एसबीआई म्यूचुअल फंड की एक निवेशक शिक्षा एवं जागरुकता पहल
गुजरात, अहमदाबाद | 16 सितंबर 2025: भारत में निवेश का परिदृश्य काफी बदल गया है, जहां बचत का वित्तीयकरण बढ़ा है। पारंपरिक निवेश से लेकर आधुनिक वित्तीय साधनों तक, निवेशकों के व्यवहार में बड़ा बदलाव आया है। वे अब पूंजी बाजारों में भागीदारी के जरिए ज्यादा से ज्यादा पैस कमाना चाहते हैं।
एक समय बाजार पर फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे पारंपरिक साधनों का दबदबा था, लेकिन अब मार्केट काफी बदल गया है और यह म्यूचुअल फंड, रीयल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETFs) जैसे आधुनिक उत्पादों को अपनाने लगा है। हालांकि, पहले म्यूचुअल फंड में निवेश केवल महानगरों और टियर-1 शहरों तक सीमित था, लेकिन हाल के रुझान बताते हैं कि टियर-2 और टियर-3 शहर (जिन्हें B30 या “बियॉन्ड टॉप 30” शहर कहा जाता है) म्यूचुअल फंड उद्योग के लिए विकास के मजबूत इंजन बन रहे हैं।
B30 शहरों का बढ़ता प्रभाव
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) के अनुसार, जुलाई 2025 तक B30 लोकेशंस ने म्यूचुअल फंड उद्योग की कुल प्रबंधनाधीन परिसंपत्ति (एयूएम) का 18% योगदान था।
इन क्षेत्रों से एयूएमजून 2025 के 13.80 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर जुलाई 2025 में 14.20 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई, जो मासिक 3% की वृद्धि दर्शाता है। साथ ही, इसमें जुलाई 2024 के 11.77 लाख करोड़ रुपये की तुलना में21% का मजबूत वार्षिक विकास हुआ है। यह उछाल छोटे शहरों में वित्तीय पहुंच की गहराई और निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दिखाता है।(स्रोत: T30 बनाम B30 report)
वृद्धि को बढ़ावा देने वाले प्रमुख ट्रेंड्स
सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान्स (एसआईपी) के माध्यम से मासिक निवेश लगातार बढ़ रहा है, भले ही बाजार में उतार-चढ़ाव हो। यह निवेशकों की अनुशासित, लंबी अवधि की निवेश रणनीतियों की मजबूत पसंद को दर्शाता है, चाहे बाजार की स्थिति कुछ भी हो। यह बदलाव विविध समूहों में बढ़ती वित्तीय परिपक्वता और समावेश को दिखाता है।
- निवेशकों की बड़ी संख्या
निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, खासकर गैर-महानगरीय क्षेत्रों में। म्यूचुअल फंड फोलियो की कुल संख्या में सालाना 32% की बढ़ोतरी हुई, जो वित्त वर्ष 25 में 23.45 करोड़ हो गई, जबकि वित्त वर्ष 24 में यह 17.78 करोड़ थी। ग्रोथ और इक्विटी-ओरिएंटेड योजनाओं में फोलियो 33.4% बढ़े, जो 16.38 करोड़ तक पहुंच गए। (स्रोत: एएमएफआईवार्षिक रिपोर्ट)
- एसआईपीलंबी अवधि के निवेश को बढ़ावा दे रहे हैं
सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान्स (एसआईपी) रिटेल भागीदारी को बढ़ाने में सबसे महत्वपूर्ण हैं। इनका योगदान सालाना 45.24% बढ़कर वित्त वर्ष 25 में 2.89 लाख करोड़ रुपये हो गया। नई एसआईपी के लिए रजिस्ट्रेशन 4.28 करोड़ से बढ़कर 6.80 करोड़ हो गए, जबकि सक्रिय एसआईपीअकाउंट8.11 करोड़ तक पहुंच गए और इसमें 27.17% की वृद्धि देखने को मिली। यह निवेशकों के बढ़ते अनुशासन और लंबी अवधि के धन सृजन की ओर बदलाव को दर्शाता है। (स्रोत: एएमएफआईवार्षिक रिपोर्ट)
- जनसांख्यिकीय बदलाव
- उम्र: 25–40 वर्ष के निवेशक नए फोलियो के लिए रजिस्ट्रेशन कराने में सबसे आगे हैं।
- आय: मध्यम आय वाले समूह एसआईपी के जरिये निवेश करने में अग्रणी हैं, जो आमतौर पर 500–2,000 रुपये का मासिक निवेश करते हैं।
- जेंडर: डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और जागरूकता कार्यक्रमों के समर्थन सेछोटे शहरों की अधिक महिलाएं निवेश क्षेत्र में प्रवेश कर रही हैं।
- भूगोल: चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश और दादरा एंड नगर हवेली जैसे राज्यों में एसआईपी एयूएम का हिस्सा कुल एमएफएयूएमके 40% से अधिक है, जबकि मिजोरम, दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे क्षेत्रों में यह 20% से कम है। (स्रोत: एएमएफआईवार्षिक रिपोर्ट)
इस उछाल को क्या बढ़ावा दे रहा है?
