Homeगुजरातसनातन धर्म ने साक्षात विग्रह धारण किया वह कृष्णावतार है।।

सनातन धर्म ने साक्षात विग्रह धारण किया वह कृष्णावतार है।।

भगवान कृष्ण का समग्र अवतरण अष्ट के साथ साथ जुड़ा हुआ है।।

आज मूल धर्म को अनदेखा करके कितने छग्य धर्म आ गए हैं,छल आ गया है,धर्म के साथ,धर्म के नाम पर ही छल हो रहा है!

कथा में,सत्य में और साधु के प्रति रुचि बढ़ने लगे तब समझना मेरे जीवन से कलयुग जा रहा है।।

द्वारिकाधीश भगवान श्री कृष्ण का एक स्वरूप जहां बिराजीत है ऐसी दक्षिण भारत की पूण्यभूमि ऐतिहासिक नगरी उडुपी से चल रही रामकथा बुधवार जब दूसरे दिन में प्रवेश कर रही है तब बीज पंक्तियों में निर्देश किया है:जब यदुवंश में कृष्ण अवतार होगा और महामहिभार उतर जाएगा फिर कृष्ण का पुत्र तुम्हें पति के रूप में सदेह मिलेगा-इन वचनों को सुनकर रति संतुष्ट होकर लौट जाती है। इस कथा को हम केंद्र में रख रहे हैं।

दो-तीन प्रश्न भी है उसे उठाते हुए बापु ने कहा भगवान कृष्ण का अवतार किन-किन कर्म से हुआ है?परमात्मा के जन्म और कर्म की दिव्य कथा वक्ता चिंतक,सर्जक,साधु तत्वत: जान लेता है उसकी प्रस्तुति कैसी होती है?और भगवान कृष्ण ने अष्टमी को क्यों पसंद किया?

अवतार का कारण में मानस के आधार पर यही कारण ऐसा कोई नहीं कह सकते।क्योंकि ईश्वर कार्य कारण से पर है।वो मनुष्य को लागू होते हैं। फिर भी कोई न कोई कारण देना पड़ता है।गीता में भी प्रमाण आ गया फिर पूछने की जरूरत नहीं। गीता ने पांच कारण और रामचरितमानस ने भी पांच कारण बताएं।।यदा यदा ही धर्मस्य-यह मंत्र कहता है धर्म की ग्लानि,अधर्म का अभ्युदय होने लगे यह दो वस्तु हो तब आत्मा रूप में कृष्ण प्रकट होता है। और साधुओं का परित्राण,दुष्कृतियों का विनाश और धर्म का स्थापना करने के लिए परमात्मा रूप में कृष्ण प्रकट होते हैं।।कृष्ण आत्मा भी है जगत आत्मा,विश्वात्मा,चिदात्मा शब्द है।और परमात्मा है स्वयं आते हैं।फिर भी पूछा है।। परमात्मा ८ वस्तुओं के लिए आता है।यह पांच प्रधान है और भी तीन है यह क्यों अष्टमी को प्रकट होते हैं?

भगवान कृष्ण का समग्र अवतरण अष्ट के साथ साथ जुड़ा हुआ है।।ब्रह्मवैवर्त पुराण,महाभारत, श्रीमद् भागवत,गर्ग संहिता,श्रुति-वेद,पद्म पुराण सभी ग्रंथो का संदर्भ लेकर इन ग्रंथो के सूत्रों का संग्रह साधु करें तो कृष्ण अष्ट के साथ जुड़े दिखाई देंगे।वैसे परमात्मा के अनेक नाम है।दशावतार में आठवां अवतार पसंद किया।अष्ट अंक के साथ इतनी प्रीति क्यों है?

महाभारत के अनुसार श्री कृष्ण ने अष्टमूर्ति शिव की साधना की है।इतना बड़ा समन्वय किया है। कृष्ण पूर्ण-परिपूर्ण-संपूर्ण है।।अष्टधा प्रकृति का मालिक है लीला में रूप धारण करके आया तब अष्ट पट रानियां पसंद की है।।आचार्य ने कृष्ण का बहुधा अष्टक गाया है:मधुराष्टक,कृष्णाष्टक,गोविंदाष्टक आदि।यह सेतु बनाया गया कि कृष्ण शिव उपासक है। पूर्ण है तो समर्थ भी है।शिव प्रसन्न हुए।।

