-बहुत अभिनंदन दे रहा हूं।। साथ-साथ हमारे देश के संरक्षण मंत्री आदरणीय राजनाथ सिंह जी और हमारे सफल गृह मंत्री अमित भाई शाह,पूरी कैबिनेट और खास मेरे देश की आर्मी की तीनों पंख और पूरे देश को एक साधु के नाते अभिनंदन करता हूं।। यह हमला नहीं प्रयोग है। करने जैसा प्रयोग है। देश काल और पात्र को देखकर करने जैसा प्रयोग है।।

देशवासियों को बापू ने बहुत अभिनंदन दिया।। बापू ने कहा जिस घटना में न सुख है ना दुख है उसे आनंद कहते हैं।। सुख-दुख से पर घटना आनंद है।। इसलिए भारत माता की जय बुलाकर बापू ने कहा कि यह प्रयोग किसी देश के ऊपर नहीं केवल आतंकवाद और आतंकवाद के आकाओं के ऊपर है छांदोग्य उपनिषद में स्पष्ट कहा है कि आनंद के लिए कोई साधन नहीं क्योंकि साधन सीमित होने के कारण साध्य भी सीमित हो जाता है।। हम जीव है। आनंद केवल किसी की कृपा का फल है।। आनंद किसी की करुणा का फल है।।

ओशो जो बात कहते हैं सभी बात से सहमत न भी होता हूं।इसमेंओशो को भी कुछ तकलीफ नहीं होगी।।ओशो ने श्रद्धा और विश्वास के बारे में नहीं कहा लेकिन विश्वास अंध नहीं। विश्वास ने दो आंख बंद रखी है।। तीसरी आंख खुली है।।मेरा विश्वास महादेव है मेरी श्रद्धा मां पार्वती है।।

अनन्य कौन है? जिसकी मति कभी व्यभिचारिणी नहीं हुई हो वह अनन्य है।। विलाप और प्रलाप शब्दों के बीच जो अंतर है वह बापू ने कुछ उदाहरण देकर समझाया।।

वाह वाह कम करो,स्वाहा स्वाहाकरो।।कहीं भी पानी पिये,गंगाजी का आचमन कर रहे है ऐसा भाव रखे।।

कहीं भी सो जाये वन की मानसिकता से सोयें।।स्वाद भोजन में नहिं भूख में है।।

राम जन्म के विधविध कारणों की चर्चा करते हुए शिव जी ने वो स्तुति भी कही।।स्तुति के एक एक शब्द की गहरी मार्मिक व्याख्या करते हुए बापु ने कहा की अवध नरेश के महल में मॉं कौशल्या की गोद में परम इश्वर,भगवान,मालिक अवतरित हुए।।मॉं ने उसे बालक बनाया।।औररोदन ठाना….सुनकर दास दासियां दौडी।।मॉं की गोद में बाल राम रो रहे है और नंद प्रयाग की भूमि से पूरे त्रिभुवन को राम जन्म की बधाइयॉं शुरु हूइ।।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read