Homeगुजरातरामचरितमानस में तीन प्रधान मणि है, उनकी छाया में कंई मणियां है।

रामचरितमानस में तीन प्रधान मणि है, उनकी छाया में कंई मणियां है।

(H)ate (O)ut (L)ove (I)n-HOLI

तिरस्कार को बाहर निकालो और प्रेम को अंदर ले लो।।

दूसरों का मूल्यांकन करना बंद करो खुद का मूल्यांकन करो।।

बापु ने बताये सात ‘डोन्ट्स’ के सामने सात ‘डूझ’

भोजन घी लगाकर और भजन जी लगाकर करना।।

यदि हम ठीक प्यासे हैं तो कुआं प्यासे को खोज लेगा।।

हरिकृपा से भी बड़ी गुरुकृपा है।।

अमरीका के लिटलरॉक से चल रही रामकथा के आंठवे दिन बहूत सी जिग्यासाओं को यथा समय यथा योग्य न्याय देते हुए बताया कि हमारी बीज पंक्ति में शिवजी कहते हैं हे गरुड़!आप मुझे मार्ग में मिले हैं कैसे समझाऊं?

गुजराती का पद है:”जेनीजोतांवाट ए शेरी मां सामामळ्या,उघडी गया हैयानांकमाड पछी काम न पडीयुंकूंचीओनुं….”

गुरु कैसे मिलता है? गरुड़ को रास्ते में शिव मिल गए।।लेकिन गरुड़ को पक्षीराज का अहंकार था। मेरी पीठ पर विष्णु,में गगन गामी, में वैकुंठ निवासी में ज्ञान और भक्ति में शिरोमणि-यह अहंकार भाव थे महादेव सोचते थे मिटाने में कौन सा मार्ग दिखाउं? नहीं समझाया ऐसा नहीं,यही समझाया।खग खग की भाषा समझता है इसलिए कागभुसुंडि के मार्ग पर भेजा।।

रामचरितमानस में तीन प्रधान मणि है उनकी छाया में कंई मणियां है।एक-भक्ति मणि: वॉशिंगटन डीसी में ९ दिन तक कथा गान किया था।। भक्ति मणि के प्रकाश में हमें ना दिए कि,ना बाती की,ना दिवेल की जरूरत है। प्रचंड वायु भी उसे बुझा नहीं सकता। इसलिए मैदान में कुरुक्षेत्र में कृष्ण बोले हैं जिसके पास भक्ति मणि है उसे में बूजने नहीं दूंगा।। ज्ञानदीप की चर्चा उत्तराकॉंड में है जो वर्षों पहले भचाउ में की थी।।

होली(एच ओ एल आई Holi )का अर्थ बताते हुए बापू ने कहा: हेइट-Hate धिक्कार O-Out (आउट बाहर) L-Love (लव) I-In इन (अंदर) -यही कथा के कई सूत्रों में से एक सूत्र है।। तिरस्कार को बाहर निकालो और प्रेम को अंदर ले लो।।

बापू ने बताया दूसरों का मूल्यांकन करना बंद करो खुद का मूल्यांकन करो।। इसलिए चाहिए रोज थोडा एकांत में बैठो।।

नंदप्रयाग की कथा में जैन मुनि प्रसन्न सागर जी महाराज ने एक किताब भेजी थी।। वहां सात डोन्ट्स-यह ना करें वह ना करें ऐसा लिखा था। मुनि जी बताते हैं:

रविवार को नमक मत खाओ-बीपी कंट्रोल में रहेगा। सोमवार को हरी सब्जी नहीं खाना- पेट ठीक रहेगा मंगलवार को मिठाई नहीं खाना- शुगर कंट्रोल में रहेगा।

बुधवार को घी नहीं खाना-फैट नहीं होगा।

गुरुवार को दूध मत पीना-गेसट्रबल नहीं होगी। शुक्रवार को दहीं मत खाना-जोड़ों के दर्द में आराम होगा।

शनिवार को तेल मत खाना-कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल रहेगा लेकिन बापू ने बताया

भोजन घी लगाकर और भजन जी लगाकर करना।। मुनि जी आगे लिखते हैं:

सोमवार को मोबाइल बंद रखो। मंगलवार को फेसबुक,बुधवार को बिजली बंद, गुरुवार को इंटरनेट,शुक्रवार का वाहन त्याग, शनिवार को व्हाट्सएप बंद और रविवार को टीवी बंद रखो!

बापू ने कहा यह सब नकारात्मक डाोन्ट्स की बातें हैं।। सामने मुजे सात हकारात्मक’डूझ’की बातें कहनी है:

सोमवार को शिव अभिषेक करो। मंगलवार को राम प्रागट्य की स्तुति। बुधवार को अत्रि स्तुति। गुरुवार को गुरु अष्टक तत: कीम्।शुक्रवार को शुकदेव जी कथित भागवत का दशमस्कंध का गान। शनिवार को हनुमान चालीसा और रविवार को कुछ ना करो बच्चों और परिवार के साथ बैठो!!

दूसरा मणि चिंतामणि है। यह मणि हमारी चिताओं को हर लेता है। तीसरा मणि चूड़ामणि है। मां जानकी मुद्रिका रूपी सवाल के सामने जवाब प्रमाण,प्रत्युत्तर दिया था।।यहमणिओं की छाया में रघुवंश मणि,संत शिरोमणि,भक्त शिरोमणि,सती शिरोमणि, चतुर शिरोमणि जैसे कहीं मणियां है।।

बापू ने कहा कि आप सबके लिए,श्रोताओं के लिए दिन में पांच बार यज्ञ करता हूं। मेरे लिए कुछ करने का शेष नहीं रहा, मेरा काम पूरा हो गया है।लेकिन आपके लिए करता हूं।।

यदि हम ठीक प्यासे हैं तो कुआं प्यासे को खोज लेता है।।

अब गुरु पूर्णिमा आ रही है तो बापू ने कहा अपने मूल को मत भूलना। प्रलोभन में मत जाना। हम जो मार्ग पर चढ़ते हैं उनकी बाधाएं कौन सी है?अपरोक्षानुभूति ग्रंथ में शंकराचार्य जी ने बाधायें बताई है। वहां लिखा है:

अनुसंधान खंडन,आलस,भोग लालसा,लय का टूटना,तमस,रसास्वाद,आकस्मिक घटना और शून्यता।येबाधायें हैं। धीरे-धीरे सब विघ्न का त्याग करना।।

बुद्ध पुरुष ने दिखाये मार्ग पर हम क्यों नहीं चलते क्योंकि हम स्वयं तय कर लेते हैं हमसे नहीं होगा, मेरा मूड नहीं है,मेरी किस्मत नहीं है,लोग क्या कहेंगे यह कारण है।। हरिकृपा से भी बड़ी गुरुकृपा है

कल रविवार रामकथा का विराम का दिन

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