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सत्य कभी अधिकार नहीं जमाता,सत्ता अधिकार की बात करेगी,व्यास गादी जिम्मेदारी की चर्चा करेगी।।

मानस अत्यंत मौलिक है।।

पादुका और पदरेखा महत्व की लगती है।।

जन्माष्टमी के मंगल दिन व्यासपीठ से त्रिभुवन को कृष्ण जन्म और राम जन्म की बधाइयां दी गइ।।

बापु ने बताये प्रेम के दश अवतार।।

“मेरे से कुछ और ना ले जाओ,थोड़ी आंख-नजर ले जाओ!”

भगवान द्वारिकाधीश की नगरी उडुपी में बह रही रामकथा कृष्ण जन्मोत्सव जन्माष्टमी के परम पावन दिन शुक्रवार को चौथे दिन में परम उत्साह से प्रवेश कर रही है।।

बापु ने सभी तिर्थों को वंदन करते हुए कृष्ण जन्माष्टमी की बधाई के साथ बताया की आज वैसे तो कृष्ण जन्म का दिन,लेकिन वह तो रात को होगा दिन में राम का जन्म होगा।भगवान कृष्ण को जगतगुरु कहते हैं।कृष्ण को कई रूपों से भजा जाता है।कोई पिता के रूप में,कोई पति के रूप में कई साधकों ने पुत्र रुपए भजा है।।कई लोगों ने कृष्ण के साथ सखा के रूप में और कईं लोगों ने वैरी के रूप में भी देखा है।।हम वैर कर सकते हैं वह हमसे बैर नहीं करता।।श्रीमन् महाप्रभु जी कृष्ण के नाम,रूप,लीला,धाम को दूध कहते हैं।।यद्यपि कृष्ण अमृत है।आचार्य की बोली में कृष्ण पवित्रा दूध है। दूध सदैव पवित्र ही माना गया।पूजा अभिषेक में दूध की पसंद की की गई है।मूलत: दशावतार पौराणिक मत अनुसार सब विष्णु के अवतार है।भागवत जी में कृष्ण की स्तुतियों में वह विष्णु का बाप के बाप का भी बाप लगता है! जन्म पर सब देवता आते हैं,सब भगवान स्तुति करते हैं।ब्रह्मा,विष्णु,महेश के साथ सब आते है।।प्रगट होता है तब सभी देवता और प्रभास क्षेत्र में विदाई हुई तब सभी देवताएं आए हैं। सब देखते रह गये और कृष्ण के दिव्य स्वरूप का तेज विलीन होता जा रहा है।

बापु ने कहा कि जीवन में तीन गुण दिख जाए उनकी मौलिकता आसमान छू लेती है।तुलसी पर आक्षेप लगते हैं कि तुलसी जी ने वहां से लिया है, कुछ वहां से लिया है।लेकिन तुलसी मौलिक है।गुरु सद्गुरु और जगतगुरु-तुलसी के तीन गुरु है।नरहरि महाराज गुरु है।रामचरितमानस सद्गुरु है और त्रिभुवन के रूप में महादेव जगदगुरु है।उनका चिंतन मौलिक और आसमान छूता है।

यह भी बापू ने इशारा किया की कथा पंडाल में होती है लेकिन अब लगता है कि बहुत कम लोगों के बीच में हो।।वैसे तो रामकथा भ्रम रूपी मेंढकों को खाने के लिए सर्पिणी है।

कथा से चार वस्तु आयेगी।हम अयोग-अभी हमारा योग नहीं हुआ।योग की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। सत्य कभी अधिकार नहीं जमाता,सत्ता अधिकार की बात करेगी,व्यास गादी जिम्मेदारी की चर्चा करेगी।।

बालकांड और अयोध्या कांड कृष्ण के नेत्र है और अरण्य और किष्किंधा दो कान है।जहां सूर्पणखा के नाक कान काटे गए।यह श्रवण है।सुंदर,लंका और उत्तर परमात्मा का मुख है,स्वाद है।आंखों में जो चार पलकें हैं वह चौपाई है।यह चौपाई गोविंद सुनता है।मानस अत्यंत मौलिक है।कृष्ण अत्यंत सुंदर है।परम सौंदर्य देखो तब कृष्ण याद आना चाहिए तब हमारी आंखें सार्थक है।।पादुका से भी पदरेखा महत्व की लगती है।पादूका बहिर है और रेखा भीतरी है।योग के बाद वियोग होगा।लेकिन वियोग में गाया जा सकता है।चौथी अवस्था है विरह विरह में गाया नहीं जाता,रोया जाता है।।विरह की दशा में गोपियों रोई है।केवल कृष्ण दर्शन के लिए रोई है।एक साल का वियोग होता है तब जन्माष्टमी आती है।।

