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प्रेमभूमि बरसाना से हुआ कथा भीगा समापन,अब आदि कवि नरसिंह महेता की रासभूमि गोपनाथ (तलाजा-गुजरात) से,९६५ वीं कथा,४ ऑक्टोबर से बरसेगी।।

बाबा का गौ संकल्प और रूद्र हनुमान जी का प्रेम प्रसाद,पुण्य प्रताप से इस कथा का प्रमाण और परिणाम सामने है।।

इस कथा के माध्यम से गौशाला के लिये 16 करोड़ रूपया की राशि भी इकट्ठी हुई है।।

राम नहीं हो भवन,वन बन जाता है।।

गुरु का मुख गाय का मुख,वेद का मुख है, इसका मैं बहुत अनुभव कर रहा हूं।।

“मैं रामकथा नहीं गुरुगाथा गा रहा हुं,राम कथा ईष्ट और परम प्रिय माध्यम है।”

खजाने अंदर है लेकिन चाबी का जुड़ा गुरु के पास हमारी मां के पास है।।

बुद्धपुरुष और आचार्य मोक्ष,मुक्ति स्वर्ग नहीं जाना चाहते श्रोता के दिल तक पहुंचना चाहते हैं।।

गाय के दो कान श्रवण और शरणागती है।।

शिव का नाम अन्याश्रय नहीं देगा।क्योंकि कृष्ण के लिए शिव अनन्य है।।

रामचरितमानस लवलेश से पूर्ण पूर्णेश तक की यात्रा  है।।

जेहिंजेहिंदेस धेनु द्विज पावहि।

नगर गाऊँ पुरआगिलगावहि!!

-(बालकाण्ड-182/6)

धेनु रूप धरिह्रदयँबिचारी।

गई तहाँ जहाँ सुर मुनी झारी।।

-(बालकाण्ड-183/7)

इन्ही बीज पंक्तियों के साथ आज कथा के विराम दिन पर उपसंहारक बातें एवं शेष कथा का आरंभ करते हुए बापु ने ऊंची अटारी वाली श्री राधे जूं के चरणों में एवं ब्रजमंडल की रसमयीचेतनाओं को प्रणाम करते हुए संक्षिप्त रूप में कथा को प्रस्तुत करने से पहले यह भी कहा कि बाबा का गौ संकल्प और रूद्र हनुमान जी का प्रेम प्रसाद,पुण्य प्रताप से इस कथा का हनुमान संरक्षक था तो यह कथा का प्रमाण और परिणाम सामने है।।

कथा के पूर्व,बहुत साल पहले १९७५ में,बाबा जी रमेश बाबा ने जो भागवत कथा की थी उनका हिंदी रूपांतर हुआ था और अब पटवर्धन साहब ने मराठी रूपांतरण की किताब बनाई। वह व्यास पीठ और ब्रह्मार्पण की गई।।

बाबा जी का यह भाव रहा कि हर साल यहां व्रज मंडल में  बापू की कथा होती रहे।।बाबा जी बहुत खुश है।।

इस कथा के माध्यम से 16 करोड़ रूपया की राशि भी इकट्ठी हुई है।।

कल सायंकाल कुसुम सरोवर में मनोरथी परिवार के द्वारा छप्पन भोग का दिव्य दर्शन बहुत प्रसन्न कर गया वहां ठाकुर जी भी विशेष प्रसन्न नजर आये ये कहते हुए बापू ने कहा हवेली संगीत और वल्लभकुल के आचार्य महाराज श्री भी मौजूद थे।। अथर्ववेद दिए गौसूक्त के पूरे मंत्र नहीं ले पाए लेकिन केंद्रीय विचार यही रहा आज का मंत्र:

 

प्रजावतीःसूयवसेरुशन्तीःशुद्धा

अपःसुप्रपाणेपिबन्तीः।

मा व स्तेनईशतमाघशंसः

परि वो रुद्रस्यहेतिर्वृणक्तु।।

वेद भगवान में ऋषि कहते हैं: है गांवो! आप हमारे आंगन में बहुत बछड़े को जन्म दो! गौ वंश की वृद्धि करो।।हमारे आंगन में अच्छा चारा डालेंगे, शुद्ध जल पिए।।रुद्र से प्रार्थना करेंगे कि आपकी इस जीवन में कोई विक्षेप ना करें। कोई कत्ल ना करें।।रूद्र आपकी रक्षा करें।।

कौशल्या आदि माता को भी गौ कहा है और राम लक्ष्मण जानकी को बछड़े कह दिए हैं।।

राम नहीं हो भवन वन बन जाता है।।

बापू ने कहा आपके घर में खानदान बेटी बहू बनकर आए उसे बछड़ी समझना।। हम आपको प्लास्टिक कागज कचरा नहीं खिलाएंगे ऐसा हम गौ माता को कहेंगे।यह भी कहा कि मैं गुरुमुखी बोलता हूं और ग्रंथ में से वही निकलता है! बापु ने वो प्रमाण भी प्रस्तुत किया।।

गुरु का मुख गाय का मुख,वेद का मुख है इसका मैं बहुत अनुभव कर रहा हूं।।मैं रामकथा नहीं गुरुगाथा गा रहा हुं,राम कथा ईष्ट और परम प्रिय माध्यम है। जैसे-जैसे गुरु निष्ठ हो जाओगे वैसे बिना खोजे आप में से एक-एक वस्तु निकलती जाएगी।।

