सत्य को कितना भी खींचे आप निर्वस्त्र कर सकते हैं नग्न नहीं कर सकते।।
दल से बचिए,ग्रुप ना बनाये,दल हमें दल-दल में फंसा देता है।।
निज बल को छोड़ दो।।
नाम जप करने वालें स्पर्धा छोड दें।।
इन लोगों के पास किताबें है,ग्रंथ नहीं है।।
ग्रंथ का अर्थ ग्रंथि से मुक्त कराए वह।।
ग्रंथ तो भागवत,महाभारत,गीता,वेद यह सदग्रंथ है।।
समय आ गया है सनातन के विरोधीओं के धर्म स्थान में पैर ही न रख्खें।।
इस धरा के आखिरी छोर पर,अर्जेंटीना के यूशुआया में चल रही रामकथा के दूसरे दिन के आरंभ में चैत्र नया साल और चैत्र नवरात्र की सबको शुभकामना देते हुए बापू ने विध विध प्रश्नों का समाधान करते हुए बताया कि आखरी अंतिम उपाय हरिनाम है।। मतलब राम,कृष्ण,शिव,हनुमान चालीसा की पंक्ति कुछ भी लो। गुरु को पर ब्रह्म के रूप में समझते हो तो गुरु का नाम भी जप कर सकते हो,लेकिन यह सहज हो तो ही करना।। और यदि गुरु का नाम जप करते हो तो किसी को बताना मत।।
बापू को गुजराती कवि,गझलकार नीतिन वडगामा की एक रचना जो 21 मार्च विश्व काव्य दिन पर मिली थी वह बापू ने खास तरीके से गाकर पेश की:
सकल अस्तित्वनुं सोने मढेलुं नाम छे साधु।
परमनो प्रेमथी भीनो पुनित पयगाम छे साधु।।
घडीभरमां ज ओगळशे बधोये थाक अंदरनो।
भटकतां जीवनो ए भीतरी विश्राम छे साधु।।
उतरो दर्शन करो मज्जन करी पान पण थोडुं।
सहज आवी मळेलुं एक तीरथधाम छे साधु।।
अडे ज्यां होठने बत्रीस कोठे थाय छे दीवा।
नजर सामे ज अमरतनो छलकतो जाम छे साधु।।
जरा य याद आवे ने करे छे साद सामेथी।
सतत साथे ज रहेतुं वतननुं गाम छे साधु।।
नथी कैं केद थातां कोइ कामनानां किल्लामां।
रहे छे जळकमळवत ने नर्या निष्काम छे साधु।।
धरे छे नाम नोखां ने फरे छे जूजवे रूपे।
तमारा श्याम छे साधु अमारा राम छे साधु।।
-नीतिन वडगामा
कल हमने हनुमान जी की वंदना की,अब सिता राम जी की वंदना करके गोस्वामी जी ने नाम महाराज प्रभुनाम की वंदना गायी है।।:
बंदउ राम नाम रघुवर को।
हेतु कृषानु भानु हिमकर को।।
बिधि हरि हर मय बेद प्रान सो।
अगुन अनुपम गुन निधान को।।
रामचरितमानस में ‘व’ कार शब्द बहुत मिलता है। शुरू में वर्ण से शुरू करके आखिरी शब्द मानवा: तक वह दिखता है।। क्योंकि तुलसी जी का ग्रंथ वेदांत का परम ग्रंथ,विज्ञान का परम ग्रंथ, वैराग्य, विश्वास,विहार,विनोद का भी परम ग्रंथ है।।
रामनाम महामंत्र है।। भगवान कृष्ण राधे राधे का जाप करते हैं तो राधे श्री कृष्ण का महामंत्र है।।
प्रेम रूपी सरोवर में कैसे उतरे?जैसे मीरॉं,राधा सागर है।राम भी सागर है। मानस सरोवर में, नाम सरोवर में डूबना है तो 5 वस्तुओं से बचना चाहिए: दल से बचिए। ग्रुप ना बनाये।।दल हमें दल-दल में फंसा देता है।।निज बल को छोड़ दो।।क्योंकी नाम भी वही है नामी भी वही है।। कोई भी परिस्थिति आए ना गिला ना शिकवा करें।। मन तुं शिद ने चिंता करें?कृष्ण ने करवुं होय ए करे!
