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QS I-GAUGE का भारतीय शिक्षा में AI पर राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन: जिम्मेदार और गुणवत्तापरक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अपनाने पर जोर

शिक्षा जगत के दिग्गजों, नीति-निर्माताओं और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने AI की तैयारी, शासन व्यवस्था, अकादमिक ईमानदारी और भारत में शिक्षा के भविष्य पर किया मंथन

गांधीनगर, गुजरात | 21 अगस्त 2026 | आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के माध्यम से छात्रों के सीखने और शैक्षणिक संस्थानों के संचालन के तरीकों में लगातार बदलाव के बीच, QS I-GAUGE द्वारा आयोजित National Summit on AI in Indian Education में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न हितधारक एक मंच पर आए। सम्मेलन में उच्च शिक्षा और K-12 शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापरक एवं जिम्मेदार AI को अपनाने की दिशा में भारत की आगे की रणनीति पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। QS I-GAUGE भारत की एक विश्वसनीय और स्वतंत्र शैक्षणिक संस्थान रेटिंग एवं मूल्यांकन प्रणाली है।

इस शिखर सम्मेलन में चर्चा इस सवाल से आगे बढ़ी कि शैक्षणिक संस्थानों को AI अपनाना चाहिए या नहीं, और इसका केंद्र इस बात पर रहा कि AI को जिम्मेदारी, नैतिकता और सार्थक शैक्षणिक उद्देश्यों के साथ किस प्रकार एकीकृत किया जा सकता है।

‘Advancing Responsible AI for Access, Equity and Excellence’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में वरिष्ठ शिक्षाविदों, शिक्षा विशेषज्ञों, स्कूल प्रमुखों, नीति-निर्माताओं, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों, गुणवत्ता आश्वासन विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में शिक्षा के क्षेत्र में AI के बढ़ते उपयोग से उत्पन्न अवसरों और चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

गुजरात सरकार में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, वन एवं पर्यावरण तथा जलवायु परिवर्तन विभाग के माननीय मंत्री श्री अर्जुनभाई देवाभाई मोढवाडिया पहले दिन आयोजित समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा, “AI को अपनाने की प्रक्रिया नैतिक और समावेशी होनी चाहिए। जीवन के हर पहलू की तरह इसमें भी चुनौतियां और अवसर साथ-साथ आते हैं। भविष्य को ध्यान में रखते हुए हमारे स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम ढांचे में डिजिटल एवं AI साक्षरता को शामिल किया जाना चाहिए। आइए, हम सभी अपने छात्रों को बेहतर पाठ्यक्रम के माध्यम से AI टूल्स को अपनाने में सक्षम बनाकर AI-प्रथम भविष्य के लिए तैयार करें।”

भारत अपनी AI यात्रा के एक निर्णायक चरण में है, ऐसे में सम्मेलन में हुई चर्चाएं विशेष महत्व रखती हैं। भारत सरकार के IndiaAI Mission, जिसके लिए ₹10,372 करोड़ का राष्ट्रीय बजट निर्धारित किया गया है, तथा भविष्य के लिए आवश्यक कौशल पर बढ़ते जोर के बीच शैक्षणिक संस्थानों में AI आधारित शिक्षण, अध्ययन, शोध, मूल्यांकन और प्रशासन की मांग लगातार बढ़ रही है।

QS I-GAUGE के प्रबंध निदेशक श्री रविन नायर ने कहा, “AI अब शिक्षा के लिए कोई दूर की संभावना नहीं है, बल्कि यह पहले से ही कक्षाओं, परिसरों और संस्थागत निर्णय लेने की प्रक्रियाओं को प्रभावित कर रहा है। अब प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि AI को अपनाने की प्रक्रिया उद्देश्य, जिम्मेदारी और मापनीय शैक्षणिक परिणामों द्वारा निर्देशित हो। संस्थानों को केवल AI-सक्षम बनने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि उन्हें इस तरह AI-रेडी बनना होगा, जिससे मानवीय क्षमताओं और शैक्षणिक उत्कृष्टता को मजबूती मिले।”