वैराग्य बाहर से आए ऐसी अपेक्षा न रखें।। वैराग्य यदि बाहर से आए तो हमने बहुत शब जलाए हैं। हमने परिवार जनों को लोगों को बहुत जलाया है, दुखी किया है ऐसा लगता है।।

ओशो ने एक अच्छी कथा कही थी कि यूनान का एक साधु अल्लड फकीर और सर्व प्रकार से संपन्न था।लेकिन धीरे-धीरे अंदर झांकते हुए, झांकने से लगा कि मैं बहुत सुप्रसिद्ध हूं लेकिन मुझ में वैराग्य नहीं जगता।। फिर अंदर से वैराग्य का एक कूंपलफूटा।।सब कुछ छोडकर एक नोकर को लेकर वन में चला गया।।क्योंकि उसे खिलाने पिलाने के लिए एक नौकर रखा था।।दूसरीकूंपन तब फूटा जब नौकर यूनान के फकीर को छोड़कर चला गया! तो उसे लगा की नौकर मेरे बिना रह सकता है तो मैं भी नौकर के बिना रहूं।।और एक कांसा- पात्र में भिक्षा लेने लगा।। एक दिन नदी में पानी पीने जाता है तो कुत्ता बिना पात्र पानी पीता है और फकीर ने अपना पात्र भी फेंक दिया।।

खजाने अंदर है लेकिन चाबी का जुड़ा गुरु के पास हमारी मां के पास है।।

बुद्धपुरुष और आचार्य मोक्ष,मुक्ति स्वर्ग नहीं जाना चाहते श्रोता के दिल तक पहुंचना चाहते हैं।।

युवा नाचना चाहते हैं लेकिन नचाने वाले नहीं है, हम रामायण और ऐसी शास्त्रों की कुछ बातें उनसे जोड़े तो युवा उन पर नाच सकते हैं वह बापू ने बताया।। गाय के दो कान:श्रवण और शरणागतीहै।।गाय बछड़े की आवाज सुनती है तब कान खड़े हो जाते हैं।विभीषण ने राम के बारे में सुना फिर शरणागति के लिए गया।। गौ माता का पूंछ पूण्य पूंछ है, प्रेम पूंछ है,जो गाय की मर्यादा को ढांकती है।। गायों के चार चरण चार धाम ह।। गाय जहां खड़ी रहे वहां चारधाम-जगन्नाथ,द्वारिका,रामेश्वर और बद्री केदार चार धाम बन जाते हैं।। गाय के चार आंचल धर्म, अर्थ,काम और मोक्ष का प्रतीक है।।अफ्रीका जैसे देशों में गायें अर्थ प्रधान है।।हमारी कामना तो पूरी करती है लेकिन गाय उनसे भी ज्यादा सभी कामनाओं से मुक्त करती है।।

इसलिए दो आंख,जीह्वा,दो शिंग,दो कर्ण,पूंछ,चार चरण और चार आंचल मिलकर १६ गुण संपन्न हमारी गौ माता है ।।

शिव का नाम अन्याश्रय नहीं देगा।क्योंकि कृष्ण के लिए शिव अनन्य है।। रुद्रो में शिव और शस्त्रधारियों में राम में हूं ऐसा कृष्ण कहते हैं। कृष्ण के लिए राम भी अनन्य है इसलिए अन्याश्रय नहीं होता है।।

सर्व खलुइदं ब्रह्म।

फिर रामकथा के सभी प्रसंग, पुष्पवाटिका,धनुष्य भंग,विवाह प्रसंग का गान करते हुए राम वनवास दशरथ का प्राण त्याग और चित्रकूट का प्रसंग में भरत को मिलते हुए राम के कंधे से पट, निषंग, धनुष्य,तीर-गिरते हैं।।

इसका मतलब कहते हुए बापू ने बताया भरत जैसा साधु ईश्वर के कंधे का बोझ भी गिरा देता है।

सीता हरण के बाद हनुमान जी का लंका दहन और भीषण युद्ध के बाद राम राज्याभिषेक तक की कथा संक्षिप्त रूप से कहते हुए बापू ने कहा कि तुलसी कहते हैं लवलेश कृपा से पूर्ण विश्राम पाया। लवलेश से पूर्ण पूर्णेश तक की यात्रा रामचरितमानस है।।

राम कथा का शुभ फल दशहरा की बधाई देते हुए बापू ने पूरे विश्व की गौ माता के चरण में अर्पण किया और राम कथा को विराम दिया गया।।

अगली-क्रम में ९६५ वीं रामकथा गुजराती भाषा के आदि कवि नरसिंह महेता जहां पास में तलाजा में जन्मे और सदेह कृष्ण की रासलीला देखने में जलती मशाल के साथ हाथ भी जल गया वो भूमि,जहां पांडवो ने अज्ञातवास में दरिया किनारे पर शिवजी के मंदिर का निर्माण किया वो गोपनाथ की भूमि से,४ ऑक्टोबर से १२ ऑक्टोबर के दरमियान गूंजेगी।।

ये कथा गुजराती में रहेगी और आस्था टीवी चैनल तथा चित्रकूटधामतलगाजरडायु-ट्युब के माध्यम से पहले दिन शऩिवार शाम ४ बजे से और शेष दिनों में सुबह ९:३० से १:३० तक जीवंत रुप से प्रसारित होगी।।

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