
आगस्त्य मुनि आश्रम में हुआ रामकथा का आयोजन: सत्य, प्रेम और करुणा का संदेश हुआ प्रतिध्वनित
सतना, मध्यप्रदेश । 26th OCTOBER 2025: भगवान श्रीराम के पदचिह्नों पर चल रही प्रसिद्द आध्यात्मिक गुरु और कथावाचक पूज्य मोरारी बापू की ऐतिहासिक रामयात्रा आज सतना पहुँची। 25 अक्टूबर को चित्रकूट से आरंभ हुई यह यात्रा 26 अक्टूबर को सतना स्थित आगस्त्य मुनि आश्रममें पहुँची, जहाँ पूज्य बापू ने रामकथा का वाचन किया और भक्तों को धर्म, प्रेम और करुणा का संदेश दिया।
त्रेतायुग में वर्तमान चित्रकूट (उत्तरप्रदेश-मध्यप्रदेश सीमा) और सतना (मध्यप्रदेश) का क्षेत्र दंडकारण्य–चित्रकूट वन क्षेत्र का हिस्सा था। उस समय कोई राजनीतिक सीमाएँ नहीं थीं। भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने अपने वनवास के लगभग साढ़े ग्यारह वर्ष इसी क्षेत्र में व्यतीत किए थे, जहाँ से आगे लंका की ओर और फिर पुनः अयोध्या की ओर प्रस्थान हुआ था।
मोरारी बापू की यह ग्यारह दिवसीय रामयात्रा भारत और श्रीलंका के नौ पवित्र स्थलों को जोड़ते हुए लगभग 8,000 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। 411 श्रद्धालु इस यात्रा में 22 कोच की विशेष ट्रेन से बापू के साथ यात्रा कर रहे हैं। रामेश्वरम से कोलंबो और वहां से अयोध्या तक की यात्रा वायु मार्ग से संपन्न होगी। प्रत्येक पड़ाव पर रामकथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा स्थलों में पंचवटी, शबरी आश्रम, ऋषिमुख पर्वत, पर्वर्शन पर्वत, रामेश्वरम, कोलंबो और अयोध्या शामिल हैं।
सतना में भक्तों के लिए विशाल पंडालों की व्यवस्था की गई, जहाँ देश-विदेश से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कथा का श्रवण किया। बापू की परंपरा के अनुसार, आश्रम परिसर में भंडारा का आयोजन किया गया, जहाँ सभी के लिए निशुल्क भोजन प्रसाद की व्यवस्था रही।
इस भव्य आध्यात्मिक यात्रा का आयोजन संतकृपा सनातन संस्थान द्वारा श्री मदन पालीवाल के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। यह यात्रा केवल भगवान श्रीराम के वनगमन मार्ग का पुनः अनुसरण नहीं, बल्कि सत्य, प्रेम, और करुणा जैसे सनातन मूल्यों के प्रचार और मानवीय एकता का उत्सव है। यह मोरारी बापू की दूसरी ऐतिहासिक रामयात्रा है। वर्ष 2021 में उन्होंने पहली यात्रा अयोध्या से चित्रकूट और नंदीग्राम तक की थी।
उल्लेखनीय है की मोरारी बापू रामकथा के लिए पैसे नहीं लेते हैं।कथा का श्रवण और परोसा जाने वाला प्रसाद पूरी तरह से नि:शुल्क होता है, और कथा का सम्पूर्ण आयोजन सेवा और समर्पण की भावना से किया जाता है।
यह यात्रा सत्य, प्रेम और करुणा की यात्रा है और इसका ध्येय श्रीराम चरितमानस के प्रकाश को प्रसारित करने और मानवता के सन्देश को सुदृढ़ बनाना है। हर कोई इस यात्रामें शामिल हो सकता है और कहीं भी इस कथा में जुड़ सकता है। यह रामयात्रा 4 नवम्बर को अयोध्या में संपन्न होगी, जहाँ श्रीराम कथा के साथ इस दिव्य अध्यात्मिक परिक्रमा का समापन होगा।