आप कथा छोड़ो तो भी कथा आपको नहीं छोड़ेगी गुजरात के समर्थ संगीतकार गौरांग व्यास के साथ जुड़ी हुई बातें याद करते हुए ‘समन्वय’ संस्था और अविनाश व्यास अवार्ड के प्रवर्तक गौरांग व्यास को व्यास पीठ से बापू ने श्रद्धांजलि अर्पित की।।

कृष्ण आवृत्त हो कि अनावृत हो देवकी के गर्भ में आया तो कंस के विचार बदलने लगे।कंस सोचता है देव की स्त्री है,बहन है,सगर्भा है तो उनकी हत्या न की जाए।

बापु ने आज प्रेम के दश अवतार बताते हुए बताया कि हमारे दशावतारों में सबसे पहला अवतार मत्स्य अवतार है।प्रेम सागर भी नहीं जानता।एक परम तत्व के सिवा किसी को ना जान पाए वह प्रेम का मत्स्य अवतार है।।प्रेम कच्छप अवतार है।कछुए की पीठ कठिन और नीचे का भाग कोमल होता है। प्रेम की छाती कोमल और पीठ कठोर होती है।हृदय सुकुमार और सहन करने के लिए कठोर। प्रेम वराह अवतार है।केवल प्रेमी को नहीं पूरी पृथ्वी को,जगत को वो धारण करता है,सबको धारण करता है।।प्रेम नृसिंह अवतार है।वह चेहरा नहीं देखेगा।प्रेमी का सीना फाड़ के हृदय देखेगा।प्रेम हृदय देखता है तब वो नृसिंह अवतार है।प्रेम इतना सूक्ष्म है कि कभी वामन लगे।प्रेम तीनों कदमों में त्रिभुवन को वश कर लेता है तो सूक्ष्म भी है विराट भी है।।प्रेम परशुराम है जैसे उनका फरसा दान है।प्रेम महादानी है।प्रेम में जितनी मर्यादा होती इतनी कहीं नहीं होती।तो यह मर्यादा पुरुषोत्तम राम का अवतार है।।

गोपियों माला के मनके के हैं और कृष्ण मेरु है-ऐसे यह प्रेम का राम अवतार है।प्रेम कृष्णावतार है। दूध है,स्निग्ध है,मधुर है,पौष्टिक है।प्रेम बुद्धावतार है प्रेम आदमी को चंचल नहीं करता,शांत करता है,शून्य कर देता है।।प्रेम कल की चिंता नहीं करता इसलिए यह कल्कि अवतार भी हम कह सकते हैं।।

बापु ने कहा कि मेरे से कुछ और ना ले जाओ,थोड़ी आंख-नजर ले जाओ!

फिर कृष्ण कैसा है? एक मंत्र जो महाभारत के अनुशासन पर्व में लिखा है:

सर्वशास्त्रपरोदक्ष: सुवच: सुंदर: स्वंग: कूलिन: शुभदर्शन:जितेन्द्रीय:सत्यवादी ब्राह्मण:

शान्तमानस:पितृमातृहितैयुक्त:*सर्वोकर्मोपरायणौ:स जगदगुरु ऐ व:

सर्वशास्त्र में दक्ष है।सुवचन है।सुंदर है।कुलीन है। दर्शन शुभ है।जितेंद्रय है।सत्यवादी ब्राह्मण है।शांत है।माता-पिता के हित में जीवन जीते हैं।।ऐसा बताया गया है।।

फिर राम जन्म की ओर ले जाते हुए संक्षिप्त में शिव चरित्र की बात करके राम जन्म के कारण की बात करके अयोध्या में राजा दशरथ के राजमहल में,मां कौशल्या की कोख में,चारभुजा धारी भगवान अवतरित हुए।।और फिर मां ने उन्हें बालक बनाया और रुदन होते हुए पूरी अयोध्या और त्रिभुवन को आज कृष्ण जन्म उत्सव,जन्माष्टमी के दिन,पंडाल में से पूरे त्रिभुवन को राम जन्म की बधाईयों का गान करते हुए सभी को राम जन्म और कृष्ण जन्म की बधाई देते हुए आज की कथा को विराम दिया गया।।

== समाप्त ==

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