कुसंग से दूर रहे।।अहंकार,कुसंग,अपात्र पर ज्यादा भरोसा,नेटवर्क से छल ये सब हमारे पतन के कारण है।।नाम जप करने वालें स्पर्धा छोड दें।।
एकमात्र,केवल नाम पर्याप्त है।।
कहो कहां लगि नाम बडाइ।
रामु न सकहि नाम गुन गाइ।।
नहि कलि करम न भगति बिबेकू।
रामनाम अवलंबन एकू।।
रामनाम मतलब शिव,कृष्ण,दुर्गा सब एक ही है।।
रामकथा की रचना पहले महादेव ने की,अपने मानस में रखी।।योग्य समय जानकर पार्वती को सुनाइ।।वहां से कथा कागभुशुंडीजी के पास आइ।।भुशुंडी ने गरुड को सुनाइ।।एकबार के कुंभ में याग्यवल्क्य ने भरद्वाज को सुनाइ।।शुक्ल क्षेत्र में तुलसी ने अपने गुरु के पास बार बार सुनी फिर संवत १६३१ में रामनवमी के दिन अयोध्या में प्रकाशन हुआ।।मानस मानसरोवर का रुपक,चार घाट की बात भी कही गइ।।
भरद्वाज ने संशय किया की अविनासी शिव निरंतर रामनाम का जप कर रहे है वो राम तत्व क्या है?
शिव के पास न जप,तप,पूजा पाठ,योग की जरुरत नहि।केवल तेरे शरण में आकर प्रणाम करता कहेना ही पर्याप्त है।।
ईश्वर शब्द ज्यादातर शिव के साथ जुड़ा है।।शिव रामनाम का महामंत्र का निरंतर जप करते हैं।।
लेकिन कुछ ना समझ,समाज में भ्रांति फैलाने वाले लोग ऐसा निवेदन करते हैं और लेखन भी करते हैं कि शंकर भगवान कैलाश में बैठकर राम और कृष्ण का नाम नहीं लेकिन हमारा जो है… उनका नाम लेते थे।।तो शिव किसका नाम लेते थे?हद है! इन लोगों ने गुजराती में कहे तो नाथ अने मोरडो ज काढी नाख्या!! पाखंड चल रहा है।।
श्रीमन महाप्रभु जी ने कहा कलयुग में पाखंड इतना फैलेगा और यह सच होने जा रहा है।।
कुछ भी करें इन लोगों के पास किताबें है, ग्रंथ नहीं है।। ग्रंथ का अर्थ ग्रंथि से मुक्त कराए वह।। ग्रंथ तो भागवत,महाभारत,गीता, वेद यह सदग्रंथ है।। इनके पास छोटी बड़ी किताबें हैं।।
वो लिखते हैं शिवजी सेवा करते थे! कलयुग का प्रभाव है और प्रचुर मात्रा में यह सब कुछ चल रहा है।।
जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने एक बार कहा था कि सनातन धर्म का खंडन करते हैं ऐसे लोगों के देवस्थान में पैर भी मत रखना! हाथी पागल हो जाए और कुचल दे तो हाथी के पैरों में कुचल जाना मगर उनके धर्म स्थान में पैर मत रखना।। सनातन धर्म के विरुद्ध में है उनके लिये ऐसा संकल्प करने का फिर समय आया है।।( तालियां बजती है और बापू ने कहा कि)ताली लगाकर बात को उड़ा मत देना। मुझ पर कितना प्रहार होता है मैं जानता हूं।। सब का कर्तव्य है। बड़े से बड़े दंडवत करने योग्य है वहां से लेकर हमारे जैसे तुच्छ लोगों तक का यह कर्तव्य है ऐसी सभाओं में मनोरंजन करने के लिए भी नहीं जाना चाहिए।।
शंकर भगवान उनका, जो अपना कह रहे हैं,उनका नाम लेते थे?! एक वीडियो चल रहा है:यदा यदा ही धर्मस्य…. कौन बोला?वीडियो में सब हंसते हुए कहते हमारा गुरु बोला!! सत्य सत्य रहेगा।। लेकिन तकलीफ होती है वह लोग कान देकर मुझे सुनते हैं इस तरह वह मेरे श्रोता है! लेकिन आप सब सावधान रहें।।
राम,कृष्ण और शिव उनके लिए तुच्छ है।।
सत्य को कितना भी खींचे आप निर्वस्त्र कर सकते हैं नग्न नहीं कर सकते।। सनातन धर्म को निर्वस्त्र करने की कोशिश और पाखंड भरपूर मात्रा में चल रहे हैं लेकिन कोई माइ का लाल नग्न नहीं कर पाएगा क्योंकि हजार हाथ वाला कृष्ण वस्त्र देने वाला हमारे साथ है।।

