
सतना, मध्य प्रदेश | 26 अक्टूबर 2025: पूज्य मोरारी बापू के नेतृत्व में चल रही अद्वितीय ‘राम यात्रा’ आज सतना पहुँची, जहाँ अगस्त्य मुनि आश्रम में श्रद्धालु बड़ी संख्या में एकत्र हुए और बापू की रामकथा श्रवण की। यह 11 दिवसीय यात्रा का दूसरा प्रमुख पड़ाव था, जिसकी शुरुआत 25 अक्टूबर को चित्रकूट से हुई थी।
अगस्त्य मुनि श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास काल के एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरित्र माने जाते हैं। उन्हें “दक्षिण दिशा के दिक्पाल,” “सागरपान करने वाले,” और “विंध्याचल को वश में करने वाले” के रूप में जाना जाता है। उन्होंने न केवल श्रीराम को दंडकवन जाने की दिशा बताई, बल्कि उनके वनवास को साधना से उद्देश्य की ओर मोड़ने में मार्गदर्शक भूमिका निभाई।
पूज्य बापू के साथ लगभग 411 श्रद्धालु, विशेष रूप से तैयार की गई 22 कोच की विशेष ट्रेन में इस पवित्र यात्रा में शामिल हैं, जो भारत और श्रीलंका में कुल 8,000 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। सतना का यह आयोजन नौ प्रमुख रामकथाओं की श्रृंखला का हिस्सा है, जिनका आयोजन पंचवटी, शबरी आश्रम, ऋषिमुख पर्वत, पर्वर्शन पर्वत, रामेश्वरम, कोलंबो और अयोध्या जैसे आध्यात्मिक स्थलों पर किया जा रहा है।
श्रद्धालुओं के लिए बड़े पंडालों की व्यवस्था की गई, जिससे सभी आयु वर्ग के लोग कथा का दर्शन और श्रवण कर सकें। परंपरा के अनुरूप, सभी आगंतुकों को भंडारा (प्रसाद स्वरूप सामूहिक भोजन) कराया गया, जो बापू के समावेश और सेवा के संदेश को दर्शाता है।
यह उल्लेखनीय है कि बापू कथा के लिए कोई शुल्क स्वीकार नहीं करते। कथा और भंडारा – दोनों ही पूर्णतः निःशुल्क आयोजित किए जाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान पूज्य मोरारी बापू ने कहा —
विरोध ही विराध है (विराध रामायण में श्रीराम के वनवास काल का एक राक्षस पात्र है)।श्रवण ही चिकित्सा है। अविरोध जीवन — अर्थात ऐसा जीवन जो किसी से शत्रुता नहीं रखता — वही सदा आनन्दमय होता है।”
श्रीराम, जिन्हें धर्म, आदर्श आचरण और करुणा का प्रतीक माना जाता है, आज भी मानवता के लिए शाश्वत प्रेरणा हैं। यह यात्रा केवल उनके भौतिक मार्ग का पुनर्स्मरण नहीं, बल्कि उनके आध्यात्मिक पथ का प्रतीक है — जो सिखाती है कि धर्म, त्याग और निःस्वार्थ सेवा ही जीवन का सच्चा आधार हैं।
यह यात्रा श्री मदन पालीवाल द्वारा स्थापित संतकृपा सनातन संस्थान के तत्वावधान में आयोजित की जा रही है, जो देश-विदेश से श्रद्धालुओं का स्वागत कर रही है। यह यात्रा सत्य, प्रेम और करुणा के सनातन मूल्यों पर आधारित है, और रामचरितमानस के प्रकाश को फैलाने व मानवता के आध्यात्मिक ताने-बाने को सुदृढ़ करने के बापू के उद्देश्य को आगे बढ़ा रही है।
यह यात्रा पूज्य बापू की दूसरी राम परिक्रमा है, जो श्रीराम के वनवास से संबंधित है। इससे पूर्व उन्होंने 2021 में अयोध्या से चित्रकूट और नंदिग्राम तक की राम यात्रा पूर्ण की थी।

