
एसबीआई म्यूचुअल फंड की एक निवेशक शिक्षा एवं जागरुकता पहल
मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स आज के बाजार में रिस्क-ऑन (जोखिम लेने की स्थिति) और रिस्क-ऑफ (सुरक्षित निवेश की ओर झुकाव) के बीच घूमते हुए रोटेशन के दौर में एक जरूरी विकल्प और आवश्यकता बन गए हैं। ये फंड एक ही पोर्टफोलियो में इक्विटी, डेट, और कमोडिटी जैसे गोल्ड या सिल्वर (कभी-कभी REITs भी) को मिलाकर निवेश करते हैं।
पहले मल्टी-एसेट एलोकेशन में निवेश करने का ये कॉन्सेप्ट नया था, और कई निवेशक सोचते थे कि वे खुद अलग-अलग इक्विटी, डेट या गोल्ड में छोटी-छोटी रकम लगा सकते हैं। हां, ये संभव था क्योंकि आज कई निवेश विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन अलग-अलग एसेट क्लास को मैनेज करना—व्यावहारिकता, फीस, टैक्स एफिशिएंसी, लागत, और परफॉर्मेंस ट्रैकिंग—व्यावहारिक रूप से मुश्किल साबित होता था।
बाजार की अलग-अलग स्थितियों के लिए एक यूनिफाइड पोर्टफोलियो अप्रोच
मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड हाइब्रिड कैटेगरी में आते हैं। ये एक सिंगल फंड में इक्विटी, डेट, और अन्य एसेट्स (जैसे गोल्ड, सिल्वर या REITs) को होल्ड करते हैं। चूंकि ये एसेट क्लास एक साथ एक जैसा व्यवहार नहीं करते—उनकी मूवमेंट्स आपस में जुड़ी नहीं होतीं—इससे स्वाभाविक रूप से विविधीकरण मिलता है। इससे पोर्टफोलियो ज्यादा बैलेंस्ड रहता है और बाजार के भिन्न चक्रों में सुचारू जोखिम समायोजित अनुभव दे सकता है।
नीचे तालिका में दिखाया गया है कि 2007 से अब तक अलग-अलग एसेट क्लास ने बेहतरीन परफॉर्मेंस दी है। क्योंकि इनके मूवमेंट्स परफेक्ट तरीके से आपस में जुड़े नहीं हैं, इस वजह से एक एसेट दूसरे को कई बार ऑफसेट कर सकता है। इससे कुल मिलाकर सभी परिणामों को सपोर्ट मिलता है।
तालिका : प्रत्येक एसेट क्लास का प्रदर्शन पिछले कुछ सालों में

स्रोत : एमएफआई एक्स्प्लोरर, 31 दिसंबर 2025 तक के आंकड़े
मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड का एक सबसे बड़ा फायदा परिसंपत्तियों का संतुलित मिश्रण है और इन सभी का अपना विशिष्ट उद्देश्य होता है – जैसे एक जीतने वाली स्पोर्ट्स टीम कभी सिर्फ स्ट्राइकर्स या सिर्फ डिफेंडर्स से नहीं बनती।
- इक्विटी ग्रोथ के लिए खेलती है और ऑफेंस का रोल निभाती है, जब मौके मिलते हैं तो कैलकुलेटेड रिस्क लेती है।
- डेट स्टेबिलिटी देता है और डिफेंस खेलता है—क्रिकेट में फील्डर्स और विकेटकीपर्स या फुटबॉल में गोलकीपर की तरह।
- कमोडिटीज़ जैसे गोल्ड या सिल्वर ऑल-राउंडर की तरह काम करते हैं, अनिश्चितता के समय आगे आते हैं और अन्य एसेट क्लास से इनका कोई संबंध नहीं होता है, जिससे बाजार की स्थितियों के हिसाब से ऑफेंस और डिफेंस को बैलेंस करने में मदद मिलती है।
