
गौ माता हमारे आंगन में कल्याण की स्थापना करती है।।
पांच ग-गौरी,गीता,गायत्री,गंगा और गौ माता हमारी आठ वस्तुओं पर प्रभाव डालती है।।
पूजा हमारी सेवा में बदलना जरूरी है।।
पलक पर ध्यान देने से पल में जी सकेंगे।।
रामकथा में आज हुआ राम प्रागट्योत्सव।।
गाय की पूजा भी करें सेवा भी करें और गाय को प्रेम करें।।
हर परिवार पांच पांच वृक्ष बोयें और हो सके तो एक गाय को पालें।
भल अवसर किसे कहते है?
महाराणीराधाराणी के प्रेमधाम बरसाना में चल रही रामकथा के सांतवे दिन जब आज पांचवा नवरात्र है सभी संत जनो विद्वजनों परम पावन चेतनाओं को प्रणाम कर के बापु कथा आरंभ करें इसे पूर्ण जो संस्था की शताब्दी होने जा रही है ऐसी आर.एस.एस. के प्रबुद्ध पुरुष महापुरुष भैया जी जोशी ने व्सास पीठ के वंदना की और अपने भाव रखते हुए कहा कि विश्व में सनातन धर्म भारत के कारण टिका है और भारत में सनातन हिंदू परंपरा को कायम रखने के लिए ऐसे संत महंत महापुरुष कथाकार और बहुत से प्रवचनकर वक्ताओं के कारण सनातन आज पूरे विश्व में छा रहा है।।
बापू ने कहा कि देश में आग्रह की नहीं औदार्य की बहुत जरूरत है।।
आज कांदिवली हवेली के द्वारकेश लाल जी महाराज ने भी अपना भाव रखा।।
गौ सूक्त का एक मंत्र कहता है गौ माता हमारे आंगन में कल्याण की स्थापना करती है।। हमारे आंगन में रहकर वो रंभित होती है,रांभती है वह बोले वह भी कल्याणकारी है।। हमारी गौशाला या हमारे घर में विविध रंग के बछड़े को जन्म दे और उषा काल में, वेद का इंद्र हमें ऐसी गाय दे जो उषा काल में दुग्ध प्रदान करें-रिषीमुनी प्रार्थना करते हैं।।
शक्रादय स्तोत्र हमारे यहां देवी का स्त्रोत है।। वहां लिखा गया है की पांच ग-गौरी,गीता,गायत्री,गंगा, और गौ माता यह पांचो हमें आठ वस्तुओं पर प्रभाव डालती है।। उसे महसूस करें।। वैदिक परंपरा के दुग्ध को पीकर गगन छोटा पड़े ऐसे सनातन में जी वालों इन पर गौर करें! गंगा कितनी प्रभावक है धन-धान्य पर प्रभाव है।। कितनी फसल पक देती है प्रजा पर प्रभाव करती है।। तीसरा हमारे शरीर पर प्रभाव करती है।। चौथा हमारी लोक यात्रा पर, पांचवा सनातन धर्म को बड़ा करती है।। छठ्ठा स्वर्ग पर सातवां रिषी पर और आठवां हमारे पूर्वजों पर स्वाभाविक प्रभाव डालती है।।
इतना जरूर समझे कि यह पांचो प्रभाव-हमारे धन पर प्रभाव इसका मतलब क्या? दुनिया में धनवान सब पर प्रभाव डालने की कोशिश करता है।।यहां धन को लक्ष्मी में परिवर्तन कर देती है।।धन श्री बन जाता है।।हमारे यहां श्री सूक्त भी आया और यहां कल्याण बाबा को हिमालय में श्री सूक्त पर एक कथा की मनोरथ भी है।।
धन पर गौ माता ने प्रभाव डाला इसलिए लक्ष्मी रूप बनकर अच्छे कार्य में लग जाता है।।
हम पूजा करते हैं लेकिन वृक्ष के मूल में पानी डालें वह सेवा है।। पूजा हमारी सेवा में बदलना जरूरी है मीराबाई कहती है कि मैं कुछ पूजा नहीं जानती। भगवान कृष्ण के दिनचर्या में को पूजा का स्थान है।। गाय की पूजा भी करें सेवा भी करें और गाय को प्रेम करें।।
हर परिवार पांच पांच वृक्ष बोयें और हो सके तो एक गाय को पालें।व्यास पीठ की सुनने से ये रिकॉर्ड टूट सकता है।।
यह माता ही हमारी पूजा रूपी कर्मकांड को दीक्षित करके सेवा में परिवर्तित कर देती है।। धन,शरीर,धर्म लोक कल्याण,धरती पर स्वर्ग उतारती है।।
पांच माताएं शरीर को बल ऊर्जा प्रदान करती है।। गायत्री प्रकाश प्रदान करती है।। हमारे पूर्वज और पितृओं हमें आशीर्वाद प्रदान करते हैं।।
पार्वती ने भल अवसर देकर शिव से पूछ।। सब की सेवा करने का अवसर मिले वह भल अवसर है। अपने गुरु से विवेक धैर्य और दृढाश्रय से सेवा करने का अवसर वह भल अवसर है।।साधुभजनानंदी को देखकर आंख से आंसू निकल आए वह भल अवसर है।। अपने इष्ट देव का स्मरण करना भल अवसर है।। सुख-दुख मान अपमान जैसे द्वंद परेशान करें तब बुद्ध पुरुष का आश्रय न छूटे वो भल अवसर है।। किसी को देने का अवसर आए तब भल अवसर है।।
पलक पर ध्यान देने से पल में जी सकेंगे।।
पार्वती ने शिव से राम जन्म के कारण और हेतु की बात बताई और शिव ने राम जन्म के बारे में पांच हेतु बताएं और यह भी कहा कि परम तत्व किसी भी हेतु के बगैर साधु और गाय के कल्याण के लिए अवतरित होता है।।
इश्वर का अवतार इस विधि से होता है:पहले प्रयत्न फिर पुकार बाद में प्रार्थना फिर प्रतिक्षा और बाद में उन के प्रसाद से होता है प्रागट्य।।
दशरथ के महल में मॉं कौशल्या के उर से इश्वरउदरस्थ हुए और राम प्रागट्यहुआ।।बरसाने की व्यास पीठ से त्रिभुवन को राम जन्म की बधाइ दी गइ।।

