Homeगुजरातकिसी को बाधक ना बने वह साधन है।।

किसी को बाधक ना बने वह साधन है।।

मार्ग शिष्ट शब्द मारग इष्ट शब्द है।।

मार्ग श्लोक भाषा और मारग लोक भाषा का शब्द है।।

मार्ग विद्वानों की भाषा और मारग कबीर नानक गंगा सती साधु की भाषा है।।

बेटा बाप के मार्ग पर चले,यदि बाप प्रेमी है तो।।

पत्नी पति के मार्ग पर चलें यदि पति सत्य हो।।

मॉंकरुणावान है तो बेटी मॉं के मार्ग पर चलें।।

विष्णु दादा गार्गी के मार्गी थे,श्लोक मार्गी थे।।

त्रिभुवन दादा मार्गी के मार्गी थे,लोक मार्गी थे।।

अमरीका के लिटलरॉक में चल रही रामकथा का बुधवार का पांचवां दिन आदरणीय गवर्नर साहिबा ने अपना भाव व्यक्त किया।अगले दिन की कथा का सारांश नरेश भाई ने पेश किया।।यहां रोज चल रहे शाम के सांध्य कार्यक्रमों के में, कला प्रस्तुत हुई और लेखक वक्ता जय वसावड़ा ने हिंदी में अभ्यास पूर्ण वक्तव्य पेश किया।। बापू ने माता-पिता को कहा बच्चों के खान-पान बिगड़े नहीं।आहार विहार का ध्यान रखना।।कितने बड़े व्यक्ति में छोटी कमजोरी होती है जैसे बड़े जहाज को एक छोटा सा छीद्र डूबा सकता है।। दुनिया में युद्ध नहीं रोक पाएंगे लेकिन परिवार में एक दूसरे से युद्ध ना करें अपने बच्चों के लिए समय निकालना।।१ $ कम कमाओ संपत्ति रहेगी, संतति चली जाएगी।।

डेलकार्नेगी का बहुत बड़ा किस्सा सुनाया जहां क्रोध के बारे में कहा गया है।। किसी को बाधक ना बने वह साधन है।।सब कुछ कार्य हो जाने के बाद सिर्फ सोने के लिए जाओ तब नाम स्मरण करना और जो भी रुचि है वह नाम स्मरण करना।।

आज गुजरात के भद्रायु भाई ने एक जिज्ञासा भेजी थी।।तुषार शुक्ला ने कविता और बहुत कुछ सामग्री आई थी।।

पूछा गया था कि शब्द और शबद मार्ग और मारग में क्या अंतर है? बापू ने कहा वैसे कोई अंतर नहीं लेकिन मार्ग शिष्ट शब्द मारग इष्ट शब्द है।। मार्ग श्लोक भाषा और मारग लोक भाषा का शब्द है।। मार्ग विद्वानों की भाषा और मारग कबीर नानक गंगा सती साधु की भाषा है।। वैसे ही शब्द शिष्ट और शबद कबीर नानक की भाषा का शब्द है।। कभी-कभी मार्ग हम बोलते हैं मारग पर चलते नहीं मार्ग हमें चलने की प्रेरणा देता है।। मार्ग वाचिक है और मारग निमंत्रण भेजता है।।

आज पंच मार्ग की बात करते हुए तीन पारिवारिक एक राजकीय और एक आध्यात्मिक मार्ग बापू ने कहे।।

पहला मार्ग है बेटा बाप के मार्ग पर चले।।पत्नी पति के मार्ग पर चले लेकिन आप जल्दी प्रतिक्रिया मत देना, पहले सोचना और बाद में आप मानना।। बेटी अपने मां के मार्ग पर चले।।

लेकिन पिता दुराचारी है तो बेटा कैसे चल सकता है जैसे प्रहलाद हिरनकश्यिपु के मार्ग पर नहीं चलेगा पिता यदि प्रेमी है तो बेटे बाप के मार्ग पर चलना चाहिए।। प्रमाण है राजा दशरथ। दशरथ प्रेमी है उसे धर्म कर्म भक्ति में प्रेम है।।पति सत्य हो तो पत्नी को अपने पति के मार्ग पर चलना चाहिए।। और प्रमाण है सत्यवान सावित्री।।सत्यवान सावित्री की कथा बापू ने महाभारत की वह पूरी कथा सुनाई रसमर्ड बात भी सुनाइ।। और मॉं यदि करुणा मूर्ति है तो बेटी उनके मार्ग पर चलती है।। मॉं पृथ्वी है बेटी जानकी सीता है।। पृथ्वी करुणा मूर्ति है और जानकी उनके मार्ग पर चली है।।

कोई तितली नहीं बताती है।

कि तेरी खुशबू कहां से आती है।।

यह मोहब्बत का मयकदा है।

यहां प्यास ही प्यास को बुझाती है।।

मैंने ढूंढा शराब के अंदर।

नशा तो था नकाब के अंदर!

आज भाई का फोन आ ही गया।

कुछ कमी थी हिसाब के अंदर!

सहरा ने मांगा पानी।

दरिया पर बरस गया पानी।।

अपनी मां की आंखों में था पानी।

बच्चों ने जब खाया पानी!

आखिर किस-किस नीम की जड़ में।

कब तक डाले मीठा पानी!!

-बदायुनी साहब

जो राजा नीति जानता है ऐसे राजा के मार्ग पर प्रजा को चलना चाहिए।।

अपने बुद्ध पुरुष के मार्ग पर हम मार्गी बन सकते हैं विष्णु दादा गार्गी के मार्गी थे।। श्लोक मार्गी थे और त्रिभुवन दादा मार्गी के मार्गी थे।। लोक मार्गी थे।। सनत कुमारों के पास नारद गए और छांदोग्य उपनिषद में पूछा कि सही मार्ग का मार्गदर्शन करवाओ और सनत कुमारों ने नारद से पूछा कि आप कितना जानते हैं? नारद ने पूरी यादी बनाई इतना जानता हूं।।तब कहा कि आप जो जानते हैं वह नाम मात्र है।।बापु ने कहा की मैं अर्थ करूंगा जानने योग्य नाम है।।

नाम से सुमिरन तक की यात्रा में 12 पड़ाव आए जहां नाम,वाणी,मौन,ज्ञान,चित्,विज्ञान,बल,अन्न, जल,तेज,आकाश और सुमिरन तक गए।।

कथा प्रवाह में शिव चरित्र का गान किया।। शिव विवाह की कथा की और भौतिक बुद्धि रूपी सती जल गई फिर श्रद्धा रूपी पार्वती का जन्म और पार्वती ने संशय किया।। राम जन्म के पांच कारण बताते हुए राक्षस कूल की कथा भी बताई और अवधपुरी में राजा दशरथ के महल में, मां कौशल्या की कोख से राम का प्रागट्य हुआ।।

व्यास पीठ से पूरे त्रिभुवन को राम जन्म की बधाई के साथ कथा का विराम हुआ।।

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