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सनातन धर्म कथा का विराम,५ फरवरी से अगली कथा सनातन धर्मपुरुष राजाधिराज भगवान कृष्ण की नगरी द्वारिका से गुंजेगी।।

अध्यात्म का मूल स्रोत प्रकृति है और यही रामकथा का सार है:रामनाथ कोविंद जी

बापू के आभार और धन्यवाद के लिए शब्दकोश में कोई शब्द नहीं मिलता है लेकिन राम आश है, विश्वास है,परमात्मा है,ब्रह्म है:जैनाचार्य लोकेश मुनि सनातनी।।

सत्य महादेव का त्रिपुंड मानता हूं।।

त्रिपुंड में तीन रेखा होती है:सत्य का स्विकार,दूसरी रेखा सत्य का विचार और तीसरी रेखा सत्य का आचार है।।

सत्य अभंग है,खंडित सत्य काम का नहीं।।

सुनो! गुनो!और बाद में चुनो!:बापु

धर्म कट्टर नहीं लेकिन टट्टार बनकर खड़ा रहना चाहिए।।

 

धरमु न दूसर न सत्य समाना।

आगम निगम पुरान बखाना।।

-अयोध्या कॉंड दोहा-९५

रामहि केवल प्रेम पिआरा।

जानिलेउ जो जाननिहारा।।

-अयोध्या कॉंड दोहा-१३७

जेहिबिधि प्रभु प्रसन्न मन होइ।

करुणा सागर किजिअसोइ।।

-अयोध्या कॉंड दोहा-२६९

परम धर्म श्रुति बिदित अहिंसा।

पर निंदा सम अघ न गरिसा।।

-उत्तर कॉंड दोहा-१२१

दिल्ही के मल्टीपर्पझहॉल भारत मंडपम् से प्रवाहित रामकथा के नवमे आखिरी दिन इन बीज पंक्तियों का गायन कर के कथा को पूर्णाहूति की और ले चलते बापु ने उपसंहारक बातें कहते हुए मुनि जी का संकलन,मेनेजमेन्ट आयोजन,सभी लोगों की आहूतियां और वित्जा सेवा प्रदान करनेवाले और बिलकूल मौन अलिप्त रहकर कथा मनोरथीबाबुजी माताजी को साधुवाद और प्रसन्नता व्यक्त करते हुए

पूरे आयोजन पर संतोष व्यक्त किया।

कथा के आरंभ में विश्व शांति मिशन ट्रस्ट और अहिंसा विश्व भारती केंद्र के अध्यक्ष और रामकथा आयोजन समिति के अध्यक्ष पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी अपनी पत्नी सरिता बहन कोविंद जी के साथ उपस्थित रहे।।और कोविंद जी ने अपना विद्वता पूर्ण प्रवचन करते हुए कहा कि अध्यात्म का मूल स्रोत प्रकृति है और यही रामकथा का सार है।। सुख में शांति में सफल सहज जीवन जीना है तो प्रकृति में आगे बढ़ना चाहिए।।प्रकृति में सभी गुण सत्य करुणा प्रेम अहिंसा हमें मिलते हैं।।बापू के शब्द केवल कथा नहीं होती जीवन दर्शन होता है।। उनके उद्गारों में समस्त मानव जाति के लिए मार्गदर्शन होता है।।लेकिन बापू के लिए कुछ कहना सूरज को दीपक दिखाने जैसी बात है। हम सब लोग जीवन की अनंत यात्रा पर है।वर्तमान एक पड़ाव है।।निरंतर दूसरों से जीवन से तुलना हमें दुख और चिंता की ओर ले जाती है।।सहजता लुप्त हो जा रही है लेकिन प्रकृति सिखाती है कि संग्रह में शांति नहीं है,छोड़ना चाहिए।। प्रकृति के हर रूप में भगवान राम को वनवास के दरमियान कुछ न कुछ गुण सिखाए।।