एएमएफआई और अन्य म्यूचुअल फंड कंपनियों के लगातार जागरूकता अभियान, और डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने इस बदलाव में बड़ी भूमिका निभाई है।इन प्रयासों से लोगों में वित्तीय साक्षरता (पैसों से जुड़ी जानकारी) बढ़ी है और वे निवेश के प्लेटफॉर्म तक आसानी से पहुँच पा रहे हैं। जैसे-जैसे लोग जागरूक हुए हैं, उनकी भागीदारी भी बढ़ी है, खासकर म्यूचुअल फंड्स में।।
छोटे शहरों में म्यूचुअल फंड अपनाने में तेजी आने के कुछ प्रमुख कारण ये हैं:
- डिजिटल पहुंच: किफायती स्मार्टफोन और डेटा प्लान ने बड़े शहरों से परे लाखों लोगों के लिए निवेश को सुलभ बनाया है। सरकार के डिजिटाइजेशन प्रयासों ने देश भर में निवेश उत्पादों तक आसान पहुंच को सक्षम बनाया है।
- फिनटेक विस्तार: ग्रो, ज़ेरोधा, और पेटीएम मनी जैसे कई फिनटेक ऐप्स ने टियर-2 और टियर-3 शहरों में पहली बार निवेश करने वालों के लिए निवेश को सरल बनाया है।
- बढ़ती आकांक्षाएं: छोटे शहरों के युवा पेशेवर और उद्यमी अब पारंपरिक बचत से आगे बढ़कर धन सृजन के रास्ते तलाश रहे हैं। वे अपने लक्ष्यों की योजना बनाने और उन्हें हासिल करने के लिए म्यूचुअल फंड का उपयोग कर रहे हैं।
अधिक समावेशी वित्तीय भविष्य की ओर
टियर-2 और टियर-3 शहरों में म्यूचुअल फंड निवेश का बढ़ना भारत के फाइनेंशियल इकोसिस्टम में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। ये क्षेत्र अब निष्क्रिय भागीदार नहीं हैं, बल्कि उद्योग की वृद्धि में सक्रिय योगदानकर्ता बन गए हैं। डिजिटल सुविधाओं, वित्तीय जागरूकता के प्रयासों, निवेशकों की नई सोच और नवाचारों के साथ, म्यूचुअल फंड उद्योग अधिक समावेशी और देश के अलग-अलग हिस्सों में फैल रहा है।
जिस तरह यह ट्रेंड जारी है, इससे न केवल सभी लोग धन सृजन कर सकते हैं, बल्कि भारत के लिए एक अधिक मजबूत और संतुलित वित्तीय भविष्य की नींव भी मजबूत होगी।
निवेशकों को केवल पंजीकृत म्यूचुअल फंड्स के साथ ही लेन-देन करना चाहिए, जिनके विवरण को सेबी की वेबसाइटपर ‘इंटरमीडियरीज़/मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस’ के तहत सत्यापित किया जा सकता है। कृपया म्यूचुअल फंड्स की वेबसाइट पर एकमुश्त केवायसी (नो योर कस्टमर) पूरा करने की प्रक्रिया, साथ ही पते, फोन नंबर, बैंक विवरण आदि में बदलाव की प्रक्रिया देखें। यदि निवेशक पंजीकृत मध्यस्थों के जवाबों से असंतुष्ट हैं, तो वेhttps://scores.sebi.gov.in/पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं। स्कोर्सआपको सेबी के साथ ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने और बाद में उसकी स्थिति देखने की सुविधा देता है।
डिस्क्लेमर: म्यूचुअल फंड में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, योजना से संबंधित सभी दस्तावेज ध्यानपूर्वक पढ़ें।


