
राजापुर, चित्रकूट | 31 जुलाई 2025: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को संत-कवि गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्मस्थली राजापुर में आयोजित तुलसी जन्मोत्सव में भाग लिया और उनकी दिव्य विरासत को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रख्यात रामकथा वाचक मोरारी बापू की प्रेरणा से आयोजित इस आयोजन में देशभर से आये संतों, धर्माचार्यों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “मैं स्वयं को धन्य मानता हूं कि मुझे गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती के इस पावन आयोजन में सम्मिलित होने का अवसर मिला। यह वही भूमि है जहां 500 वर्ष पूर्व अभावों और सीमित संसाधनों के बीच एक दिव्य आत्मा ने जन्म लिया, जिन्होंने बाल्यावस्था में ही स्वयं को प्रभु श्रीराम के चरणों में समर्पित कर दिया और पूरी जीवन यात्रा भगवान श्रीराम की मर्यादाओं के प्रचार-प्रसार में समर्पित कर दी। इस महान संत ने प्रभु श्रीराम की भक्ति और शक्ति के अद्वितीय संगम से एक नई चेतना का निर्माण किया।”
सनातन धर्म के प्रचार में मोरारी बापू के योगदान की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा, “कौन ऐसा भारतीय होगा जो प्रभु श्रीराम की पावन कथा को मोरारी बापू के श्रीमुख से सुनने के लिए उत्सुक न हो? कौन ऐसा सनातन धर्मावलंबी होगा? बापूने जीवन भर श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाया है। मैं उन्हें हृदय से बधाई देता हूं कि उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास जी की स्मृति को जीवित रखने के इस महत्वपूर्ण प्रयास में सभी संतों और श्रद्धालुओं को एक मंच पर एकत्र किया।”
मुख्यमंत्री ने रत्नावली, तुलसी, व्यास और वाल्मीकि सम्मान प्राप्त करने वाले विद्वानों को बधाई दी और कहा कि ऐसे सम्मान भविष्य की पीढ़ियों को सनातन धर्म के प्रति प्रेरित करेंगे।
इस अवसर पर मोरारी बापू ने कहा, “यह देश का सौभाग्य है कि उत्तर प्रदेश को एक साधु मुख्यमंत्री मिला है। आपने सेवा को यज्ञ बना दिया है। इतने व्यस्त कार्यक्रमों के बीच भी आपका यहां आना आपकी उदारता और धर्मनिष्ठा का प्रतीक है। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि जब भी तुलसी जयंती का आयोजन हो, आप सादर पधारें।”
तुलसी जन्मोत्सव समारोह में भक्ति, विद्वत्ता और आध्यात्मिक विचारों की त्रिवेणी देखने को मिली। मोरारी बापू की प्रेरणा से आयोजित तुलसी साहित्य संगोष्ठी में देश के विभिन्न भागों से आए विद्वान धर्माचार्यों और साहित्यकारों ने गोस्वामी तुलसीदास जी की काव्य एवं आध्यात्मिक परंपरा पर विचार प्रस्तुत किए।