लेकिन वैष्णवी स्थान में सालों पहले कथा करने गया।पोथी लेकर गए।राम कथा है यह पता था अन्य लोगों ने स्वागत किया लेकिन मूल पुरुष ने सामने देखा तक नहीं! मुंह मोड़ लिया! और हम वैष्णवी कथा नहीं सुनते ऐसा कहा!-बस यही धर्म की ग्लानि है।धर्म रोता है,आक्रंद करता है।स्वयं परमात्मा कृष्ण शिव की उपासना करता है और कृष्ण प्रकट होते हैं तब स्वयं शिव बैरागी के रूप में दर्शन करने गोकुल जाते हैं।।भवानी और शिव कृष्ण को आठ वरदान देते हैं।शिव ने अष्ट वरदान दिए तो पार्वती पीछे क्यों रहे!लेकिन संकीर्णता के कारण इन महान प्रसंग को जगत के सामने खोला नहीं गया।संकीर्ण लोगों को बहुत डर लगता है।।कृष्ण शिव से कहते हैं आप दोनों ने आठ-आठ वरदान दिए अब मैं आपसे आठ वरदान मांगना चाहता हूं।।पहला-मुझ से मेरे मां-बाप कायम प्रसन्न रहे।जिस जिस संतान से माता-पिता और जिन माता-पिता से संतान प्रसन्न रहते हैं बहुत बड़ी बात है।सम,दम,ऊपरति,तितिक्षा धीरे-धीरे सब आ जाता है।सम-भीतरी शांति,दम-बहिर नियंत्रण,उपरति का मतलब है किनका संग वर्जित करना।।दूसरी बात मांगी में मूल धर्म सनातन धर्म का पालन करुं और करवाउं।

आज मूल धर्म को अनदेखा करके कितने छग्य धर्म आ गए हैं।।छल आ गया है।धर्म के साथ छल हो रहा है।करोड़ों रूपियों का बजट बनता है।सत्ता भी साथ देती है।संपत्ति साथ देती है।संख्याबल काम करता है और सनातन धर्म में यह डालो,इसको बदलो,इसे बदलो…यह हम देखते हैं।

बापु ने कहा वैसे में कुछ देखता नहीं,टीवी,विडियो या कुछ भी।लेकिन वीडियो दिखाई तो देखना पड़ता है।कृष्ण का प्रसिद्ध श्लोक है उनको बदल कर वह कौन बोला?अपना जो है वह बोला!- ऐसा एक वीडियो भी हमने देखा है।इतनी मात्रा में छल चल रहा है और नाम दिया जाता है धर्म का!! मेरे पास जितने आए इतने सावधान हो जाए तो भी बहुत।। यदि ना भी हो तो भी मैं अकेला बहुत हूं।।

यह श्लोक पर जो मजाक बना तब तो ए.आइ. प्रबल नहीं थी ।मैं एआई का विरोधी नहीं,जानता भी नहीं।आप कितने व्यस्त होंगे अच्छा माला करने का वक्त आया है।।

बापु ने कहा की महाभारत में लिखा है कलयुग का अंत आएगा तब तीन वस्तु में लोगों की रुचि बढ़ जाएगी।विद्वान लोग कहते हैं अभी तो कलयुग की शुरुआत है,कली का प्रथम चरण है।लेकिन यह दिखे तो समझना कली का यह आखिरी चरण चल रहा है:कथा में रुचि बढ़ेगी।जब हमारी सत्य में रुचि बढ़ने लगे और साधु के प्रति रुचि बढ़ने लगे तब समझना मेरे जीवन से कलयुग जा रहा है।।

साधु क्या है?साधु नाम नहीं।विशेषण नहीं।संज्ञा नहीं।क्रियापद नहीं।भूतकाल या भविष्य काल भी नहीं।भूतकृदंत भी नहीं।साधु जाती भी नहीं वर्ण भी नहीं।साधु स्वभाव है।।

बापु ने कहा कुछ समय पहले एक—आए और मेरे पास आकर मेरा हाथ पकड़ लिया और लोगों को दूर किया और कहे बापू मैं आपको बहुत प्यार करता हूं,अंदर से प्यार करता हूं और कुटिलता भी बहुत भरी है मेरे में।

मोरारि बापु ने सनातन धर्म के लिए रोज-रोज नया खतरा मोड़ लिया,डेइली..रोज… ऐसे समय में साधु स्वभाव है।।

आजकल के दौर में भी साधु महिमा का गायन बहुत हो रहा है।विनय इतना कि खुद का हो,एआई का ना हो।।एआई में भी नोट आती है कि इनमें भूल हो सकती है।मनुष्य भूल करे तो मशीन भी करें। फिर भी विज्ञान को नमन।।

