
अहमदाबाद, गुजरात | 15 जून 2026 | खेतीका फाउंडेशनऔर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ अहमदाबाद (आईआईएम-ए) ने क्लीन फूड इंडिया 2030 अभियान के लिए एक मैमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर दस्तखत किए हैं। इस एमओयू का उद्देश्य शुद्ध खाने को बढ़ावा देना, किसानों को सशक्त बनाना और भारत में खाने के क्षेत्र में पारदर्शिता लाना है।खेतीका फाउंडेशनअपने मिशन के लिए समर्पित एक नॉट-फॉर-प्रॉफिट संगठन है, जो भारत के सबसे बड़े क्लीन फूड ब्रांड्स में से एक, खेतीका के फाउंडर्स ने शुरू किया है।
खेतीका फाउंडेशनऔर आईआईएम-ए कीयह पार्टनरशिप देश में शुद्ध और सुरक्षित खाना हर भारतीय तक पहुँचाने की दिशा में पहला कदम है। यह जलवायु के लिए सस्टेनेबल और पारदर्शी कृषि को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
इस पहल का उद्देश्य भारत के फूड सेक्टर की महत्वपूर्ण चुनौतियों को हल करना है। इनमें खाने में मिलावट, खाने की बहुत ज्यादा प्रोसेसिंग, ग्राहकों का कम होता विश्वास और सप्लाई चेन की कम ट्रेसिएबिलिटी जैसी चुनौतियां शामिल हैं। यह एक दीर्घकालिक और प्रमाण पर आधारित सहयोग होगा। इस पार्टनरशिप में फार्म-टू-प्लेट ट्रेसिएबिलिटी और किसानों की क्षमता को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। सस्टेनेबल कृषि विधियों को बढ़ावा दिया जाएगा और स्वच्छ खाने के लिए किसान नेटवर्क एवं लोगों की मदद से व्यापक मॉडलों का विकास किया जाएगा।
इस सहयोग के अंतर्गत एक बड़ी पहल इंडिया क्लीन फूड समिट 2026 की शुरुआत है, जो नवंबर 2026 में आयोजित होगी। इस समिट में पॉलिसी मेकर, रिसर्चर, औद्योगिक लीडर, एंटरप्रेन्योर, किसान और ग्राहकों के समर्थक हिस्सा लेंगे। इसका मकसद भारत में शुद्ध खाने के लिए जागरुकता, सहयोग और संस्थागत सहभागिता को बढ़ावा देना है।
इस पार्टनरशिप के अंतर्गत खाने के परिवेश में प्रणालीगत परिवर्तन लाने के लिए रिसर्च एवं नॉलेज क्रिएशन में भी मदद की जाएगी। एकेडेमिया, रिसर्चर, पॉलिसीमेकर्स और इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स को एक मंच प्रदान किया जाएगा, जो उन्हें व्यावहारिक समाधान और पॉलिसी पर सिफारिश के लिए मिलकर काम करने का अवसर देगा।
इस सहयोग के अंतर्गत ट्रेसिएबल और किसान पर केंद्रित फूड सिस्टम्स के निर्माण में खेतीका फाउंडेशन की जमीनी विशेषज्ञता और रिसर्च, पब्लिक पॉलिसी, बिहैवोरियल साईंस एवं मैनेजमेंट में आईआईएमए की एकेडेमिक लीडरशिप का मेल होगा।
डॉ. पृथ्वी सिंह, को-फाउंडर एवं सीईओ, खेतिका ने कहा, ‘‘शुद्ध खाना उपलब्ध कराने की चुनौतियों को कोई अकेला हितधारक हल नहीं कर सकता है। इसके लिए सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयास की जरूरत है। आईआईएम अहमदाबाद के साथ हमारी साझेदारी एक ऐसा फूड सिस्टम बनाने की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है, जो ईमानदार हो, ट्रेस किया जा सके और किसानों के लिए निष्पक्ष हो। यह सिस्टम भारत में ग्राहकों का विश्वास स्थापित करेगा। हमारा मानना है कि स्वच्छ खाना कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्यता होनी चाहिए।’’
विश्व में क्लीन-लेबल फूड मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। इसका कारण है कि सेहत, स्वास्थ्य और खाने की पारदर्शिता को लेकर ग्राहकों में जागरुकता आरही है। औद्योगिक आँकड़ों के मुताबिक, यह बाजार साल 2024 में 54.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था, जो 2033 तक बढ़कर 109.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।
प्रो. रंजन कुमार घोष, आईआईएम अहमदाबाद ने कहा, ‘‘खाने-पीने की चीजों में मिलावट आज भारत के सबसे बड़े जोखिमों में से एक है। इससे पोषण और स्वास्थ्य पर बुरा असर होता है, जिससे ग्राहकों का विश्वास कम होता है। लेकिन फिर भी इस समस्या पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। क्लीन फूड इंडिया 2030 के माध्यम से हम गहन रिसर्च, हितधारकों के सहयोग और व्यावहारिक समाधानों को आपस में मिला रहे हैं। इससे एक पारदर्शी, ट्रेसिएबल और ग्राहक-केंद्रित फूड ईकोसिस्टम का निर्माण होगा।’’
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