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फिर जल्द ही हार्वड में कथागान के मनोरथ के साथ रामकथा का समापन,अगली-९६०वीं रामकथा का १९ जूलाइ से धरती के स्वर्ग स्विट्झरलेन्ड से आगाझ होगा।।

बापु ने पंथस्थ बनकर बतायें मार्गी साधुओं के लक्षण।।

गुरुपूर्णिमा पर तलगाजरडा में कोइ उत्सव नहि है,कृपया विवेक से न आना।।

गुरु पूर्णिमा की सब को एडवान्स में बधाइयां दी।।

मैं गुरु नहि,आपकी तरह आश्रित हुं।।

बापु ने बताइ अपनी पवित्र,प्रवाही,परोपकारी परंपरा की पूरी पीढी काटी आध्यात्मिक सीडी।।

मार्गी योगी भी है,वियोगी भी है।।

मार्गी साधु निरोगी भी है और प्रेम रोग का महारोगी भी है।।

गुरुपूर्णिमा की प्रसादी में व्यास के १५-पूर्णिमा वंदन

 

अति हरिकृपाजाहि पर होइ।

पॉंउंदेइएहिमारगसोइ।।

-उत्तरकॉंड दोहा-१२९

मिलेहूगरूडमारगमंहमोहि।

कवन भांति समजावौंतोहि।।

-उत्तरकॉंड दोहा-६१

इन बीज पंक्तियों का आधार लेकर शुरु हूइ रामकथा आज अंतिम विराम के दिन पर पहुंची।।

बापु ने शेष कथा का विहंगावलोकन और उपसंहारकबतों के साथ आनेवालीगुरुपूर्णिमा की प्रसादी के रूप में सूत्रात्म बातें कही।।

आरंभ में मनोरथी परिवार एवं पुरे आयोजन और यहां के सभी लोगों के प्रति प्रसन्नता और अपना साधुवाद प्रस्तुत किया।।

द्वारिका नगरी से आए स्वामी जी ने विकास पेट को द्वारिका नाथ का छवि जी अर्पण किया ममता कमलेश परिवार की बेटियों और बेटे ने सबके लिए आभार का भाव व्यक्त किया।।

समास पद्धति से कथा करने से पहले कल शाम को भारत के हास्य कार जगदीश त्रिवेदी ने कार्यक्रम किया और उनके पैसे नहीं लेकर सावरकुंडला लल्लू भाई शेठ सेवा केंद्र को अर्पण कर दिया।। बापू ने कहा की साधना का नियम दृढ़ बनता है तो व्रत में परिवर्तित हो जाता है।।

फिर वन मोर स्टेप अलोन इन वर्ल्ड…अंग्रेजी कविता भी आई थी।।

उपसंहारक बात करते हुए एक प्रश्न उठाया दादा और गुरु का मार्ग क्या था?बापू ने अपनी पूरी पवित्र प्रवाही परोपकारी परंपरा के बारे में कहा कि:

हमारी परंपरा मार्गीरही।।मूल पुरुष ध्यान स्वामी बापा(सेंजल)निंबार्की परिवार के परिव्राजक थे। ब्रजमंडल से तुलसी श्याम गए( गुजराती के साहित्यकार नाना भाई जेबलिया ने ध्यान स्वामी बापा का जीवन चरित्र भी लिखा,बापू ने कहा कि परचें और चमत्कार के बारे में हो सके तो नहीं लिखना)।बुद्ध पुरुषों के बारे में अपने सपने में हमें प्रेरणा होती है।। जैसे स्वामी योगानंद जी ने चैतसिक अनुभूति की बात की है, वह खुद ही बता सकते हैं।।ध्यान स्वामी बापासेंजल आए,फुलझर नदी के तट पर नीम के पैर के नीचे बैठ गये, वहां समाधि लग गई और वहीं रहे।।ध्यान स्वामी बापा ध्यान मार्ग के मार्गी थे।। फिर तलगाजरडा के पास कोंजली गांव के जीवण दास मेहता,नगर ब्राह्मण योगेंद्र भाई और योगिनी बहन थियोसॉफिस्ट जीवन दास मेहता के परिवार से थे।। ध्यान स्वामी बापा के संग में आए। नागर वैसे ही नागर होते हैं।। दीक्षा दी और आदेश किया गृहस्थी हो जाओ।। और जीवण दास बापा जीवन मार्गी थे।। गृहस्थी हूए और यह परंपरा आगे चली।। फिर नारायण दास बापू नाम मार्गीथे।परम तत्व नारायण, बद्री नारायण, लक्ष्मी नारायण,सत्यनारायण,नर नारायण और फिर प्रेम दास बापू जो प्रेममार्गी रहे होंगे।। लघुराम दादा आए जो विशाल रघुराम के मार्ग के थे।। बाद में त्रिभुवनदास दादा आए।। वह त्रिभुवन मार्गी सत्य प्रेम और करुणा के मार्गी बने।। मार्ग भी समर्थ होना चाहिए।।फिरप्रभुदास बापू प्रभुमार्गी है और फिर मैं बाकी रहा!

