
संदीप चौधरी कौन हैं?
एक ऐसी दुनिया में जहाँ उद्यमी केवल शोहरत और मुनाफे के पीछे दौड़ते हैं, संदीप चौधरी उन गिने-चुने लोगों में हैं जो अपनी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि जिन चीज़ों को उन्होंने त्यागा — उनसे पहचाने जाते हैं।
बॉलीवुड से लेकर ब्लॉकचेन तक, मेटावर्स से लेकर मंत्रालयों तक, संदीप की ज़िंदगी दूरदृष्टि, साहस और एक अडिग उद्देश्य का प्रतीक है। वो सिर्फ एक बिज़नेसमैन नहीं हैं — वो एक वैश्विक शक्ति हैं।
उन्होंने 2008 में ही Google USA से कमाई शुरू कर दी थी। वो उस मल्टीमिलियन डॉलर फिनटेक स्टार्टअप का हिस्सा रहे जिसे CRED के संस्थापक कुणाल शाह का समर्थन मिला। वहीं दूसरी ओर, उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित हिंदी फ़िल्म ‘ये है इंडिया’ का निर्माण किया, जो Cannes Film Festival में प्रदर्शित हुई और Festival of Globe, USA (2017) में सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म पुरस्कार से नवाज़ी गई। ऐसे लोग बहुत कम हैं जिन्होंने सिनेमा और स्टार्टअप दोनों जगत में इतिहास रचा हो — लेकिन संदीप ने किया।
उन्होंने दुनिया के नेताओं से मुलाकात की — जापान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से, घाना और केन्या जैसे अफ्रीकी देशों के गणमान्य व्यक्तियों से, और उन्हें प्रेरणा मिली सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह से, जो उन्हें अपने परिवार जैसा मानते हैं। उन्होंने बुर्ज खलीफा की 149वीं मंज़िल पर बैठकर काम किया, अत्याधुनिक AI प्रोजेक्ट्स पर काम किया, और 10 लाख से भी अधिक लोगों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की — सीखा, सिखाया और नेतृत्व किया।
और फिर 2021 में, जब उनका करियर चरम पर था — उन्होंने सब कुछ छोड़ दिया।
क्योंकि उन्हें एक और गहरी पुकार सुनाई दी — एक संकटग्रस्त धरती की पुकार।
यहीं से जन्म हुआ Save Earth Mission का — जो आज दुनिया का सबसे बड़ा जलवायु परिवर्तन आंदोलन बन चुका है, जिसका उद्देश्य है 2040 तक 30 अरब पेड़ लगाना। संदीप के नेतृत्व में मिशन ने हाल ही में गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया — सिर्फ एक घंटे में 5 लाख से ज़्यादा पेड़ लगाकर, वो भी जियोटैगिंग और AI आधारित निगरानी प्रणाली के साथ।
संदीप ने न केवल धरती पर, बल्कि डिजिटल दुनिया में भी क्रांति रची। उन्होंने 2025 का सबसे उन्नत मेटावर्स तैयार किया — जिसे Fame Time International Excellence Awards, बैंकॉक में सम्मानित किया गया। यह मेटावर्स एक आभासी अनुभव से कहीं ज़्यादा था — यह एक डिजिटल इकोसिस्टम था, जो लोगों को जलवायु शिक्षा, जागरूकता और कार्रवाई से जोड़ता है।
और जब ये पुरस्कार उन्हें मिल रहे थे, तब वो कहीं मंच पर नहीं थे — क्योंकि वो व्यस्त थे इतिहास के सबसे बड़े पर्यावरणीय केस स्टडी को First India News पर लाइव प्रस्तुत करने की तैयारी में।
संदीप चौधरी सिर्फ एक नाम नहीं हैं — वो इस बात का प्रमाण हैं कि जब प्रतिभा, दृष्टि, और विनम्रता एक साथ आते हैं, तब कैसे कोई इंसान मानवता की सेवा में अपनी सफलता समर्पित कर देता है।
वो ज़मीन से उठे, दुनिया पर छा गए, और अब सब कुछ लौटा रहे हैं — धरती के लिए, भविष्य के लिए, हमेशा के लिए।

