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प्रभु श्री राम और हनुमान जी पहली बार जहां मिले वो रिषिमुक पर्वत की पौराणिक नगरी हम्पी से हुआ चौथा मुकाम।।

पोथी के प्रताप से हम यहां पहुंचे,पोथी का प्रभाव भी है और पोथी के प्रसाद से हम घूम रहे हैं।।

मानस स्वयं स्वस्तिक है,कल्याणकारी है।।

बारह प्रकार के दर्शन से मंगल होता है।।

भारतीय,सावित्री आंख लेकर सर्वभूत हिताय, सर्वभूत सुखाय,सर्वभूत प्रिताय ये विश्व दर्शन है।।

हमारे राष्ट्रीय चलन पचास रुपिये की नोट पर जो चित्र अंकित है वो पुरानी ऐतिहासिक नगरी हम्पी,जहां प्रभु श्री राम हनुमान जी से पहलीबार मिले वो रिष्यमुक पर्वत तीर्थ में चौथे दिन की कथायात्रा पहुंची।।बापु ने चारों बीज पंक्तियों का गान करके बताया कि यह भूभाग कइं विशेष चेतनाओं से भरा है।पौराणिक दृष्टि से मॉं भुवनेश्वरी, विरुपाक्ष महादेव,मनमय सरोवर है। यह भी हमें स्वीकार करना होगा कि इस भूमिका संबंध चारों युगों से है,क्योंकि हनुमान जी की भूमि है।।मॉं अंजनी ने तप किया और हनुमान जी का प्रागट्य हुआ।।

इस भूमि पर जब भी आना हुआ प्रवर्षण पर्वत की गुफा में भगवान ने चातुर्मास किया था उस वक्त मोंघी मां के आयोजन में सालों पहले कथा गान किया था।। सबसे बड़ा स्मरण यह है की कथा के दौरान कांची कोटी पीठ से शंकराचार्य जी पदयात्रा करते थे दर्शन के लिए पधारे।कथा में आए थे और बापू ने जगतगुरु कांचीपीठ के गुरुदेव जैनेंद्र सरस्वती जी के आशीर्वाद से वापी मुंबई में कथा गान किया।।मातृशक्ति की भूमि तुंगभद्रा।।लोक माता के तट पर शबरी के बैर तो खाए और उनके बोलों को राम ने कानों से चखा था।। बोर भी खाये! भगवती सीता की खोज का आरंभ यहां से हुआ। स्वयंप्रभा की भूमि।।

बापू ने कहा की पोथी के प्रताप से हम यहां पहुंचे। पोथी का प्रभाव भी है और पोथी के प्रसाद से हम घूम रहे हैं।।

बापू ने १२ प्रकार के दर्शन से मंगल होता है वह बताते हुए कहा::

१-मानस दर्शन ।।मानस स्वयं स्वस्तिक है।। पोथी लेकर साथिया रचना निकले हैं।।बापू ने स्वास्तिक स्लेट पर चित्रित कर के भी दिखाया जो १२वस्तु से बना हुआ है।।वेद,शास्त्र दर्शन मंगलकारी है।।२- गौ माता का दर्शन।।गाय के बारे में विशिष्ट लोगों के पास बात पहुंचे तो गाय का रक्षण और प्रेम होता है धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष गाय के चार आंचल है।।

३-साधु दर्शन,आचार्य-संत दर्शन।।४-देश दर्शन। ५-विश्व दर्शन:भारतीय सावित्री आंख लेकर सर्वभूत हिताय,सर्वभूत सुखाय,सर्वभूत प्रिताय दर्शन है।।

६-निज दर्शन,आत्म दर्शन।।७-देव दर्शन-इष्ट देव के दर्शन।८-ब्रह्म दर्शन।९-नव प्रकृति दर्शन।

