
विद्यावान कभी सूत्र और मंत्र को छोटा नहीं होने देता।।
विद्वान अपने दायरे में ही रहता है।।
भगवान की कथा सुनने सपरिवार आओ।
यहां में दोनों प्रकार के मंत्र-जपने के और जीने के मंत्र कहता हूं।।
संतोष महामंत्र है।।
धन का असंतोष सुख देगा शांति नहीं देगा
दाओस-स्विटझरलेन्ड की मनोहर भूमि से बह रही रामकथा धारा का चौथा दिन,और एक महामंत्र की संवादी चर्चा और शिव चरित्र की रसमयी कथा सुनाते हुए कहा रामचरितमानस में मंत्र शब्द करीब 18 बार आया है।।बालकांड में साबर मंत्र से उद्घोषणा हुई और सब के प्रमाण देते हुए बापू ने सभी मंत्र शब्द का गायन भी किया।।बीज पंक्ति में भी दो मंत्र आए हैं।।
विद्वान और विद्यावान में अंतर होता है।विद्यावान कभी सूत्र और मंत्र को छोटा नहीं होने देता।।विद्वान अपने दायरे में ही रहता है।।हनुमान विद्वान भी है विद्यावान भी है। गृहस्थ जीवन में मूल क्या-क्या वस्तु होती है?पति पत्नी,बच्चें, परिवार, एक छोटा सा घर,आजीविका और थोड़ी संपत्ति।।
भगवान की कथा सुनने सपरिवार आओ।
तुलसी ने एक आध्यात्मिक परिवार बनाया है लेकिन बापू ने अपने आध्यात्मिक परिवार की बात करते हुए कहा कि जब मैं गुरु वंदना करता हूं तो पहले मां सावित्री नजर आती है।।फिर अमृत मॉं और फिर त्रिभुवन दादा दिखते हैं।।मां मेरी पहली गुरु है फिर प्रभु दास बापू दिखते हैं।सीधे सरल अकिंचन साधु, पढ़े लिखे थे।। फिर ऋषिकेश कैलाश आश्रम के विष्णु दादा और राम जी मंदिर के आंगन में जो समाधि है वह जीवन दास बापा।। फिर सेंजल ध्यान स्वामी बापा की समाधि खींचती है।।आंखें बंद करता हूं तो मेरे सामने गोस्वामी तुलसीदास जी दिखते हैं।।नाभाजी के संत माल के मेरु है। अध्यात्म की माला के मेरु तुलसी है।। फिर शुकदेव जी दिखते हैं और बाद में आंखों के सामने हनुमान जी और विश्वनाथ महादेव आते हैं। और आखिर में रामचरितमानस आता है।।मां सावित्री से लेकर के चरित मेरी परंपरा है।।
गोस्वामी का अर्थ इंद्रियों का स्वामी है।। लेकिन मुझे अर्थ लगाना है तो इंद्रिय जिसे मलिक मानती है वह।।
यहां में दोनों प्रकार के मंत्र-जपने के और जीने के मंत्र कहता हूं।। दो अक्षर का,ढाई अक्षर का,पांच अक्षर का,षडाक्षर का मंत्र भी है। जो जपने के लिए है।।
सावित्री मां को माला लेकर जाप करते कभी नहीं देखा लेकिन घर की सभी काम करने का योग करती रही।।जगत से मत भागो!
तुलसी जी ने कहा है रस और रसना का विवाह करो 32 दांत परिवारजन है। चेहरा सुंदर घर है और शंकर जीसे प्रेम करते हैं वह दो अक्षर रा और म मेरे बालक है,मेरी संपत्ति है।।
आज का महामंत्र संतोष है। संतोष महामंत्र है। वैसे सिद्धि बहुत होती है मंत्र सिद्धि,तंत्र सिद्धि भी होती है। वचन सिद्धि,यंत्र सिद्धि,आसन सिद्धि, संकल्प सिद्धि,कार्य सिद्धि सभी होता है।।
साधु वह है जिसके पास भजन के सिवा छिपाने के लिए कुछ ना हो।
कुमंत्र की भी यादी मिलती है।।
साधक को ठीक से जीना है तो 3 वस्तुओं में संतोष करना:आपके साथ जितने लोग हैं संतोष रखो। अध्यात्म में बहुमति नहीं चलती।। धन का संतोष रखो।। धन का असंतोष सुख देगा शांति नहीं देगा और कर्म में संतोष रखो।।
पूर्व ग्रंथि,भय ग्रंथि, अहंकार ग्रंथि, पाप ग्रंथि जैसी ग्रंथियां रामचरितमानस में दिखती है कथा प्रवाह में शिवचरित्र पार्वती विवाह और कन्या विदाय के प्रसंगो का गान हुआ।।

