
परावाणी,वेदवाणी,संतवाणी,गुरुवाणी और लोकवाणी भी मातृपंचक है।।
ऊपर से आए वह नभवाणी है और भजनानंदी की नाभि से ऊपर उठ वह नाभिवाणी हमारी माता है।।
पांचो वाणी ने धरती को मां कह कर पुकारा है।।
वाणी सर्जन करती है।।
महाकाश से हो या घटाकाश से प्रगटे-वह पहली वाणी है।।
ओम सार्वत्रिक है,कोई भी धर्म ने ओम नाद का स्विकार किया है।।
गीता जयंति पर सब को बधाइ दी गइ।।
आज कथा के विराम के दिन एक विशेष प्रकल्प कथा के आरंभ में हुआ।सद्भावना वृद्धाश्रम के विजय भाई डोबरिया ने अपना शब्द भाव रखते हुए बताया कि 2045 की साल तक 150 करोड़ वृक्षों पूरे भारत को ग्रीन करने के लिए बोने का संकल्प किया है।। राजकोट में जो वृद्धाश्रम है वहां 5000 वृद्ध मावतर 1400 रूम में निवास करेंगे।।और 400 करोड रुपए की राशि से यह बनाया गया सद्भावना वृद्धाश्रम की पहली विंग जान्युआरी से शुरू हो रही है।।उन्होंने अनुरोध भी किया कि पूरे भारत में कहीं भी ऐसे वृद्ध,अशक्त, लाचार हो तो हमें कहना हम उनको अपने मां-बाप की तरह रखेंगे पराग भाई ने गदगद भाव से और आंखों में आंसू सहित बताया कि मेरे पिता श्री के अवसान होने के 13 साल हुए और बापू को मैं केवल 13 बार मिल चुका लेकिन ऐसा लगता है कि जैसे जन्मो जन्म का कोई रुणानु बंध हो।।
और साथ ही एक यह प्रकल्प हुआ कि पराग भाई के वहां काम करते आर्थिक बहुत छोटे आदमी जैसे दो व्यक्तियों को सवा-सवा करोड रुपए के दो फ्लेट की चाबी पराग भाई ने अपने पौत्र के हाथों और बापू के हस्तो रहने के लिए प्रदान की और पूरा पंडाल तालिया से गूंज उठा।।
पराग भाई ने यह भी बताया कि कोई भी सेवा हो तो मुझे याद करना बापू को जाने देने की कोई इच्छा नहीं हो रही।।
और आखिर में नम्र मुनि महाराज साहब ने वीडियो से पूरी कथा को आशीर्वचन प्रदान किये।।
तब मयना हिमवंतु अनंदे।
पुनि पुनि पारबति पद बंदे।।
-बालकॉंड दोहा-९९
पारबति भल अवसर जानी।
गइ संभु पहिं मातु भवानी।।
-बालकॉंड दोहा-१०७
इन बीज पंक्तियों का गायन कर के शेष कथा और उपसंहारक बातें करते हुए पूरे आयोजन पर सद्भावना वृध्धाश्रम और वृक्षों संकल्प लिये बैठी पूरी टीम,ट्रस्टी मंडल और कार्करों के साथ नम्रमुनि महाराज की आशीर्वादक छायां में बडा मनोरथ लेकर चले कथा के मुख्य मनोरथी परागभाइ शाह और परिवार की और अपनी प्रसन्नता और साधुवाद रखते हूए बापु ने खुशी व्यक्त की,बताया की आपने दो आदमी को रहने के लिये फ्लेट प्रदान किये मानवता के यग्य में ये बहूत बडी आहूति है।।
बापू ने बताया कि मानस वंदे मातरम नाद को पूरे भारत और विश्व के लिए व्यक्त किया गया। इसमें हम मातृ पंचक का संवाद कर रहे हैं।।
बापू ने कहा विज्ञान कहता है पहले यहां कुछ नहीं था और एक बहुत बड़ा नाद,धमाका,महा विस्फोट बिग बैंग हुआ।उनके गर्भ से बहुत कुछ निर्मित हुआ नासा ने इस वाणी को पकड़ी और मैंने भी वह रेकॉर्डिंग सुनी है।।वह वाणी हमारी माता है।। वाणी माता है इसलिए सरस्वती को हम पूजते हैं। गहराई से सुने तो इसमें प्रणव की आवाज ओम है।।जो आदि ध्वनि, नभवानी या आकाशवाणी हम इसे परावाणी कहेंगे।। ऊपर से आए वह नभ वाणी है और भजनानंदी की नाभि से ऊपर उठ वह नाभि वाणी हमारी माता है।।वाणी सर्जन करती है।। महाकाश से हो या घटाकाश से प्रगटी हो।। वह पहली वाणी है।। ओम सार्वत्रिक है।।कोई भी धर्म ने ओम नाद का स्विकार किया है।।
दूसरी वेदवाणी हमारी माता है।। चार वेद में सबसे पहले ऋग्वेद आया।। संतवाणी भी हमारी मां है।। कोई साधु-कबीर,नानक,मीरा,तुकाराम,ज्ञानेश्वर जैसे संतों की वाणी।।
चौथी गुरुवाणी- गुरु कहीं भी है लेकिन मन से हमारे पास निकट आता है।।पूरी सिख परंपरा में गुरु बानी आई है।।
लोकवाणी हमारी माता है।। वेद वाणी संस्कृत में है लेकिन हमारी देहाती बोली में,तलपदी भाषा में महावीर बुद्ध कबीर बोले हैं।।
पांचो वाणी ने धरती को मां कह कर पुकारा है।। और बाकी की शेष कथा संक्षिप्त रूप में संवाद करते हुए बापू ने आखिर में अयोध्या में राम का राजतिलक वशिष्ठ के हाथों से हुआ और राम राज्य के बाद गरुड़ के सात प्रश्न और चारों घाट से राम कथा को विराम दिया गया वो संवाद गान किया।।
कल गीता जयंति है तो सबको बधाइ दी गइ।।रामकथा का पूण्यफल,प्रेमफल-सुफल भारत माता के चरणों में अर्पण किया गया।।
अगली-९६८वीं रामकथा ओशो की स्मृति में ओशो जन्म महोत्सव पर जहां ओशो का जीवन शुरु हुआ था वो जबलपुर(म.प्र.) में सायन्स कॉलेज ग्राउन्ड,साउथ सिविल लाइन जबलपुर से ६ डीसेम्बर से शरु होगी।
कथा का नयमित प्रसारण नियत यमय पर आस्था टीवी चैनल एवं चित्रकूटधाम तलगाजरडा यु-ट्युब चैनल पर देखा जा सकता है।।