फिर आचार्य लोकेश मुनि जी,समग्र आयोजन के केंद्र बिंदु लोकेश मुनि जी सनातनी ने भी कहा कि छोटी सी संस्था के लिए मेरे छोटे से विचार के लिए बापू से इतनी बड़ी करुणा मिली और हमें कथा मिली।।बापू के आभार और धन्यवाद के लिए शब्दकोश में कोई शब्द नहीं मिलता है लेकिन समाप्ति के वक्त इतना कहना चाहूंगा राम आश है, विश्वास है,परमात्मा है, ब्रह्म है।।

बापू की १००८वीं कथा कब हो लेकिन बापू खुद तय करें कि कौन सी कथा फिर हमें मिलेगी वह मांग भी आज भी दोहराते हुए मुनिश्री ने श्रीमती सरिता कोविंद जी का मोमेंटो देकर सम्मान किया।।

बापू ने कहा आयोजन के केंद्र बिंदु लोकेश मुनि जी और रामकथा कमिटी के अध्यक्ष पूर्व राष्ट्रपति जी जो सबल है,सरल है और सजल भी है ऐसे कोविंद जी और उनकी धर्मपत्नी को प्रणाम करते हुए बताया श्रीमद् भागवत में युधिष्ठिर ने नारद जी से जिज्ञासा की। सनातन के स्वभाव के बारे में बताओ तब सनातन के ३० लक्षण,स्वभाव नारद ने बताए थे बापू ने कहा:सुनो! गुनो!और बाद में चुनो! वहां नारद कहते हैं सत्य सनातन धर्म है।।सत्य महादेव का त्रिपुंड मानता हूं।।औरत्रिपुंड में तीन रेखा होती है।एकहै:सत्य का स्विकार,दूसरी रेखा सत्य का विचार और तीसरी रेखा सत्य का आचार है।। सत्य अभंग है,खंडित सत्य काम का नहीं।।सत्य के साथ दया,तप, शौर्य,धैर्य,तितिक्षा,अहिंसा,ब्रह्मचर्य, त्याग, स्वाध्याय,सरलता,संतोष,समदृष्टि,सेवा,अन्न का सम विभाग,श्रवण आदि ३० लक्षण है दिखाएं है।।

बापू ने कहा कि धर्म के पंच शील है:धर्म गतिशील होना चाहिए।गर्वशील होना चाहिए,गुरु शील, गोप्यशील और गुणशील भी होना चाहिए।।

धर्म कट्टर नहीं लेकिन टट्टार बनकर खड़ा रहना चाहिए।। धर्म रूपी फल का रस वैराग्य है।अर्थ रूपी फल का रस शुभ कार्य में दान देना।काम रूपी फल का रस रति है और मोक्ष रूपी फल का रस सबको सुख मिलने की कामना है।।

भुशुंडि रामायण के न्याय से अति संक्षिप्त में पूरी रामकथा का दर्शन करवा के राम राज्याभिषेक तक की कथा का गान करके तीन घाटों पर कथा विराम लेती है। तब रामकथा का सार तीन सूत्रों में तुलसी जी ने दिया।।तुलसी जी कहते हैं राम का स्मरण सत्य है।।राम को गाओ, जो प्रेम है और निरंतर परमात्मा के गुण को श्रवण करो वह करुणा है।। सत्य को स्मरो,प्रेम को गाओ और करुणा बहाओ!इस अनुष्ठान का प्रेम प्रसाद सुफल सनातन पुरुषों के चरणों में अर्पण करके पूरी रामकथा पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बापू ने कथा को विराम दिया।।

अगली कथा भगवान राज राजेश्वर कृष्ण जी की नगरी द्वारिका में ५ से १३ फरवरी के बीच बहेगी।।ये कथा का जीवंत प्रसारण नियमित रुप से आस्था टीवी चैनल और चित्रकूटधामतलगाजरडायु-ट्युब चैनल के माध्यम से नियत समय पर होगा

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