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जहां भारतीय लोग आर्थिक तरक्की के लिए नई स्किल सीखना चाहते हैं, वहीं समय की कमी उन्हें पीछे रोक रही है: ग्रेट लर्निंग की अपस्किलिंग ट्रेंड्स रिपोर्ट 2025-26

  • अब 78% पेशेवर का मानना है कि AI उनके करियर पर सकारात्मक असर डालेगा
  • वित्तीय वर्ष 2026 में 81% भारतीय पेशेवर अपस्किलिंग में निवेश करने की योजना बना रहे हैं
  • 80% पेशेवर कहते हैं कि वे नई स्किल सीखने के लिए GenAI का इस्तेमाल करते हैं; 60% का कहना है कि वे अपने कार्यस्थल में इसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं

भारत 04 जून 2025: ग्रेट लर्निंग जो एक लीडिंग ग्लोबल एडटेक कंपनी है, जो उच्च शिक्षा और पेशेवर ट्रेनिंग में विशेषज्ञ है, ने अपनी वार्षिक ‘अपस्किलिंग ट्रेंड्स रिपोर्ट 2025–26’ का चौथा वर्ज़न जारी किया है।

यह रिपोर्ट 1,000 से ज़्यादा भारतीय पेशेवरों पर की गई व्यापक प्राथमिक रिसर्च पर आधारित है। इसमें अलग-अलग सेक्टर, उम्र, शहर, इंडस्ट्री और पढ़ाई के बैकग्राउंड वाले लोग शामिल हैं। यह अलग-अलग प्रतिभागी के आधार अपस्किलिंग ट्रेंड्स, नौकरी के प्रति भावना, और करियर पर तकनीक के बदलते प्रभाव पर व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करता है। निष्कर्षों में AI के प्रति बढ़ती आशावादिता, तकनीकी बदलावों के बावज़ूद नौकरी बनाए रखने में बढ़ा हुआ विश्वास, और पेशेवरों में नई भूमिकाओं को अपनाने और खासकर उच्च माँग वाले क्षेत्रों जैसे आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग में अपस्किलिंग में निवेश करने की मज़बूत इच्छा को दिखाया गया है।

2025-26 में पेशेवरों के बीच नौकरी बनाए रखने का आत्मविश्वास बढ़ा, खासकर बड़ी कंपनियों और टियर-1 शहरों के पेशेवरों में

रिपोर्ट के हिसाब से, इस साल 73% पेशेवरों को अपनी नौकरी में बने रहने का भरोसा है, जो पिछले साल की तुलना में 11 प्रतिशत अंक ज़्यादा है। यह आत्मविशवास लोकेशन और कंपनी की साइज़ के अनुसार अलग-अलग है। टियर-1 शहरों में 31% पेशेवरों को अपनी नौकरी बनाये रखने को लेकर पूरा भरोसा जताया, जबकि टियर-2 शहरों में यह आंकड़ा सिर्फ़ 18% है। इसी तरह, जिन कंपनियों में 5,000 से ज़्यादा कर्मचारी हैं, वहाँ 85% लोगों को अपनी नौकरी पर भरोसा है, जबकि जिन कंपनियों में 50 से कम कर्मचारी हैं, वहाँ यह आंकड़ा सिर्फ़ 58% है।

AI के बदलाव पर सकारात्मक रुख: 78% पेशेवरों को अपने करियर पर इसके प्रभाव को लेकर भरोसा है

जैसे-जैसे AI और ऑटोमेशन से जुड़ी तकनीकों के कारण नौकरियों का रूप बदल रहा है, पेशेवरों के भीतर खुद को ढालने की क्षमता भी बढ़ती जा रही है। अब 78% पेशेवर अपने करियर पर AI के प्रभाव को लेकर सकारात्मक सोच रखने लगे हैं। दिलचस्प बात यह है कि एमबीए और बी.कॉम डिग्रीधारकों में यह सकारात्मकता ज़्यादा (क्रमशः 89% और 84%) है, जबकि बी.ई /बी.टेक वाले थोड़े कम आशावादी हैं। यह संभावना है कि यह ट्रेंड भारत के IT सेक्टर में हाल ही के बदलावों से प्रभावित हो, जहाँ कई बड़ी कंपनियों ने, जो परंपरागत रूप से प्रवेश स्तर और मध्यम स्तर के टैलेंट की भर्ती करती थीं, AI को अपनाने की बढ़ती प्रक्रिया के कारण भर्ती कम कर दी है। इससे टेक्नोलॉजी डिग्री वाले प्रोफ़ेशनल्स के बीच AI के असर को लेकर चर्चा बढ़ी है, जिससे उनके नज़रिए पर प्रभाव पड़ा है।

