Homeगुजरातगाम्य लक्ष्मी, राज्य लक्ष्मी, राष्ट्र लक्ष्मी, विश्व लक्ष्मी और परा लक्ष्मी-पंच लक्ष्मी...

गाम्य लक्ष्मी, राज्य लक्ष्मी, राष्ट्र लक्ष्मी, विश्व लक्ष्मी और परा लक्ष्मी-पंच लक्ष्मी है।।

साधु किसी को बदलता नहीं लेकिन साधू के पास जाने से हम बदल जाते हैं।।

जो समाज को बदलने की कोशिश करें वह साधु नहीं सुधारक है,स्विकारक है।।

किसी का सामीप्य हमें बदल देता है।।

भ्रष्टाचार लंका का स्वभाव है हिंदुस्तान का नहीं।।

गुरु पांचवीपरालक्ष्मी है,गीता जी के न्याय से गुरु रूपी लक्ष्मी में सात-सात विभूति है।।

भगवान बालाजी तिरुपति की संनिधि में तिरुमला से बह रही रामकथा का पांचवा दिन,

आज बापू ने और एक लक्ष्मी के बारे में बताते हुए कहा कि पांच प्रकार की लक्ष्मी है।। सबसे पहले है ग्राम्य लक्ष्मी।।हमारे गुजरात के कवि कलापी ग्राम माता कहते हैं।।दूसरी राज्य लक्ष्मी है,राज्य श्री कहते हैं।।तीसरी राष्ट्र लक्ष्मी कहते हैं।चौथी विश्व लक्ष्मी और पांचवीपरा लक्ष्मी है।।

ग्रामीण लक्ष्मी किसे कहे? गांव में स्वच्छता हो। स्वच्छता अभियान तो अभी चल रहा है लेकिन देहातों में पहले से ही सुबह और शाम स्वच्छता होती थी।।जिसे हम अछूत और तिरस्कृत कहते हैं वह लोग सफाई करते थे।।ग्रामीण लक्ष्मी का दूसरा लक्षण सब समान हो यह अस्पृश्यता मिटनी चाहिए क्योंकि समाज का कैंसर है।।बहुत बड़ा रोग है। कोई किसी को अस्पृश्य ना माने।सबको अपने तन मन शुद्ध रखना चाहिए लेकिन जन्म के कारण ऐसा मानना बूरा है।। गांधी बापू ने बहूतबडा काम किया लेकिन इसे पहले संतों ने बहुत काम किया।।नरसिंह मेहता ने भी काम किया।।मेहता किसी को अवैष्णव नहीं मानते।।यहां सब ब्रह्म ह।। बुद्ध ने ब्रह्म और आत्मा को नकारा लेकिन यह कहना चाहते थे तुम ही ब्रह्म हो। तुम ही आत्मा हो।।अप्पदीपोभव:ऐसाकहा।।साधु किसी को बदलता नहीं लेकिन साधू के पास जाने से हम बदल जाते हैं। जो समाज को बदलने की कोशिश करें वह साधु नहीं सुधारक है, स्विकारक है।। किसी का सामीप्य हमें बदल देता है गांव में व्यसन ना हो। गांव को अयोध्या,मिथिला, किष्किंधा या वृंदावन ना बन सके लेकिन गोकुल बनाओ।।रावण की सोने की लंका,लेकिन महिमा नहीं था।।मानस में मिथिला-विदेह नगरी,लंका देह नगरी,अयोध्या धर्म नगरी है।। गांव को नंदीग्राम बनाओ।

हाईकोर्ट ने कहा की भगवत गीता को किसी धर्म के साथ ना जूडो यह फैसले का बापू ने स्वागत किया और बताया  गीता वैश्विक ग्रंथ है। और यहां तिरुमला की स्वच्छता से हमें शीख लेनी चाहिए। एक दूसरे के सुख-दुख में हिस्सा लेते हो। राजनीति नहीं होनी चाहिए।।

दूसरी राज्य लक्ष्मी-जहां अच्छी अस्पताल होना चाहिए।मेरा बस चले तो निशुल्क सर्व को आरोग्य मान के साथ सबको मिले ऐसा करो। रास्ते अच्छे हो यातायात की सुविधा हो। अच्छा महाविद्यालय हो किसी डबरे को सागर कहे ऐसा नहीं सही में विश्वविद्यालय और विद्या के धाम हो।। कोई भूखा अशिक्षित बीमार ना हो।।

बिना कुछ दिए बिना घूस दिए बिना ऑफिसर काम करें। भ्रष्टाचार लंका का स्वभाव है हिंदुस्तान का नहीं।।जहां किसी का शोषण ना हो वह राज्य लक्ष्मी है।।

राष्ट्र लक्ष्मी में किष्किंधा है में तारा,लंका में मंदोदरी, मिथिला में सुनैनाहै।।अयोध्या की राष्ट्र लक्ष्मी पांच है:कौशल्या,सुमित्रा,मांडवी,उर्मिला और जानकी। कैकयी को राज्य लक्ष्मी नहीं कह सकते क्योंकि कैकई में थोड़े दाग लगे हैं।।अनित्य को नित्य और मोह को प्रेम समझ लेना अविद्या है।। राष्ट्र का नायक अपनी प्रजा का पालन उपभोग शून्य होकर करें ऐसा वाल्मीकि जी ने कहा है।।

विश्व लक्ष्मी मेरी दृष्टि में मां जानकी है।। जनक सुता तो है लेकिन जग जननि भवानी है।। पांचवीपरा लक्ष्मी सबसे ऊपर में गुरु को कहता हूं।। क्योंकि श्री गुरु पद नख और श्री गुरु चरण सरोज रज ऐसा लिखा है। श्री गुरु पांचवीपरालक्ष्मी है और गीता जी के न्याय से गुरु रूपी लक्ष्मी में सात-सात विभूति बापू ने दिखाई।।

संक्षिप्त में शिवचरित का गान किया।।

गांधी जी सत्य को इश्वर मानते थे।।इशु प्रेम को इश्वर मानते थे,मुझे कोइ पूछे तो करुणा को इश्वरकहुं।।करुणा शाश्वत है।।

राम जन्म के पांच कारण स्पर्श,रस,रुप,गंध और शब्द से कैसे जूडे है वह बताया।।

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