ये सभी एसेट क्लास साथ मिलकर एक हरुनमौला टीम बनाते हैं, जो अलग-अलग मार्केट “मैच सिचुएशंस” को संभाल सकती है और निवेशकों को ज्यादा संरचित और डाइवर्सिफाइड अप्रोच देती है।
मल्टी-एसेट अप्रोच ड्रॉडाउन्स में:
मार्केट्स कभी सीधी लाइन में नहीं चलते। वे चक्रों, पॉलिसी के बदलावों और सेंटिमेंट के साथ बदलते रहते हैं। ऐसे माहौल में मल्टी-एसेट एलोकेशन अप्रोच कॉम्प्लिमेंट्री रोल्स को एक साथ लाती है—ताकि पोर्टफोलियो अलग-अलग परिस्थितियों जैसे ड्रॉडाउन्स में अनुकूलित हो सकें।
नीचे दिए ग्राफ में पिछले तीन सालों में—खासकर पिछले एक साल में—मार्केट करेक्शंस के दौरान BSE 500 TRI ने SBIMF मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड इंडेक्स और SBI मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड की तुलना में ज्यादा तेज गिरावट दिखाई है। इससे पता चलता है कि मल्टी-एसेट अप्रोच में अलग-अलग एसेट क्लास परफेक्ट तरीके से एक सीध में नहीं चलते। उनके अलग-अलग व्यवहार से कंसंट्रेशन रिस्क कम होता है और बाजार के अलग-अलग चरणों में ज्यादा बैलेंस मिलता है।
ग्राफ: 3 साल का ड्रॉडाउन मूवमेंट
स्रोत : एमएफआई एक्स्प्लोरर, 31 दिसंबर 2025 तक के आंकड़े; **फंड के लिए बेंचमार्क के तौर पर डिजाइन किया गया एक कस्टमाइज्ड इंडेक्स
संक्षेप में, मल्टी-एसेट अप्रोच ड्रॉडाउन्स के दौरान कई तरीकों से मदद कर सकती है:
- डाइवर्सिफाइड रिस्क ड्राइवर्स: इक्विटी ग्रोथ के लिए योगदान देती है, डेट डिफेंसिवनेस प्रदान करती है, और गोल्ड अनिश्चितताओं के खिलाफ हेज के रूप में काम करता है।
- आपस में कम संबंध: जब पोर्टफोलियो का एक हिस्सा दबाव में आता है, तो दूसरा हिस्सा प्रभाव को कम करने में मदद करता है।
- री-बैलेंसिंग: एक अनुशासित “खरीदें कम, बेचें महंगा” मैकेनिज्म बाजार चक्रों में निवेश यात्रा को आसान कर सकता है।
- पाथ स्टेबिलिटी: भले ही लॉन्ग-टर्म रिटर्न्स अन्य कैटेगरीज़ से समान हों, संपूर्ण अनुभव ज्यादा स्थिर हो सकता है।
तुलनात्मक व्यवहार (संकेतक, भविष्यवाणी नहीं):
- प्योर इक्विटी: ऐतिहासिक रूप से तेज मार्केट सेल-ऑफ्स के दौरान गहरे और तेज ड्रॉडाउन्स का सामना करती है।
- एग्रेसिव हाइब्रिड / बैलेंस्ड एडवांटेज: आमतौर पर प्योर इक्विटी से कम ड्रॉडाउन्स दिखाते हैं क्योंकि इक्विटी और डेट के बीच शिफ्ट करने की क्षमता होती है।
- मल्टी-एसेट एलोकेशन: रिस्क-ऑफ के चरणों में अक्सर एग्रेसिव हाइब्रिड्स के समान या बेहतर प्रदर्शन करते हैं, खासकर जब गोल्ड/सिल्वर और डेट में महत्वपूर्ण आवंटन हो। इन्हें अब ऑल-वेदर ऑफरिंग्स यानी किसी भी समय में निवेश के अनुकूल माना जाता है।
अब क्यों मायने रखता है?
