Homeगुजरातरामकथा में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडनवीस जी की विशेष उपस्थिति।।

रामकथा में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडनवीस जी की विशेष उपस्थिति।।

अध्यात्म के बगैर संगीत उहापोह है।।

शिव विरागी भी है,अनुरागी भी है और रागी भी है।।

कहा कथा ही जप है,कथा ही जीवन है।।

सत्य एक वचन है,प्रेम द्वी वचन है और करुणा बहुवचन है।।

संगीत तब तक आध्यात्मिक रहता है जब तक वह हमारा धर्म बना रहे,धंधा ना बने।।

रामकथा का आठवां दिन आज कथा में बड़ा विशिष्ट प्रकल्पबना।। महाराष्ट्र के लोकप्रिय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस जी और कैबिनेट के मंत्री सांसद और यहां के स्थानिक राजकीय आगेवानव्यासपीठ की वंदना पर आए।।मनोरथीदर्डा परिवार की तरफ से विजय बाबू ने मुख्यमंत्री एवं दिल्ली से पधारे मीडिया के लोगों सब का स्वागत भी किया और मोमेंटो और साल भी अर्पण किया।।

आज के प्रकल्प में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी ने मोरारी बापू और व्यास पीठ का हार पहना कर मोमेंटो अर्पण करके अभिवादन किया।।

कर्मठ पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी जवाहर बाबू दर्डा के जीवन का एक पुस्तक जो अलग-अलग भाषाओं में प्रकाशित हुआ था,वह अंग्रेजी भाषा में ‘पेइन एंड परपझ’ किताब का आदरणीय मुख्यमंत्री जी, सांसद दर्डा परिवार और बापू की ओर से लोकार्पण विमोचन और व्यास पीठ को अर्पण हुआ साथ ही साथ एक कॉइन बनाया गया वह भी व्यास पीठ को अर्पण किया गया।।

मुख्यमंत्री ने अपना भाव रखा और कहा कि राम कथा सहस्त्रनाम तुल्य है।।और बापू के मुख से सुनने से जीवन का मार्ग प्रशस्त होता है।।

बापू ने कथा के आरंभ में कहा की कर्मठ पत्रकार की पुस्तक का लोकार्पण और महाराष्ट्र के माननीय मुख्यमंत्री व्यासपीठ के पति सम्मान और आदर व्यक्त किया उनका सम्मान करते हुए बापू ने कहा कि राजपीठ के लिये हनुमान जी की तरफ प्रार्थना करुं कि आपको बल मिले और यह बल का फल पूरी महाराष्ट्र की आखिरी जनता तक पहुंचे ऐसी प्रार्थना करता हूं।।

बापू ने यह भी बताया कि जब कोई पुस्तक लोकार्पण होता है तो ग्रंथ है ग्रंथ में शब्द होता है शब्द ब्रह्म है तो लोकार्पण तो है ही, यह ब्रह्मार्पण हुआ है।।

यहां वारकरी परंपरा जो बहुत पुरानी परंपरा है तुकाराम जी उनमें दीक्षित हुए उनके 15 सिद्धांत की बापू ने बात की और तुकाराम सदैव स्वर्ग गए।। आज सदेह चंद्र पर,अवकाश में जाया जाता है तो तुकाराम जी भी सदेह स्वर्ग जा सकते हैं।।

संगीत अध्यात्म से बहुत जुड़ा है अध्यात्म के बगैर संगीत उहापोह है।। हमारे शरीर में सात चक्र है संगीत का पहला स्वर सा मूलाधार से निकला है और फिर एक-एक स्वर चक्र भेदन करके ऊपर जाते हैं और फिर अवरोह में नीचे उतरते हैं।।

संगीत तब तक आध्यात्मिक रहता है जब तक वह हमारा धर्म बना रहे,धंधा ना बने।। और वारकरी संप्रदाय ने संगीत को धर्म बनाया है।।

परम रम्य गिरिवरकैलासु।

सदा जहां सिव उमा निवासु।।

शिव विरागी भी है अनुरागी भी है और रागी भी है।। वहां सिद्ध,मुनि,किन्नर,गंधर्व,योगी,देव,तपस्वी निवास करते हैं।।आज भी उड़ीसा बंगाल के बाउल जहां संगीत नूरानी रूप में प्रस्तुत किया जाता है।। हर क्षेत्र में स्कॉलर नहीं स्मॉलर बने रहना।।

बापू ने कहा कि गुरु कृपा से एक भजन पंचक है एक भजन मातृ पितृ का,दूसरा गुरु भक्ति,तीसरा ईश्वर भक्ति,चौथा राष्ट्रभक्ति और पांचवा विश्व भक्ति से जुड़ा हुआ है। हमें इन भक्ति से गुजरना पड़ेगा बापू ने आज भागवत में रही मातृ पितृ भक्त की वह कथा नाभाग चरित्र सुनाया।। जहां 7 साल का नाभाग गुरु के आश्रम में 11 साल पढ़कर गुरु से विदा मांगता है और संध्या पूजा करके गुरु बाहर निकलते हैं। आशीर्वाद देते हैं।।फिर प्रवचन करता है इस वक्त नाभाग के पिताजी अपना तप और तेज का सम्मान न होने के कारण घर को त्याग करके यहां आए हैं। वह नाभाग से मिलते हैं। तब नाभाग अपना भाग अपना हिस्सा मांगने अपने भाइयों के पास जाता है तो भाई सब कहते हैं कि हमने संपत्ति का बंटवारा कर दिया और तेरे भाग में बाप आया है

किसी के हिस्से में मकान आया।

किसी के हिस्से में दुकान आई।

में घर में सबसे छोटा था।

मेरे हिस्से में मां आई!

नाभाग पिता की सेवा में लग गया और एक राजा के वहां अंगिरस का यज्ञ चल रहा था लेकिन आखिरी मंत्र चूका जा रहा था इसलिए यज्ञ की पूर्णाहुति नहीं हो रही थी।। नाभाग के पिता ने नाभाग को यह पूर्णाहुति का मंत्र दिया हो लेकर अंगीरस के पास आया और अंगिरस ने यज्ञ पूरा किया और सभी दक्षिणा नाभाग को मिली।। बीच में भगवान शंकर ने अपने दक्षिणा मांगी और प्रसन्न हुए और सब को लेकर गुरु और पिता के पास लै गया।।

बापू ने कहा कि हर बेटा नाभाग बने और इस नाभाग का पुत्र अंबरीश की कथा भी बहुत जानी पहचानी है।।

बापू ने कहा कथा ही जप है।। कथा ही जीवन है फिर राम कथा में संक्षिप्त रूप से अलग-अलग कांड का दर्शन करवाते हुए भूसुंडी की रीत से अयोध्या कांड का समापन करते हुए कहा कि वैराग्य विरति दो रीत से आती है भरत चरित्र जहां प्रीत है प्रीत से वैराग्य प्रकट होता है और उत्तर कांड में राम कहते हैं धर्म से विरति आती है।।

फिर अरण्यकांडकिष्किंधा कांड और सुंदरकांड आदि कांड की कथाओं की पंक्तियों का गान करके संक्षिप्त रूप में राम राज्याभिषेक की कथा और रावण के निर्वाण की कथा सुना कर बापू ने कहा कि सत्य सिर्फ हम बोले वह भी काफी है।। इसलिए सत्य एक वचन है,प्रेम द्वी वचन है और करुणा बहुवचन है।। कल उपसंहारक बातें करके सुबह कथा को विराम दिया जाएगा।।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read