व्यापक ढांचे की आवश्यकता

शिखर सम्मेलन से निकलकर सामने आए प्रमुख संदेशों में से एक यह था कि केवल AI टूल्स तक पहुंच को किसी संस्थान की AI-तैयारी का पैमाना नहीं माना जा सकता। शैक्षणिक संस्थानों को शासन व्यवस्था, शिक्षकों एवं फैकल्टी की तैयारी, नैतिक उपयोग, डेटा सुरक्षा, अकादमिक ईमानदारी, मूल्यांकन प्रणाली, समावेशन और मापनीय प्रभाव जैसे पहलुओं को शामिल करते हुए व्यापक ढांचे विकसित करने की आवश्यकता है।

QS India के चेयरमैन एवं QS Quacquarelli Symonds के वाइस प्रेसिडेंट डॉ. अश्विन फर्नांडिस ने कहा, “शिक्षा में AI का भविष्य केवल एल्गोरिदम से निर्धारित नहीं होगा, बल्कि उन ढांचों से निर्धारित होगा जो इनके उपयोग को नियंत्रित करेंगे। इसके साथ ही शिक्षकों को AI के प्रभावी उपयोग के लिए सक्षम बनाना आवश्यक है तथा उन्हें आवश्यक कौशल और सहयोग प्रदान करना होगा, ताकि AI प्रत्येक विद्यार्थी के लिए उपयोगी साबित हो सके। शिक्षकों की तैयारी एक महत्वपूर्ण पहलू है और तभी AI सार्थक शिक्षा के लिए एक प्रभावी माध्यम बन सकता है।”

प्रतिभागियों ने इस आवश्यकता पर भी चर्चा की कि संस्थानों को बिखरे हुए या तदर्थ तरीके से तकनीक अपनाने के बजाय अपने शैक्षणिक उद्देश्यों और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप सुनियोजित AI रणनीतियां विकसित करनी चाहिए।

चर्चा के प्रमुख क्षेत्रों में संस्थागत AI नीतियों और शासन ढांचे का विकास, Generative AI के दौर में मूल्यांकन एवं परीक्षा प्रणालियों का पुनर्गठन, छात्रों और शिक्षकों के डेटा एवं डिजिटल अधिकारों की सुरक्षा तथा AI के साथ प्रभावी ढंग से काम करने के लिए शिक्षकों और फैकल्टी की क्षमता को मजबूत करना शामिल रहा।

शिखर सम्मेलन में शोध एवं ज्ञान सृजन में AI की बढ़ती भूमिका पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने पारदर्शिता, उचित श्रेय, शोध की अखंडता और AI द्वारा निर्मित सामग्री के जिम्मेदार उपयोग के महत्व पर जोर दिया।

K-12 शिक्षा: बच्चों की सुरक्षा के साथ AI-रेडी स्कूलों का निर्माण

सम्मेलन के दूसरे दिन का केंद्र स्कूल शिक्षा रहा, जिसमें बच्चों और युवा विद्यार्थियों के बीच AI को शामिल करने से जुड़े विशिष्ट अवसरों और जोखिमों पर चर्चा की गई।

प्रतिभागियों ने रेखांकित किया कि स्कूलों में AI को अपनाने का दृष्टिकोण उच्च शिक्षा से अलग होना चाहिए। इसका कारण बाल सुरक्षा, आयु-उपयुक्त तकनीक, डेटा गोपनीयता, शिक्षकों की तैयारी, अभिभावकों का विश्वास और मानवीय निगरानी जैसे पहलुओं का अधिक महत्वपूर्ण होना है।

चर्चाओं में इस बात पर भी जोर दिया गया कि AI को बच्चों की स्वतंत्र सोच, रचनात्मकता, सामाजिक सहभागिता या मानसिक एवं भावनात्मक कल्याण को प्रभावित नहीं करना चाहिए।

शिखर सम्मेलन में AI के विभिन्न स्तरों पर परिपक्वता वाले शैक्षणिक संस्थानों के लिए व्यावहारिक ढांचे विकसित करने के उद्देश्य से शैक्षणिक संस्थानों, सरकार, प्रौद्योगिकी कंपनियों, गुणवत्ता आश्वासन संस्थाओं और शिक्षकों के बीच अधिक सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

उच्च शिक्षा और स्कूली शिक्षा में उत्कृष्टता को मान्यता प्रदान करते हुए, 91 शैक्षणिक संस्थानों को QS I-GAUGE रेटिंग प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। इन संस्थानों ने अकादमिक गुणवत्ता और शैक्षणिक मानकों से जुड़े कठोर मानदंडों को पूरा किया।

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