Homeगुजरातरामचरितमानस में नव प्रकार के गृह का वर्णन है।

रामचरितमानस में नव प्रकार के गृह का वर्णन है।

गुरु ग्रह से भी ज्यादा महत्व का गुरु गृह है।।
जो गुरु गृह जाता है उसका विषाद प्रसाद में बदल जाता है।।
गुरु हमारे मन का ज्ञाता भी है और निर्माता भी है।। गुरु गृह जाने से धीरे-धीरे वैराग्य वृत्ति आती है।।
गुरु गृह जाने से बहिर विकास और भीतरी विश्राम होने लगता है।।

महाराष्ट्र की भूमि के और विदर्भ यवतमाल की भूमि के सभी महात्माओं और बुद्धपुरुषों को वंदन करते हुए पांचवें दिन की कथा का आरंभ करते हुए बापू ने कहा कि रामचरितमानस में नव प्रकार के गृह का वर्णन है।वैसे नवग्रह भी है लेकिन वह अलग बात है पहले गृह मातृ गृह है।जहां हमारा जन्म होता है। आजकल तो अस्पतालों में प्रसूति गृह में जन्म होता है,लेकिन पुराने जमाने में हमारे घर के एक कोने में हमारा जन्म होता था वही गृह हमारा मातृ गृह है। और पूरा घर पितृ गृह माना जाता है।।
बापू ने बीच में बताया कि चार मंदिर होने चाहिए: बाल मंदिर-जहां छोटे बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलती हो,युवाओं के लिए युवा मंदिर और अपने घर को ही वृद्धाश्रम बनाए।अपने बड़े बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में मत भेजिए।।और वक्त आने पर संन्यास का मंदिर यानी कि संन्यास आश्रम भी घर में होना चाहिए।।रहते हो घर में लेकिन दृष्टि वन की तरफ उसे हम सन्यास आश्रम कहेंगे।।
पूरा घर पितृ गृह है।
तीसरा गुरु गृह है। गुरु ग्रह से भी ज्यादा महत्व का गुरु गृह है जहां सम्राट दशरथ भी गए और साक्षात ब्रह्म-राम भी गए हैं।।
गुरु ग्रह गए पठन रघुराई।
अलपकाल विद्या सब आई।।
जो गुरु गृह जाता है उसका विषाद प्रसाद में बदल जाता है। विषाद खत्म हो जाता है।। गुरु हमारे मन का ज्ञाता भी है और निर्माता भी है।। गुरु गृह जाने से धीरे-धीरे वैराग्य वृत्ति आती है।। गुरु गृह विराग दिलाता है।। गुरु गृह जाने से बहिर विकास और भीतरी विश्राम होने लगता है।।गुरु गृह जाने से विश्वास बढ़ता है।।धर्म में विकास,अर्थ में विकास, कामनाओं के विवेक में विकास और मोक्ष की तरफ भी विकास होने लगता है।।
बीच में किसी ने प्रश्न पूछा था कि बापू आपको कौन से चित्र और कौन से चरित्र पसंद है तो बापू ने अपने जो-जो चित्र पसंद है उनके बारे में विस्तार से बताते हुए सुदामा चरित्र जो बहुत पसंद है वह सुदामा चरित्र का भीगी आंखों से गायन भी किया।।
संपन्न और प्रपन्न दोनों हाथों को पकड़कर बीच में रहेगा वह प्रसन्न रहेगा।। और वही बुद्ध का मध्यम मार्ग है।।अमिर से एब नहीं लाना और गरीब से नफरत नहीं करना।।
गुजराती के अस्मिता पर्व पर उस वक्त एक साहित्यकार ने प्रश्न पूछा था कि एक तरफ विनोबा जी की बात करते हैं और एक तरफ ओशो की बात करते हैं! बापू ने कहा कि यह मेरा जवाब है साधु दोनों के बीच में होता है।। संपन्नों को बाएं हाथ से और गरीबों को दाएं हाथ से पकड़ना चाहिए।।
बापू ने भीगी आंखों से सुदामा चरित्र सुनाया। गुरु गृह विचार शून्य कर देता है।। गुरु गृह विश्वास पैदा करता है और गुरु गृह अश्रु का निदान भी करता है चौथा है ससुर का गृह। ससुर गृह माता के लिए बड़ा महत्व का है।।एक है बंदी गृह जहां मां सीता को रखी गई थी।।एक गृह का नाम कालनेमि का गृह है और सूषेण का घर वैद्य गृह है।। राजा का घर नृप गृह है और तुलसी जी ने उर गृह हृदय को भी एक गृह बताया है।।
किसी ने पूछा था कि आपको कौन से चरित्र पसंद है बापू ने कहा राम चरित्र,सीता चरित्र,शिव चरित्र,उमा चरित्र,भरत चरित्र,भूसुंडी चरित्र और कोई भी साधु का चरित्र बहुत पसंद है।।
एक किस्सा सुनाया कि डॉक्टर को फोन आया और भागे-भागे चले आए तब किसी बच्चे की मां सतत गालियां देती रही लेकिन डॉक्टर ने अपना काम पूरा किया और कुछ नहीं बोले क्योंकि उनके बेटे का भी एक्सीडेंट का फोन आया था!
आज बापू ने कथा को विराम देते हुए एक साधु का प्रश्न आया था तुकाराम कथा को मावली-मॉं कहते उनके बारे में आगे संवाद करने की बात कह कर कथा को विराम दिया।।

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