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⁠समग्र विकास के लिए इंडस्ट्री और एकेडेमिया का समन्वय अनिवार्य – श्री बी.आर. शंकरानंद

फार्मासिस्टों की भूमिका जनस्वास्थ्य सुरक्षा और किफायती चिकित्सा सेवाओं में अतुलनीय – डॉ. मोंटू कुमार पटेल
नवीनतम औद्योगिक कार्यप्रणालियों का प्रशिक्षण शिक्षकों के लिए अनिवार्य – डॉ. सुदर्शन जैन

गुजरात, अहमदाबाद 29 मार्च 2025: फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) तथा भारतीय शिक्षण मंडल के संयुक्त तत्वावधान में, नई दिल्ली के नौरोजी नगर स्थित पीसीआई के नवीन परिसर में एकदिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला का उद्देश्य बी. फार्मा पाठ्यक्रम को उद्योग जगत की आवश्यकताओं और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप संरेखित करना तथा फार्मेसी शिक्षा को वैश्विक मानकों के अनुसार दिशा प्रदान करना था।

इस कार्यशाला के मुख्य अतिथि भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री बी.आर. शंकरानंद तथा मुख्य वक्ता इंडियन फार्मास्यूटिकल एलायंस के महासचिव डॉ. सुदर्शन जैन रहे । कार्यशाला की अध्यक्षता पीसीआई के अध्यक्ष डॉ. मोंटू कुमार पटेल ने की। इस कार्यक्रम में देशभर के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के फार्मेसी विशेषज्ञों के साथ-साथ भारतीय शिक्षण मंडल के विषय विशेषज्ञों ने सहभागिता की।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ. मोंटू कुमार पटेल ने कहा कि जनस्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किफायती व प्रभावी चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने में फार्मासिस्टों की भूमिका अतुलनीय है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने, दवाओं के वितरण एवं रखरखाव, तथा दवाओं की किफायती एवं सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने में फार्मासिस्टों की विशेषज्ञता और प्रतिबद्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है। डॉ. पटेल ने आगे कहा कि यह कार्यशाला, फार्मेसी शिक्षा को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप संरेखित करने के साथ-साथ उसे वैश्विक मानकों तक पहुंचाने में एक प्रभावी भूमिका निभाएगी।

श्री बी.आर. शंकरानंद जी ने कहा कि भारतीय शिक्षा दर्शन के अनुसार, ज्ञान छात्र के भीतर विद्यमान होता है और शिक्षक का कार्य उसे प्रज्वलित करना है। जैसे मूर्ति निर्माण हेतु पत्थर का अनावश्यक भाग हटाना आवश्यक है, वैसे ही पाठ्यक्रम से अनुपयोगी विषयवस्तु हटाकर पठन-पाठन की प्रभावी प्रक्रिया सुनिश्चित की जानी चाहिए। अतः ज्ञान अर्जन से पूर्व अनुपयोगी जानकारी को हटाना (Delearning) आवश्यक है, जिससे वास्तविक सीखने (Learning) की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और सार्थक हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि इंडस्ट्री और एकेडेमिया शिक्षा के दो नेत्रों के समान हैं, अतः समग्र विकास के लिए इन दोनों की दृष्टि में समरूपता होना आवश्यक है। शिक्षा केवल रोजगार प्राप्ति का साधन न होकर आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय भावना से जुड़े सशक्त नागरिकों के निर्माण का माध्यम होनी चाहिए।

डॉ. सुदर्शन जैन जी ने कहा कि शिक्षकों को नवीनतम औद्योगिक कार्यप्रणालियों का प्रशिक्षण देना अनिवार्य है ताकि वे छात्रों को आधुनिक उद्योगजगत की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार कर सकें। इससे न केवल छात्रों का उद्योग में प्रभावी योगदान सुनिश्चित होगा, बल्कि उनके लिए उन्नत भविष्य का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

कार्यक्रम के दौरान परिषद के सदस्य डॉ. नीरज उपमन्यु, डॉ. वेंकट रमण, डॉ. निरंजन बाबू सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। साथ ही, कार्यशाला में उपस्थित डॉ. अंबर व्यास, डॉ. संजय चौहान, डॉ. श्रीकांत जोशी जैसे शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं के साथ चर्चा का अवसर भी प्राप्त हुआ।

इस अवसर पर पीसीआई के वरिष्ठ सदस्य डॉ. अतुल नासा, रजिस्ट्रार डॉ. अनिल मित्तल, डॉ. प्रतिमा तिवारी सहित फार्मेसी क्षेत्र के अनेक शिक्षाविद उपस्थित रहे। साथ ही, कार्यशाला में इंडियन फार्माकोपिया कमीशन, सीडीएससीओ, एवं डीडीसी के पदाधिकारियों ने भी सहभागिता की।

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