Homeगुजरातव्यास पीठ पर हूइ छोटी सी धर्म संसद।।

व्यास पीठ पर हूइ छोटी सी धर्म संसद।।

रामचरितमानस सनातन धर्म का अंतिम ग्रंथ है।।

सार रूप में सनातन धर्म का दर्शन करना हो तो रामचरितमानस देखो।।

धर्मरथ की पूरी बात सनातन धर्म का दर्शन कराती है।।

सनातन धर्म की आत्मा कहती है हमें फॉलोअर्स नहीं फ्लावर्स बनाए हैं।।

भारत में रहकर हम सब भारतीय है,गाय का दूध अमृत है,गाय का घी दवा है,गाय एक प्राणी नहीं पूरे विश्व का प्राण है:चीफ इमाम ऑफ इन्डिया।।

ईश्वर के सामने झुकना उसे नमाज कहते हैं।।

दिल्ही के भारत मंडपम् में बह रही रामकथा धारा आज आंठवे दिन में प्रवेश कर रही है।।

कथा के आरंभ में कथा वाचिका और मूक प्राणियों की सेवा करती देवी चित्रलेखा जी ने व्यास वंदना की और बताया कि जब अति कृपा होती है तब ऐसे सद्गुरु के दर्शन होते हैं।।और साधु के एक-एक आभूषण बापू में दिखते हैं।।

गुरु राज राजेश्वर जी ने अपना भाव रखा।। पूज्य स्वामी मैथिली शरण जी और आचार्य मनीष जी ने भी अपने-अपने वक्तव्य दिए।।

कथा को आरंभ करते हुए बापू ने कहा कल रात को एक पत्र मिला।जोआक्रमक पत्र था। पूछना चाहते थे की बापू जीस ग्रंथ को लेकर सनातन धर्म की बात कर रहे हो,उस ग्रंथ में सनातन धर्म की कोई गंध है! बापू ने कहा की गंध तो जिसे नाक है उसे महसूस होगी! लेकिन वेदों के जितने भास्यकार हुए हैं जिन्होंने वेद विचार को और व्यापक बनाया है ऐसे एक भगवान सायनाचार्य जी ने चार बिंदु कहे हैं की सनातन धर्म का ग्रंथ कैसा होता है? सनातन धर्म का ग्रंथ वह है जिसमें ज्ञान विज्ञान की बातें हो। जो जीव को प्रमादी ना बनाये, कर्मयोगी बने। तीसरा बिंदु बताया उपासना पद्धति का ज्ञान दे और यह सब करते-करते साधक को शरणागति और प्रपन्नता की ओर गति करायें।। इस आधार पर रामचरितमानस सनातन धर्म का अंतिम ग्रंथ है। यह चारों वस्तु रामचरितमानस के आरंभ में है।। राम कथा के चार घाट: कैलाश का ज्ञान घाट,कर्मघाट, उपासना और तुलसी जी का दीनता का और प्रपत्ति का घाट जहां से यह रामकथा शुरू होती है।।सार रूप में सनातन धर्म का दर्शन करना हो तो रामचरितमानस देखो।।

लंकाकांड में रावण को रथ में और राम को पैदल देखकर विभीषण अधीर हो गया तब राम ने कहा कि जिससे विजय मिलती है वह रथ विलग होता है वहां धर्मरथ की पूरी बात सनातन धर्म का दर्शन कराती है।। श्रीमद् भागवत में सनातन धर्म के ३० लक्षण बताए हैं।। यह ३० का दर्शन का दशांश-३ लक्षण कल पूर्णाहुति के दिन मुझे कहने हैं।।

सनातन धर्म के 18 प्रतीक जो गुजराती लेखक कवि साहित्यकार मनोज जोशी की तरफ से भेजे गए और ओशो ने कहे सनातन धर्म के बारे में गुजराती लेखक चिंतक भद्रायु भाई वच्छराजानी ने भेजा हुआ,जो बापू ने उन पर अपनी विचार प्रस्तुत किए।।सनातन धर्म की आत्मा कहती है हमें फॉलोअर्स नहीं फ्लावर्स बनाए हैं।। सनातन धर्म के प्रतीकों में सबसे पहले प्रतीक ओम है।।फिर स्वास्तिक,त्रिशूल,शंख,कमल का फूल,श्री यंत्र, नटराज,दिया,कलश,रुद्राक्ष,तुलसी पत्र,चक्र,नंदी, अक्षय वट,नमस्कार की मुद्रा,तिलक और हंस है।। सिख धर्म के भाई परमजीत सिंह एवं नेक्स्ट टु दलाई लामा बौद्ध भिक्षु संगम जी, श्री श्री 1008महामंडलेश्वर आचार्य नर्मदा शंकर पुरी जी और चीफ इमाम ऑफ इंडिया इमाम साहब यह पांच अलग-अलग कुर्सी पर बैठे एक छोटा सा भारत और छोटा सा सनातन धर्म का सम्मेलन हुआ हो ऐसा लगता था।।

कथा के आखिर में सब ने अपने-अपने भाव रखे उसका सूर था कि अभी तक बहुत कार्यक्रम हुए मगर इतना अच्छा ऐतिहासिक कार्यक्रम नहीं हुआ।।चीफ इमाम ऑफ इंडिया जिसे कृष्ण के वंशज भी कहे जाते हैं कह रहे थे जीवन में पहली बार रामकथा में आया।। हमारी सोच बहुत संकीर्ण हो गई है। नमाज संस्कृत का भारतीय शब्द है। सऊदी अरब में नमाज कहो तो कोई नहीं समझता नमा का मतलब झुक जाना और अज का मतलब ईश्वर है।।ईश्वर के सामने झुकना उसे नमाज कहते हैं राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में गया तब हमारे धर्म गुरुओं की ओर से बहुत से फतवे मेरे खिलाफ निकले और कहा कि माफी मांग लो! मैं आज बापू के सामने फिर कहता हूं कि मैं माफी नहीं मांगूंगा, क्योंकि भारत में रहकर हम सब भारतीय है।।गाय का दूध अमृत है,गाय का घी दवा है।। गाय एक प्राणी नहीं पूरे विश्व का प्राण है यह बात में सबके सामने बताना चाहता हूं।।

पांच कुर्सी पर बैठा छोटा भारत का स्वरूप दिखाई दिया।।जैन आचार्य लोकेश मुनि ने भी कहा कि मैं किसी एक फिरके का नहीं। मैं महावीर वासी हूं। कोई एक पंथ में नहीं, मैं महावीर पंथी हूं और पूरे जैन समाज के फिरकों द्वारा मुझे सहयोग मिला है आखिर में विश्व शांति के सपना पूरा करने के लिए सभी धर्म गुरुओं ने एक दूसरे से हाथ मेल कर खड़े होकर प्रतिबद्धता व्यक्त की और एक छोटा सा लेकिन बहुत दिव्य धर्म सम्मेलन की समाप्ति हुई और आज की कथा को विराम दिया गया।।

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