बापू ने कहा मैं ग्रंथस्थ होकर नहीं पंथस्थ होकर बोल रहा हूं।। मार्गी साधुओं के लिए कुछ निम्न शब्द भी प्रयोग हुए हैं। मंदिर में घंट और घंटी होती है। घंट बाहर रहता है घंटी भगवान के पास रहती है जितने छोटे होंगे ईश्वर के नजदीक रहेंगे।। ग्रंथस्थ होना एक उपलब्धि है।। मैंने पंथस्थ होकर देखा है और पंथस्थ साधुओं के लक्षण बापू ने कहे::

मार्गी साधु भोगी नहीं योगी होते हैं।। नदी कभी भोगी नहीं होती योगी होती है।। मार्गी वियोगी होते हैं।। मार्गी साधु विरागी है।।मार्गीहरिचरण शास्त्र और सूत्रों में अनुरागी होते हैं।।मार्गीसुहागी भी होते है उनका सिंदूर कोई मिटा नहीं सकता। मार्गी साधु अनाथ नहीं होता, नाथ होते हैं: यदुनाथ,द्वारिका नाथ,रघुनाथ,श्रीनाथ,विश्वनाथ, जगन्नाथ,बद्रीनाथ कोई भी उनका नाथ है।। मार्गी साधु प्रयोगी होता है मार्गी साधु निरोगी होता है।।शरीर तो ऊर्जा कम भी होती है लेकिन निरंतर चलते हैं वह निरोगी रहते हैं। आंतरिक रोगों से मुक्त होता है।। मार्गी प्रेम रोग का महारोगी भी होता है।। मार्गी पूरे समाज को सहयोगी होता है।।मार्गी साधु असंगी है। मार्गी साधु परागी है।। मार्गी साधु रागी(राग गाने वाला) होता है और मार्गी साधु प्रयागी भी होता है।।

मैं और आप मार्गी को पहचान सके और उनके साथ संगति करें।।

संक्षिप्त रूप में अयोध्या कांड के श्लोक में शिव जी की स्तुति और सीताराम की वंदना के बाद राम वनवास, चित्रकूट निवास और महाराज दशरथ का प्राण त्याग, भरत की चित्रकूट यात्रा पादुका लेकर लौटे।।अरण्य कांड में चित्रकूट से स्थानांतर किया अत्रि के आश्रम में आए। फिर सुतीक्ष्ण, सरभंगकुंभज आदि को मिलकर गोदावरी तट पर पंचवटी में निवास किया।। जटायु से मैत्री की ओर पंचवटी में लक्ष्मण के पांच प्रश्न के जवाब दिए।। सूर्पनखा को दंडित किया। सीता जी का अपहरण हुआ कबंध को गति देकर पंपा सरोवर शबरी से मिलकर सीता के बारे में पूछा।। सीता शांति भक्ति शक्ति के बारे में पांच निम्न लोगों से पूछते हैं। जरूरी नहीं की बड़े लोग ही मार्ग दिखाएं! जटायु से, शबरी से,नारद से, सुग्रीव से और हनुमान जी से पूछा।। वाली का निर्वाण और हनुमान से मिलन के बाद सीता खोज हुई।। संपात्ति से मार्गदर्शन पा कार हनुमान जी का लंका गहन, और लंका दहन।। हनुमान जी के पांच मुख को पांच भूख है: मधुर फल रूपी राम नाम, सूर्य रूपी ज्ञान की भूख। कथा सुनने की भूख अमरता की भूख भजन के लिए।। और पांचवी सेवा की भूख।। वहां सेतुबंध रामेश्वर की स्थापना की राम रावण महायुद्ध और रावण के निर्वाण के बाद अयोध्या में राजतिलक हुआ।। तीनों घाट पर कथा विराम के बाद प्रसन्नता व्यक्त की।।

10 तारीख को गुरु पूर्णिमा आ रही है सबको विनय करते हुए कहा कि तलगाजरडा में गुरु पूर्णिमा का कोई उत्सव नहीं होगा।। विवेक से निर्णय करके न आना।।में गुरु नहीं,आश्रित हूं आपकी तरह।। एडवांस में बधाई के साथ कहा कि मुझे जैसे गुरु फलित हुए आप सबको भी ऐसे हुए।।

आखिर में गुरु पूर्णिमा व्यास पूर्णिमा की वंदना पूर्णिमा-15 वंदना करते हुए ग्रंथस्थ बातें की:

व्यास पूर्ण है। व्यास का मतलब विशाल है। व्यास ने वेदों का विस्तार किया,विस्तारक है। व्यास मुनि भी है ऋषि भी है। चुप रहे तब मुनि है,बोले तब ऋषि है व्यास महान अद्भुत बेजोड़ अद्वितीय सर्जक है। व्यास ने थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों प्रदान किया। शस्त्र और शास्त्रों भी है।।शस्त्रस्व रक्षण के लिये,शास्त्र शिक्षण के लिये रखे।। 24 अवतार में एक अवतार है।व्यास महाभारत का पात्र भी है। व्यास भविष्य दृष्टा आर्ष दृष्ट है।। शून्य और पूर्ण के बीच में सेतु है।। वंश विस्तारक है।। व्यास सही सद्गुरु है।।व्यास बहुत अद्भुत सूत्र देने वाले हैं और गुणातित है।। यह कथा को व्यास पूर्णिमा पर भगवान वेद व्यास को अर्पण करके प्रसन्नता के साथ राम कथा को विराम दिया।।

अगली-९६०वीं रामकथा १९ जूलाइ से २७ जूलाइ के दरमियान दुनिया के स्वर्ग कहे जाने वाले मनोरम आल्प्स की अद्भूत वादियों से घीरे देश स्विट्झरलेन्ड से होने जा रही है।।

समय तफावत के कारण भारत में पहले दिन १९ जूलाइ शनिवार को वेदिक टीवी चेनल और चित्रकूटधामतलगाजरडायु-ट्युबचेनल से शाम ७:३० से १०:३० और बाकी के दिनों में दोपहर १:३० बजे से शाम ५:०० बजे तक लाइव देखी जा सकती है।।

आस्था टीवी चेनल पर डी-लाइव प्रसारण २० जूलाइ से २८ जूलाइहररोज सुबह ९:३० बजे से १:०० बजे तक होगा।।

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