१०-परस्पर्श शुभ दर्शन।।११-तत्व दर्शन।१२-समाधि दर्शन।।

कथा प्रवाह में रामचरित मानस सरोवर के रूपक में चार घाट और हर एक घाट पर कथा का आरंभ हुआ।।एक बार के कुंभ में याग्यवल्क्य और भारद्वाज का संवाद हुआ।राम तत्व के बारे में पूछा गया। तो सबसे पहले शिवकथा से आरंभ हुआ यह सभी प्रसंग को संक्षिप्त में लेकर आखिर में

कल की कथा मॉं शंकराम्बा के चरणों में अर्पण की गइ थी।।

कथा-विशेष:

हम्पी मुख्य रूप से मध्यकालीन हिंदू साम्राज्य विजयनगर साम्राज्य की राजधानी और अपने भव्य प्राचीन मंदिरों,ऐतिहासिक खंडहरों तथा अनूठी चट्टानी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।।

विजयनगर साम्राज्य की राजधानी:१४वीं शताब्दी में हरिहर और बुक्का ने इसकी स्थापना की थी। यह १४वीं से १६वीं शताब्दी के दौरान दुनिया के सबसे समृद्ध और शक्तिशाली शहरों में से एक था।•

विशिष्ट मंदिर और वास्तुकला:•

विट्ठल मंदिर:अपनी द्रविड़ वास्तुकला,५६ संगीतमय स्तंभों और प्रसिद्ध पत्थर के रथ (Stone Chariot) के लिए जाना जाता है (जो ₹५० के नोट पर भी अंकित है)।

विरुपाक्ष मंदिर:७वीं शताब्दी का यह मंदिर आज भी सक्रिय पूजा स्थल है।

  • अन्य संरचनाएं:कमल महल (लोटस महल), हजारा राम मंदिर और विशाल पत्थरों की नक्काशी।
  • यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल: वर्ष १९८६ में इसे यूनेस्को विश्व धरोहर घोषित किया गया था।यहाँ तुंगभद्रा नदी के तट पर ५००से अधिक ऐतिहासिक स्मारक फैले हुए हैं।
  • पौराणिक महत्व: रामायण काल में इसे ‘किष्किंधा’ के क्षेत्र के रूप में भी जाना जाता था।

शेष-विशेष:

पांचवे दिनकी रामकथा जहां होने जा रही है वो तुलजापुर:

तुलजापुर भारत के महाराष्ट्र राज्य के धाराशिव (पुराना नाम उस्मानाबाद)जिले में स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक एवं ऐतिहासिक शहर है।

यह शहर माता श्री तुलजा भवानी के पावन मंदिर के लिए पूरे देश में जाना जाता है।

शक्तिपीठ: तुलजापुर महाराष्ट्र के साढ़े तीन शक्तिपीठों में से एक प्रमुख शक्तिपीठ माना जाता है।

कुलदेवी: माता तुलजा भवानी को छत्रपति शिवाजी महाराज की कुलदेवी कहा जाता है।ऐसा विश्वास है कि माता ने उन्हें ‘भवानी’ नामक तलवार प्रदान की थी।

मंदिर की वास्तुकला: यहाँ का मुख्य मंदिर हेमदपंथी शैली में बना हुआ है और इसका प्रांगण बहुत सुंदर है।मंदिर के गर्भ गृह में माता की स्वयंभू प्रतिमा विराजमान है।

कलोल तीर्थ और गौमुख तीर्थ: मंदिर परिसर में स्थित पवित्र जलकुंड, जिनका धार्मिक रूप से बहुत अधिक महत्व है।

चिंतामणि पत्थर: मंदिर के पीछे एक विशेष पत्थर है,जिसके बारे में मान्यता है कि इस पर सिक्का रखकर सवाल पूछने पर यह घूमकर हाँ या ना में जवाब देता है।

सिद्धिविनायक मंदिर: मुख्य मंदिर परिसर के पास ही भगवान श्री गणेश का प्राचीन मंदिर स्थित है।

पापनाशी तीर्थ और विष्णु तीर्थ: शहर में स्थित अन्य प्रमुख धार्मिक व दर्शनीय स्थल।

सोलापुर से (लगभग ४६ किमी) और धाराशिव (लगभग ३१किमी) हैं।।

==समाप्त==

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