
गुजरात, अहमदाबाद | 08 अगस्त 2025: रेलवे मंत्रालय के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी डेडिकेटेड फ़्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (डी ऍफ़ सी सी आई एल) ने अहमदाबाद यूनिट के सभी कार्य पूरे कर लिए हैं। यह आज़ादी के बाद देश की सबसे बड़ी रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना में एक अहम पड़ाव है।
1,506 किलोमीटर लंबा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ़्रेट कॉरिडोर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से होकर गुजरता है। इसका संचालन और निगरानी अब अहमदाबाद के साबरमती स्थित अत्याधुनिक ऑपरेशनल कंट्रोल सेंटर से हो
रही है। यह सेंटर पूरे पश्चिमी रूट का संचालन का मुख्य केंद्र है।
इस ऑपरेशनल कंट्रोल सेंटर में 72 मीटर लंबी वीडियो वॉल लगी है, जो एशिया की सबसे बड़ी में से एक है। इसकी मदद से मालगाड़ियों, ओवरहेड पावर सिस्टम और पटरियों की रीयल-टाइम निगरानी होती है। इसमें हॉट एक्सल डिटेक्शन जैसे ऑटोमेटेड सेफ़्टी अलार्म लगे हैं, जिससे तुरंत कार्रवाई संभव होती है और माल ढुलाई को सुरक्षित बनाया जाता है। यह कॉरिडोर देश का पहला ऐसा रूट है, जहां पूरे मार्ग पर एक भी मानवरहित लेवल क्रॉसिंग नहीं है।
डेडिकेटेड फ़्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड, अहमदाबाद के चीफ़ जनरल मैनेजर मनीष अवस्थी, ने कहा, “अहमदाबाद का ऑपरेशंस कमांड सेंटर वेस्टर्न डेडिकेटेड फ़्रेट कॉरिडोर की धड़कन है। यहीं से हम 100 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार वाली लंबी और तेज़ ट्रेनों का संचालन करते हैं, डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेन चलाते हैं और देश के व्यस्त बंदरगाहों को औद्योगिक केंद्रों से कुशलता से जोड़ते हैं।”
वेस्टर्न डेडिकेटेड फ़्रेट कॉरिडोर की नवीनतम उपलब्धि है न्यू सांणद कनेक्टिविटी। यह एक इंजीनियरिंग कमाल और रणनीतिक लिंक है, जिसमें भारत के पहले बड़े पैमाने के रेल-ओवर-रेल फ्लाईओवर शामिल हैं। इससे देश के चारों कोनों में मालगाड़ियों की निर्बाध आवाजाही संभव हुई है।
पालनपुर-न्यू मकरपुरा सेक्शन जुड़ने से अब मुंद्रा, कांडला, टुना, नवलखी और पिपावाव जैसे बड़े बंदरगाह सीधे समर्पित नेटवर्क से जुड़ गए हैं, जिससे परिवहन का समय 24–36 घंटे से घटकर एक दिन से भी कम हो गया है।
इस नई कनेक्टिविटी से भारतीय रेलवे के यात्री और माल रूटों पर भीड़ कम होगी, और बंदरगाहों तक जाने वाली ट्रैन की ट्रिप
उतने ही समय में पहले के मुकाबले 1.5–2 गुना तक बढ़ सकेंगी, और पालनपुर, मेहसाणा, सांणद, वडोदरा, जामनगर और आसपास के इलाकों के औद्योगिक क्षेत्रों को लाभ मिलेगा। इससे लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और सप्लाई चेन की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
यह कॉरिडोर एमएसएमई, ई-कॉमर्स और समय-संवेदी उद्योगों के लिए हाई-स्पीड कार्गो सेवाएं भी उपलब्ध कराता है। न्यू रेवाड़ी–न्यू सांणद कनेक्टिविटी से परिवहन समय 11 घंटे से भी कम हो गया है, जिससे सड़क परिवहन पर निर्भरता घटी है और अंतिम चरण की डिलीवरी तेज़ हुई है। इसमें दूध के टैंकरों के लिए “ट्रक ऑन ट्रेन” सेवा भी उपलब्ध है।
मनीष अवस्थी ने आगे कहा, “यह समर्पित और समयबद्ध फ़्रेट कॉरिडोर पारंपरिक रूटों की भीड़ कम करने और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स के विकास की दिशा में बड़ी छलांग है।”
डेडिकेटेड फ़्रेट कॉरिडोर परियोजना में 1,337 किमी का ईस्टर्न डेडिकेटेड फ़्रेट कॉरिडोर और 1,506 किमी का वेस्टर्न डेडिकेटेड फ़्रेट कॉरिडोर शामिल हैं। भारत सरकार ने इस प्रोजेक्ट को आइकॉनिक प्रोजेक्ट घोषित किया है। अब तक कुल 2,741 रूट किमी में से 96.4% कार्य पूरा हो चुका है।

