
हमारी परंपरा में चार का मत आखिरी माना जाता है:साधुमत,लोकमत,राजमत और वेदमत।।
इस जगत में परमात्मा के बाद यदि कोई बलवत्तर ताकतवर है तो वह विचार है।।
आज हर क्षेत्र में संवाद की जरूरत है।।
सुनु जननि सोइ सुतु बडभागी।
जो पितु मातु बचन अनुरागी।।
तनय मातु पितु तोषनिहारा।
दुर्लभ जननि सकल संसारा।।
इन पंक्तियों के गान के साथ महाराष्ट्र के यवतमाल से मोरारिबापु ने नव दिवसीय रामकथा का मंगल आरंभ किया।।
कथा के मनोरथी डॉ.विजय दर्डा,डॉ.राजेन्द्र दर्डा और दर्डा परिवार है।।
ये विदर्भ क्षेत्र का विशेष महत्व भी है।।रामायण में ये स्थान का उल्लेख मिलता है।।यवतमाल जिल्ले के रावेरी में मॉं सिता का मंदिर है।।
सिताजी के दूसरी बार के वनवास के दरमियान माता जानकी ने वाल्मिकी रिषी के आश्रम में दो पुत्र लव और कुश को जन्म दिया वहां माता सिता का मंदिर है।।
कथा के आरंभ पर जैनाचार्य लोकेश मुनि जी महाराज,मनोरथी परिवार और स्थानिक प्रशासन एवं राजकीय लोगों की बहुत बड़ी उपस्थिति में दीप प्रागट्य और मनोरथी परिवार की ओर से विजय बाबू ने अपना स्वागत भाव भी प्रस्तुत किया।।
लोकेश मुनि महाराज ने भी आशीर्वचन कहे।।
मंगल मूर्ति गणेश जी की अनंत चतुर्दशी का पवित्र दिन,मंगल मूर्ति हनुमान जी की कृपा से मंगल मूर्ति भगवान राम की कथा का आरंभ कर रहे हैं।
महाराष्ट्र की बहुत मूल्यवान चेतनाओं की चेतनाओं से भरी यह भूमि को प्रणाम करते हुए बापू ने कहा कि यहां समर्थ गुरु रामदास जी,छत्रपति शिवाजी महाराज,ज्ञानेश्वर,तुकाराम,एकनाथ नामदेव,बहुत संतो, विद्वानो,संगीतज्ञो, कीर्तनचार्यों,विनोबा जी की भूमि,वारकरि संप्रदाय की भूमि,अनेक परम चेतनाओं से भरी यह भूमि को बार-बार प्रणाम करने का मन होता है।।
बापू ने बताया कि अभी ही लोकेश मुनि जी ने बताया की 17 से 25 जनवरी में दिल्ली में मानस सनातन धर्म पर कथा करेंगे।।
कल से पितृपक्ष शुरू हो रहा है तो यह कथा के विषय को भी उसी से जोड़ते हुए बापू ने कहा कि यहां जो दो पंक्ति ली है वह अयोध्या कांड से ली है हमारी परंपरा में चार का मत आखिरी माना जाता है साधुमत,लोकमत,राजमत और वेदमत।।
अयोध्या कांड में राम के मुख से यह पंक्ति आई माता-पिता के वचन को प्रेम करने वाला पुत्र बड़भागी है,जो अपने माता-पिता को संतोष भी देता है।।
पांडुरंग दादा ने कहा कि इस जगत में परमात्मा के बाद यदि कोई बलवत्तर ताकतवर है तो वह विचार है।। विचार असुर को सुर बना सकता है और सुर को असुर भी बन सकता है।।
यहां के मनोरथी परिवार विजय भाई को कहा कि आप अपने अखबार के द्वारा लोकमत को वाचा दे रहे हैं।।
राम राज्य पांचवीं पीढ़ी में आया।पितृ पक्ष में दिलीप,रघु,अज,दशरथ बाद में राम जी आए।
यह कथा में माताओं पीताओं को स्मरण करेंगे छत्रपति शिवाजी ने समर्थ गुरु रामदास जी को पूछे बिना कोई निर्णय नहीं किया।।
सबसे पहले हमारे आदि माता-पिता शंकर पार्वती है फिर स्वयंभू मनु और शतरूपा जिसे हम मनुज मनुष्य आए हैं।। राजा सत्य केतु-जो प्रताप भानु के पिता है। दशरथ और कौशल्या,जनक और सुनयना, जटायु,बाद में वाली और तारा जो वानर कूल के माता-पिता है। रावण और मंदोदरी असुर कूल में आए।।
और हमारे सबके माता-पिता राम और सीता और पवन देव और अंजना माता जो हनुमान जी के माता-पिता है।। सबका हम स्मरण करेंगे और संवाद करेंगे।।
आज हर क्षेत्र में संवाद की जरूरत है।।
फिर ग्रंथ महत्व, रामचरितमानस की रचना, सात कांड,सात मंत्र और अलग-अलग वंदनाओं के बाद गुरु वंदना और आखिर में हनुमंत वंदना के बाद आज की कथा को विराम दिया