सत्य में रुचि बढी है वह अभी नजर में नहीं आ रही झूठ बोलते बोलते हम थक जाएंगे,आदमी तब सत्य की ओर जाएगा ही,जाना ही पड़ेगा।।

अष्टमूर्ति शिव के पास कृष्ण आठ वरदान मांगते हैं धन्य है वह संतान जिस से माता-पिता प्रसन्न है, धन्य है वह माता-पिता जिससे संतान संतुष्ट रहे।। मूल धर्म के लिए में अवतार लेता रहूं।।सनातन वैदिक धर्म ने ८ वस्तु हमें दी है।।रुत दिया-परम सत्य का नाम रुत है।।धर्म दिया।।धर्म का प्रभाव और स्वभाव दोनों दिये।। वाचिक सत्य दिया।सत्य बोला भी जाता है कोशिश करने से,लेकिन परम सत्य बोला भी नहीं जाता।बिना बोले कहा जाता है सनातन ने यज्ञ दिया।।आप जाप करो वह भी यज्ञ है दान भी यज्ञ है।।पूर्व जन्म और पुन: जन्म दिया। आत्मा और ब्रह्म की चर्चा सनातन धर्म ने की है। पाप और पाप का पछतावा भी दिया।।मोक्ष की देन सनातन धर्म की देन है।।यह सब करने के लिए शब्द है:तितिक्षा-सहन करना।।जानते हुए भी सहन करना। लेकिन यह व्यक्तिगत है,समाज स्वीकार नहीं करेगा।कहेंगे कहां तक सहन करना? जन्म-जन्मांतर सहना है।लोग विद्रोह करने को कहते हैं।लेकिन विद्रोह का भी पृथ्वी को बोझ लगेगा।।पांच वस्तु से पृथ्वी को बोझ लगता है।चार मानस में एक गीता जी में है।अन्य का द्रोह करना। निंदा,इर्षा,द्वेष।।जो निंदा करता है उसे नींद नहीं आती।पर स्त्री को शिकारी और विकारी दृष्टि से देखना पृथ्वी का बोझ है।।

विग्रह धारी कृष्ण के साथ ८ वस्तु जुड़ी है:शंख,चक्र बंसी,वैजयंती माला,पीतांबर,मकरा कृत कुंडल, कुटिल केश और मोर पंख।।

दूसरों का धन छीन लेना।पैसा उपयोगी है लेकिन प्रेम जिंदगी है।।पर अपवाद और पांचवा है पर धर्म। सनातन धर्म ने साक्षात विग्रह धारण किया वह कृष्णावतार है।।कृष्ण ने पटरानियां भी आठ पसंद की।अष्टांग योग का मालिक है।।कृष्ण के सखा आठ है।राधा की अष्ट सखियां है।।कृष्ण सखाओं में मधु मंगल,सुदामा,श्रीदामा,सुदत्त,सुभट्ट,अर्जुन, उद्धव और भैया दाउ भी सखा है।

अष्टप्रहर जागता परमात्मा है।।प्रकृति प्रकोपित है हम प्रार्थना करें कि प्रकृति शांत हो जाए।।

श्री कृष्ण शरणम मम-बहुत प्रसिद्ध मंत्र अष्टाक्षरी है तंत्र की साधना करें तो कृष्ण का अष्टकोण यज्ञ किया जाता है।।पूरी यात्रा में आठ प्रकार के प्रसंग विशेष है।।

कृष्ण को प्रस्तुत करने के लिए कौन से लक्षण जरूरी है यह बताते हुए बापु ने कहा:धर्म में तत्परता मुख में मधुरता,दान देने में उत्साह,मित्रों के साथ कपट रहितता,गुरु के साथ विनय,चित् की गंभीरता आचरण में पवित्रता,किसी के गुण में रसिकता, शास्त्र में जानकारी,रूप की सुंदरता-ये सब होने के बाद शिव को ना भजता हो तो यह प्रस्तुति बेकार है यह सभी लक्षण कृष्ण में है।।

फिर कथा के प्रवाह में सब की वंदना करते हुए सीताराम जी की वंदना के बाद एक बड़ा प्रकरण नाम महिमा,नाम वंदना का गायन और नाम किसी का भी नाम का महत्व बताते हुए आज की कथा को विराम दीया गया।।

== समाप्त ==

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