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निंदा, इर्षा और दैष यह बिल्कुल लिटलरॉक है लेकिन यात्रा में बाधा बहुत करते हैं।।

निंदा वाचिक होती है,जुबान से होती है।।

इर्षा थोड़ी सूक्ष्म है, वह मन से होती है।।

द्वेष रोमरोम में होता है।।

विषम परिस्थिति में सही समय पर कथा हमारा मार्गदर्शन बनेगी।।

कथा अलार्म है, सही वक्त पर बजेगा।।

मानस ही मेरा मार्ग है:मोरारिबापु

दंतकथा नाशवंत होती है,संतकथा शाश्वत होती है

सभी मार्ग किसी एक में दिखे तो वह बुद्धपुरुष है

दक्षिण अमरीकी प्रांत लिटलरोक्स से चल रही रामकथा के तिसरे दिन पर श्रोताओं की ओर से बहुत जिज्ञासा आई थी।।एले से आए हुए एक श्रोता का प्रश्न था:हम मार्ग पर तो है, मार्गदर्शक भी है लेकिन हम इस मार्ग पर ठीक से चल नहीं पा रहे हैं। क्या बाधा है नहीं समझ सकते। हमारे मन की बात समझ कर हमारी यात्रा की बाधा दूर कीजिए।।

बापू ने कहा लिटलरॉक! कोई बाधा नहीं, छोटा सा पत्थर है।। तीन पत्थर है: निंदा, इर्षा और दैष यह बिल्कुल लिटलरॉक है।। लेकिन यात्रा में बाधा बहुत करते हैं।। हम जब खाना चबाते हैं तब कोई तिनका दांत में घुस जाए तो पूरे भोजन का आनंद बिगाड़ देता है।। छोटा सा कंकर या तो कांटा पैर में आ जाए तो यात्रा ठीक नहीं होती।आंख में छोटा सा कण हमारी दर्शन यात्रा का बाधक है।। हर एक बाधा बहुत लिटल है।।

रामेश्वर बापू हरियाणवी ने मार्गी शब्द की 21 व्याख्या लिखकर भेजी है।। निंदा वाचिक होती है, जुबान से होती है।। इर्षा थोड़ी सूक्ष्म है, वह मन से होती है और द्वेष रोमरोम में होता है।।

भगवान बुद्ध बैठे थे। बौधभिख्खु आया। बुद्ध के पास जाने के लिए तीन पहरे पास करना पड़ता था पहले रैवत से मुलाकात, फिर सारीपुत से मुलाकात करनी पड़ती थी।तीसरी मुलाकात आनंद से करनी पड़ती थी।।बौधभिख्खु ने रैवत से पूछा। रेवत कुछ नहीं बोला।। सारीपूत से पूछा मुझे बुध्ध से मिलना है। सारीपूत थोड़ा कुछ बोला और आगे जाकर आनंद के पास गया तो आनंद ने बहुत लंबी बात करी!आखिर बुद्ध के पास पहुंचा। बुद्ध ने कहा स्वागत है बोलो!भिख्खू ने कहा कि रेवत के पास गया रेवत कुछ नहीं बोला। सारीपुत थोड़ा कुछ बोला और आनंद बोलता ही रहा। बुद्ध मुस्कुरा करके बोले तुंने तीनों की निंदा की है। जो निंदा करके यहां गुजरता है वह मेरे शरीर को प्राप्त कर सकता है बुध्धत्व को नहीं प्राप्त कर सकता। निंदा की फिर भी मेरे पास पहुंच गया, निंदा ना की होती तो मेरे आगे कितने परम बुद्ध है वहां तुम पहुंच जाता।।

बापू ने कहा कि यह कथा क्यों है? विषम परिस्थिति में सही समय पर कथा हमारा मार्गदर्शन बनेगी।। कथा अलार्म है, सही वक्त पर बजेगा।। रूमी कहता है जीस यात्रा के लिए 200 साल लगते हैं वहां कोई अच्छा मार्गदर्शन गाइड गुरु मिल जाए तो दो दिन में पहुंच सकेंगे।। जो निरंतर आनंद में रहता है वह जीवन मुक्त है। ऐसा शंकराचार्य जी कहते हैं।।

यहां कौन कैसे मार्ग पर चल रहा है वह कहते हुए बापू ने कहा: राम ब्रह्म है लेकिन अवतार कार्य के लिए राम सत्य के मार्ग के मार्गीहै।।भरत प्रेम मार्ग के मार्गी है। मां जानकी करुणा मार्ग की मार्गी है।। दशरथ धर्म मार्ग के मार्गी  है।। मां कौशल्या विवेक मार्ग के मार्गी है। सुमित्रा त्याग और समर्पण मार्ग की मार्गी है।।कैकई दो मार्ग पर चली, एक मार्ग नींदीनीय रहा, एक वंदनीय रहा।। लक्ष्मण सावधानी और जागृति के मार्ग का मार्गी है। शत्रुघ्न सेवा मार्ग का मार्गी है। सेवा करके आप मौन हो जाओगे तो सेवा खुद बोलेगी।। हनुमान जी वैराग्य मार्ग के मार्ग है।।

बापू ने कहा कि आप मुझे पूछेंगे,तो मानस ही मेरा मार्ग है।। फिर राम रहस्य कथा रहस्य कहते हुए बापू ने कहा कि:

तुमरो मंत्र बिभीषण माना।

लंकेश्वर भये सब जग जाना।।

वहां हनुमान चालिसा कि यह चौपाई कहती है की रावण को दिया गया मंत्र विभीषण ने माना।

रावण को मंत्र दिया था:

रामचरण पंकज उर धरहू।

लंका अचल राज तुम करहू।

यह विभीषण ने माना और लंकेश्वर बने।।

वैसे ही दंतकथा नाशवंत होती है संतकथा शाश्वत होती है।। हनुमान जी के पास व्यास जी ने बताएं छह रसायन है: संयम,शील,धैर्य,शांत अन्वेषण, वृतांत विवेक पना और सेतुबंध।।

भगवान शंकर विश्वास मार्ग के मार्गीहै।।मां पार्वती श्रद्धा मार्ग की मार्गी है। याज्ञवल्क्य विवेक मार्ग के मार्गीहै।भारद्वाजप्रपन्नता के मार्ग के मार्गी है। भूसुंडी उपासना मार्ग के मार्गी है।। तुलसी शरणागति के मार्ग के मार्गी है और गरुड़ कृतकृत्यता का मार्ग का मार्गी है।।

यहां ययाति की कथा, विभीषण, सुग्रीव, वाली आदि की कथा भी बापू ने सुनाई।।

बापू ने यह भी याद किया कि हमारा भारत का गौरव शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में गया और हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री से साथ 18 मिनट की बात की वह हमारा गौरव है।।

रावण मोह मार्ग युध्ध मार्ग का मार्गी है।।कुंभकरण अहंकार मार्ग का और मेघनाथ काम मार्ग का मार्गी है।।

यह सभी मार्ग किसी एक में दिखे तो वह बुद्ध पुरुष है।।

रामकथा में द्वारिका के केशवानंद जी,मूल बापु के गॉंव के पास अब मुंबइ रहते हरिओम दादा एवं बहूत से गुजराती श्रोताओं की हाजरी है।।

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