
प्रश्न लेकर मत सुनो,खाली होकर सुनो!
श्रवण महान रस है।
माला हमारे भजन का साक्षी है,बेरखा साक्षी है।।
त्रिभुवन ने मुजे त्रिभुवन को दे दिया!
मुझे तुम्हें सौंप दिया गया है।।
तुम भूल सकते हो, मैं भूल नहीं सकता।।
साधु महामंत्र है।।
दूसरों की पूर्णता देखकर जो खुशी से उछलते हैं ऐसे लोग को साधु कहना महामंत्र है।।
सत्य,प्रेम और करुणा जीन में दिखे ऐसे को साधु कहकर पुकारना महामंत्र है।।
दाओश-स्विटझरलेन्ड की मनमोहक भूमि पर चल रही कथाधारा में आंठवां संक्षिप्त विहंगावलोकन से भरा रहा।।
आरंभ में एक श्रोता ने पूछा था की रामकथा और अन्य ग्रंथ जो हमें-हम भीतर से विचलित है ऐसे मानसिक तनाव में यह महामंत्र कैसे शांति दे सकता है?
बापू ने कहा की अर्जुन ने भीष्म से एक भी प्रश्न नहीं पूछा।नकुल सहदेव भी ने नहीं पूछा।।क्योंकि अर्जुन ने कृष्ण से बुद्ध पुरुष से 700 श्लोक में सब सुन लिया था।।
कुछ होने के लिए कथा मत सुनो,जो हो वह समझने के लिए कथा सुनो! प्रश्न मन में उठते हैं लेकिन पहले तीन कथा,भगवद कथा अलग-अलग विषय की सुनो।शास्त्र खुद जवाब देगा, आपके प्रश्नों के जवाब मिलेंगे।। जब अनुकूलता मिले समस्या का समाधान भागवत कथा प्रदान कर सकती है।।
प्रश्न लेकर मत सुनो,खाली होकर सुनो! श्रवण महान रस है।
संतत सुनिय राम गुण ग्रामहि… एक ही बार आया है जो सुनते नहीं उनके भाग-भाग्य पूरे हो गए हैं। श्रवण भक्ति के भोग पर वक्ता होने की जरूरत नहीं रियाज किए बिना कार्यक्रम देना विफलता है।। व्यवस्था के लिए जो साधु पुरुष आए उसने बहुत अभ्यास और बहुत तप किया है।।
बापू ने कहा कि मैंने भजन पंचक बनाया है::सांस- सांस,कदम-कदम पर,पलक-पलक पर,धड़कन- धड़कन पर बेरखा या मालिक माला के मनके पर नाम स्मरण,भजन जप करता,जाप करना जरूरी है उसे में भजन पंचक कहता हूं।। पूछा गया कि भजन और जप करने के लिए माला जरूरी है कि नहीं? किसी का ब्याह हम साक्षी देकर करते हैं। अग्नि की साक्षी,साधु साक्षी,वेद,पुराण,संत,महादेव साक्षी बनते हैं।।सिद्धांत रखना है तो वेद की साक्षी शंकर की साखी करते हैं।। माला हमारे भजन का साक्षी है बेरखा साक्षी है।। वह शाख पूरेगा कि मेरे मनके पर उंगली रखकर तुझे बहुत याद किया है। वह गवाह है साक्षी है दृष्टा है।। बेरखा,माला,रामनामी तलगाजरडा की देन है।। हाथ में ‘भरोसा’, राम’ आदि लिखना,आपकी झोली में रामायण और गीता रखवाना वह भी तलगाजरड़ा की देन है।।
त्रिभुवन दादा ऐसे अंकिचन साधु हमें क्या दे सकते हैं? उठाकर मुझे सबको दे दिया है! त्रिभुवन ने मुजे त्रिभुवन को दे दिया! मुझे तुम्हें सौंप दिया गया है।। तुम भूल सकते हो, मैं भूल नहीं सकता।।
आज का मंत्र है:साधु।साधु महामंत्र है।।
मुख से किसी को देखकर साधु शब्द निकल जाए तो हमारी पिढियों के पाप धो जाते हैं।।
प्रश्न यह उठेगा की कौन साधु? रामचरितमानस में विस्तृत रूप में अरण्य कांड के अंत में नारद के सामने साधु का वर्णन हुआ।।उत्तरकॉंड में भरत के सामने भगवान ने साधुओं के लक्षण की विशुद्ध चर्चा की है।।वंदना प्रकरण में तुलसी जी ने भी बहुत लिखा है।। बेरखा साधु का आभूषण है।राम ने साधु के गुण पर कहा मैं साधु का गुण देखकर मैं साधु के वश में हो जाता हूं।। साधु महामंत्र है रामचरितमानस में साधु शब्द कड़ी 75 बार आया है शांति भी महामंत्र है,जो छह बार आया है।।
साधु चरित सुभ चरित कपासु।
निरस बिसद गुन मयि फल जासू।।
साधु का जीवन कपास के फूल समान श्वेत होता है कई गुण मतलब रेसां धागे होते हैं।। हनुमान जी भी कपास का फूल है, इसीलिए लिखा है: जय हनुमान ज्ञान गुण सागर।।ये गुन कहां से आए? मां जानकी ने वरदान दिया है।। मां के आशीर्वाद से आदमी गुण सागर बन सकता है।। मानस में तीन बार सज्जन की व्याख्या मिलती है। एक बार हनुमान जी ने एक बार राम और एक बार तुलसी जी ने वह व्याख्या की है।।लंका में विभीषण जागते ही राम राम का स्मरण करता है तब हनुमान ने देखा है।।
जिसका वर्णन करने में कवि,पंडित,ब्रह्मा विष्णु और खुद शिव की वाणी भी सकूचाती है ऐसे साधु कहना वो महामंत्र है।। सुधा (अमृत) सुधाकर (चंद्र )सूर सारी (गंगा) समान व्यक्ति को साधु कहकर पुकारना महामंत्र है। दूसरों की पूर्णता देखकर जो खुशी से उछलते हैं ऐसे लोग को साधु कहना महामंत्र है।। परमार्थ का जानकारी, शंभू का साधक लेकिन विष्णु की निंदा न करने वाला हो ऐसा कोई मिले उसे साधु कहना महामंत्र है।। वेद,पुराण,शास्त्र, दर्शनों के समुद्र से लेकर बादल बनकर बरसता है वह साधु है।। अच्छा से अच्छा तत्व रहस्य को जो छीपाता नहीं वह साधु है।। सत्य,प्रेम और करुणा जीन में दिखे ऐसे को साधु कहकर पुकारना महामंत्र है।। स्वाभाविक सरल तरल और सहज हो वह साधु है।।ऐसे 16 लक्षण साधु के बताएं और कथा प्रवाह में धनुष्य भंग,सिय रघुबीर विवाह प्रंसंग गा कर बालकॉंड का समापन हुआ।।
कल रामकथा का आखिरी विराम का दिन है।।