अपस्किलिंग में तेज़ी आई है, क्योंकि वित्तीय वर्ष 2026 में 81% पेशेवर भविष्य सुरक्षित बनाने वाले स्किल को प्राथमिकता दे रहे हैं

वित्तीय वर्ष 2026 में, 85% पेशेवर अपने करियर को भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए अपस्किलिंग के महत्व को पहचानते हैं, जो पिछले साल के 6% से ज़्यादा है। 81% पेशेवर इस वर्ष नए तकनीकी कौशल प्राप्त करने में निवेश करने की योजना बना रहे हैं।

टियर-1 शहरों में पेशेवर विशेष रूप से प्रेरित हैं, 46% ने अपस्किलिंग को ‘बेहद महत्वपूर्ण’ माना है, जबकि टियर-2 शहरों में केवल 26% पेशेवर ही इसे महत्वपूर्ण मानते हैं। कंपनी के साइज़ भी इस नज़रिए को प्रभावित करता है – बड़ी फ़र्मों (1000-5000+ कर्मचारी) में 93% कर्मचारी अपस्किलिंग को महत्वपूर्ण मानते हैं, जबकि 50 से कम कर्मचारियों वाली कंपनियों में 75% कर्मचारी अपस्किलिंग को महत्वपूर्ण मानते हैं।

अपस्किलिंग के लिए सबसे ज़्यादा दिलचस्पी आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग में देखी गई है, इसके बाद सॉफ़्टवेयर डेवलपमेंट (36%) और साइबरसिक्योरिटी (35%) जैसे क्षेत्र पसंद किए जा रहे हैं। एक खास बात यह भी है कि जहाँ वित्तीय वर्ष 2025 में लोग मास्टर डिग्री को प्राथमिकता दे रहे थे, वहीं अब वित्तीय वर्ष 2026 में उनकी दिलचस्पी शॉर्ट सर्टिफ़िकेट कोर्स की ओर बढ़ रही है। यह बदलाव इसलिए हो रहा है, क्योंकि ये कोर्स सस्ते और किफ़ायती होते हैं, लक्षित शिक्षा के हिसाब से होते हैं और तुरंत काम में लाए जा सकते हैं। इससे यह भी पता चलता है कि आज़कल नियोक्ता छोटे सर्टिफ़िकेट (माइक्रो-क्रेडेंशियल्स) को स्वीकार कर रहे हैं और पेशेवर भी नौकरी के नए अवसरों को ध्यान में रखते हुए सोच-समझकर कोर्स का चुनाव कर रहे हैं।

वित्तीय विकास की चाहत अपस्किलिंग को बढ़ावा देती हैलेकिन समय की कमी पेशेवरों को पीछे रखती है

सभी उम्र के लोगों में कमाई बढ़ाने की इच्छा अपस्किलिंग का सबसे बड़ा कारण बनकर सामने आई है। 23% पेशेवरों ने इसे अपना मुख्य कारण बताया, जबकि 15% ने प्रमोशन पाने को कारण बताया। छोटे शहरों में कमाई बढ़ाने की चाह ज़्यादा (27%) देखी गई, जबकि बड़े शहरों (मेट्रो) में यह आंकड़ा 21% रहा।

हालाँकि, एक बड़ी चुनौती अब भी बरकरार है – 37% पेशेवरों का कहना है कि ऑफ़िस के काम का दबाव इतना होता है कि उन्हें नई तकनीकी स्किल सीखने का समय नहीं मिल पाता। यह समस्या महिलाओं के लिए और भी ज़्यादा है, जहाँ 25% महिलाओं ने पारिवारिक ज़िम्मेदारियों को रुकावट बताया, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 20% है। इसके अलावा, करियर की शुरुआत कर रहे 8% पेशेवरों (0–3 साल का अनुभव) ने लागत को एक बड़ी रुकावट बताया, और यह दिखाता है कि अब भी सरल और कम समय लेने वाले अपस्किलिंग के विकल्पों की ज़रूरत है।