बाजार के मौजूदा माहौल में मल्टी-एसेट अप्रोच का केस खास तौर पर मजबूत हो गया है।
- ग्लोबल अनिश्चितता और इंटरमिटेंट वोलेटिलिटी:
भू-राजनीतिक तनाव, बदलते ग्लोबल ग्रोथ ट्रेंड्स, और अचानक रिस्क-ऑफ चरणों की वजह से मार्केट सेंटिमेंट तेजी से बदल सकता है। जैसे एक जोरदार मुकाबले वाले मैच में मोमेंटम मिनटों में स्विंग कर सकता है, आज के पोर्टफोलियो को पहले से कहीं ज्यादा बार ऑफेंस से डिफेंस में शिफ्ट करने की जरूरत पड़ सकती है। 2026 की शुरुआत में ही गोल्ड और सिल्वर में काफी उथल-पुथल देखी गई है, जो अनिश्चितता को दर्शाते हैं। - ब्याज दरों में बदलाव का विभिन्न एसेट क्लास पर असर:
पॉलिसी दरों में बदलाव और फ्यूचर रेट कट्स/हाइक्स की उम्मीदें इक्विटी वैल्यूएशंस और बॉन्ड प्राइसेस दोनों को प्रभावित करती हैं। ये डायनैमिक माहौल सिंगल एसेट क्लास पर निर्भर पोर्टफोलियो को तेज स्विंग्स के लिए संवेदनशील बना देता है। - घरेलू और वैश्विक नीति संकेत का बाजार की दिशा पर असर:
फिस्कल अनाउंसमेंट्स, रेगुलेटरी अपडेट्स, सेंट्रल बैंक के कदम, और ग्लोबल मैक्रो सिग्नल्स मार्केट को अचानक शिफ्ट कर सकते हैं। ये नीति से संचालित मूवमेंट्स अलग-अलग एसेट क्लास को अलग-अलग तरीके से प्रभावित करते हैं, जिससे सिंगल-एसेट अप्रोच ज्यादा एक्सपोज्ड हो जाती है। - कमोडिटीज़ जैसे गोल्ड और सिल्वर की भूमिका का महत्व बढ़ना: जब अनिश्चितता बढ़ती है—चाहे महंगाई की चिंता हो, मुद्रा की गतिशीलता, या भू-राजनीतिक तनाव की वजह से हो—गोल्ड और सिल्वर ऐतिहासिक रूप से प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। ये डाइवर्सिफायर के रूप में दोबारा उभर रहे हैं, जो मल्टी-एसेट फ्रेमवर्क में बैलेंस की एक और लेयर जोड़ते हैं।
निष्कर्ष — एक टीम, कई भूमिकाएँ
मल्टी-एसेट एलोकेशन अप्रोच एक ऐसा पोर्टफोलियो है जो ऑफेंस और डिफेंस दोनों खेलता है। ग्रोथ के लिए इक्विटी, स्टेबिलिटी के लिए डेट, और डाइवर्सिफिकेशन के लिए गोल्ड-सिल्वर जैसी कमोडिटीज़ को मिश्रित करके, यह बाजार चक्रों में ज्यादा मापा हुआ और संतुलित निवेश अनुभव देने का लक्ष्य रखता है।
एक ऐसी दुनिया में जहाँ स्थितियां तेजी से बदलती हैं, स्पष्ट भूमिकाओं वाली, बैलेंस्ड और अनुशासित टीम निवेशकों को पूरे सीजन पर फोकस रखने में मदद करती है – यह सिर्फ हाफटाइम के स्कोरबोर्ड पर नहीं, बल्कि पूरे मैच पर ध्यान देती है।
यह एसबीआई म्यूचुअल फंड की एक निवेशक शिक्षा और जागरूकता पहल है।
निवेशक केवल रजिस्टर्ड म्यूचुअल फंड्स के साथ ही डील करें, जिनकी पूरी जानकारी सेबी की वेबसाइट (https://www.sebi.gov.in) पर ‘इंटरमीडिएरी/मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस’ सेक्शन में वेरिफाई की जा सकती हैं। म्यूचुअल फंड्स की वेबसाइट पर जाएँ और वन-टाइम KYC (नो योर कस्टर) पूरा करने की प्रक्रिया देखें, जिसमें पता, फोन नंबर, बैंक की जानकारी आदि में बदलाव की प्रक्रिया भी शामिल है। निवेशक अगर रजिस्टर्ड इंटरमीडियरी से असंतुष्ट हैं, तो https://scores.sebi.gov.in/ पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं। SCORES आपको सेबी के साथ ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने और उसकी स्थिति ट्रैक करने की सुविधा देता है।
म्यूचुअल फंड में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है, योजना से संबंधित सभी दस्तावेज सावधानीपूर्वक पढ़ें।

