
जो शब्द बोला नहीं गया वह निर्गुण है और जो लिखा और बोला गया वह सगुण है।
मंत्र के साथ आक्रमकता नहीं होनी चाहिए आक्रमकता मन की तीव्रता और घर्षण पैदा करता है।
कोटि-कोटि भारतीयों की श्रद्धा है वो है अयोध्या का राम मंदिर।।
श्री,क्षमा,श्रध्धा,प्रજ્ઞા और शांति मातृपंचक है।।
भवानी रूपेण श्रद्धा जो हमें ज्ञान और विवेक प्रदान करती है।
घाटकोपर में चल रही रामकथा के चौथे दिन आरंभ में कथा के मनोरथी पराग भाई शाह परिवार द्वारा एक करोड रुपए की राशि वृद्धाश्रम को,एक करोड रुपए की राशि वृक्षारोपण के लिए और एक करोड रुपए की राशि नम्र मुनि महाराज साहब के आशीर्वचनों से निर्मित हो रही जूनागढ़ स्थित सुपर मल्टी स्पेशलिटी नि:शुल्क अस्पताल के लिए देने की घोषणा की गई।।ये भी कहा की जब तक १५१ करोड वृक्षो का प्रोजेक्ट जब तक पुरा तक पूरा नहीं होगा तब तक तन मन और धन से अपनी सेवा प्रदान करते रहेंगे।।
आज भूपेंद्र भाई पंड्या समर्थ भागवत कथाकार का जन्मदिन उनकी विशेष उपस्थिति रही और उन्होंने अपने शब्द भाव रखते हुए वृक्ष में साधूता और साधु शब्द का अपना चिंतन प्रस्तुत किया।।
आज विशेष दिन यह है साधु वासवानी द्वारा घोषित मिटलेय डे-मांसाहार निषेध दिन है तो मिटलेस डे पर केमिकल वेलफेयर बोर्ड के सदस्य द्वारा उनके बारे में बताया गया।।
आज सीताराम जी के लग्न की तिथि है और समग्र देश के लिए खास विशेष दिन है 12:49 पर अभिजीत मुहूर्त में अयोध्या स्थित राम मंदिर के कलश पर यशस्वी प्रधानमंत्री के हाथों केसरिया ध्वज का आरोहण होगा उनके बारे में बताया गया।।
रामकथा का सार दोहन का प्रकाशन चित्रकूट धाम ट्रस्ट तलगाजरडा द्वारा और नितिन भाई वडगामा द्वारा संपादन होता है वैसी दो रामकथा मानस कबंध राजस्थान और मानस अहिंसा नंदी सरोवर कच्छ का बापू के हस्तो ब्रह्मार्पण किया गया।।
भुपेंद्र भाई ने अपनी ओर से 11 वृक्षों के संकल्प की राशि भी प्रदान की।।
आज अपने भाई की स्मृति के लिए हसु भाई और उमीबहन नागरेचा परिवार की ओर से 108 करोड रुपए की धनराशि वृद्राश्रम को अर्पण करने की बात भी कही गई इसलिए आरंभ के पलों में बहुत कुछ विशेष प्रस्तुति हूइ।।
आरंभ में बापू ने बताया की जो शब्द बोला नहीं गया वह निर्गुण है और जो लिखा और बोला गया वह सगुण है।ब्रह्म शब्द लगे वहां सगुन निर्गुण दोनों लगता है। मेरी कोई संस्था नहीं लेकिन प्रमाणिक अंतर रखकर में संस्थाओं से जुड़ा हूं।। व्यास पीठों का काम संस्था बनाना नहीं आस्था बनाना होता है।।व्यवस्था के लिए संस्था जरूरी है। मंत्र नारा ना बने लेकिन नारायण है।इसलिए मंत्र के साथ आक्रमकता नहीं होनी चाहिए आक्रमकता मन की तीव्रता और घर्षण पैदा करता है आज विशेष दिन विवाह पंचमी है। मंदिर तो बहुत बनते हैं,वहां स्पर्धा दिखती है लेकिन कोटि-कोटि भारतीयों की श्रद्धा है वो अयोध्या का राम मंदिर के ऊपर शिखर पर ध्वजारोहण होने जा रहा है।।
मातृ पंचकों में एक माता श्री है। जैसे हनुमान चालीसा श्री से शुरू होता है।
उभय बीच श्री सोहती कैसी।
ब्रह्म जीव विच माया जैसी।।
उनके कई पर्याय शब्दों की वर्षा हो पाएगी श्री एक ऐसी मां है।। वृक्ष साधु है और साधु वृक्ष है। श्री संपन्न करता है दूसरी माता क्षमा है जो हमारे शरीर के रसायन को बदल देता है।। श्रद्धा तीसरी माता है।। भवानी रूपेण श्रद्धा जो हमें ज्ञान और विवेक प्रदान करती है।।प्रज्ञा हमारी मां है और शांति भी हमारी माता है।।
अपनी अंगत बात किसी अंगत को भी मत कहना
क्योंकि अंगत को भी कई अंगत होते हैं!
कथा प्रवाह में याज्ञवल्क्य और भारद्वाज के बीच संवाद हुआ और राम के बारे में पूछा। राम क्या है? और राम कथा के बारे में पूछा तब शिव कथा से शुरू करते हुए शिव चरित्र का आरंभ हुआ।।
और वक्ता और श्रोता दोनों के लक्षणों की बापू ने बात बताई।।शिव चरित्र की कथा सुनाइ।।
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