82% भारतीय नौकरी की तलाश में हैं; प्रोफ़ेशनल लोग पैसे से ज़्यादा वर्क लाइफ़ बैलेंस को महत्व दे रहे हैं।

82% भारतीय पेशेवर नौकरी की तलाश में हैं, जिनमें से 51% एक्टिव तौर पर 2025 में नई भूमिकाएँ तलाश रहे हैं और 31% निष्क्रिय रूप से तलाश कर रहे हैं। हालाँकि, 45 से 60 साल कि उम्र के पेशेवर नौकरी बदलने के लिए कम इच्छुक नज़र आते हैं, सिर्फ़ 39% एक्टिव तौर पर तलाश कर रहे हैं। भर्ती में मंदी के बावज़ूद, वैश्विक व्यापार शुल्क और इमिग्रेशन से जुडी नीतियाँ अनिश्चितता बरकरार रखती हैं। 43% नौकरी चाहने वालों के लिए बाजार में उच्च प्रतिस्पर्धा और वेतन की अपूर्ण अपेक्षाएं सबसे बड़ी चुनौती हैं, जबकि 35% पेशेवरों का मानना है कि अतिरिक्त कौशल या प्रमाणपत्रों की कमी नौकरी पाने में सबसे बड़ी चुनौती है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पेशेवर अब वेतन के साथ-साथ अपने वर्क लाइफ़ बैलेंस को भी उतनी ही अहमियत दे रहे हैं। 19% लोगों ने वर्क लाइफ़ बैलेंस को अपनी नौकरी खोजते समय सबसे महत्वपूर्ण कारक बताया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि 44 से 60 साल के 26% पेशेवर कार्य-जीवन के संतुलन को वेतन से ज्यादा महत्व देते हैं, जो काम में सहूलियत और अच्छी सेहत की बढ़ती माँग को दर्शाता है।

रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए, ग्रेट लर्निंग के सहसंस्थापक, हरि कृष्णन नायर का कहना है, ” AI एक परिवर्तनकारी शक्ति है, जो आधुनिक कार्यस्थल को नए रूप में ढाल रही है। यह जहां एक ओर चुनौतियाँ प्रस्तुत करती है, वहीं दूसरी ओर उन लोगों के लिए नए अवसर भी लेकर आती है, जो सीखने और खुद को विकसित करने के लिए तैयार हैं। AI सिर्फ़ नौकरियों की भूमिकाओं को बदलने या फैसले-तय करने की प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने तक सीमित नहीं है — यह पूरी तरह से नए करियर पथों के लिए भी रास्ता बना रही है। इस वर्ष की ‘अपस्किलिंग ट्रेंड्स रिपोर्ट’ पेशेवरों में इसी तुरंता और बदलाव को अपनाने की भावना को दिखाती है, जो नौकरी बनाए रखने को लेकर उनके बढ़ते आत्मविश्वास, AI के प्रभाव को लेकर आशावाद, और AI व मशीन लर्निंग जैसे उच्च माँग वाले क्षेत्रों में अपस्किलिंग की प्रबल इच्छा में स्पष्ट रूप से झलकती है। हजारों शिक्षार्थियों और उद्योग के लीडिंग लीडर के साथ काम करने के अपने अनुभव से मैंने यह प्रत्यक्ष रूप से देखा है कि समय पर और प्रासंगिक अपस्किलिंग किसी के करियर के लिए निर्णायक बदलाव ला सकती है। अब टैलेंट और अवसर के बीच की दूरी ‘पहुँच’ का नहीं, बल्कि ‘कदम उठाने’ का विषय बन चुकी है। जैसे-जैसे परिवर्तन तेज़ी से हो रहा है, वे लोग जो लगातार सीखते रहते हैं, न सिर्फ़ नौकरी योग्य बने रहेंगे, बल्कि इस परिवर्तन के लीडर भी बनेंगे। यह निष्कर्ष पेशेवरों, नियोक्ताओं और नीति बनाने वाले सभी के लिए एक स्पष्ट आह्वान हैं: दीर्घकालिक विकास के लिए सबसे सुरक्षित रणनीति के रूप में अपस्किलिंग में निवेश करें।”

 

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