
एक वैश्विक विचार अनुभव में लिया।।
कथा ने मुझे विज्ञान विचार दिया मैं केवल धर्म पड़कर नहीं चलता,विज्ञान और अध्यात्म को पकड़ कर भी चलता हूं।।
जागो सनातनीओ जागो!!
राम प्रागट्य पर सनातन के प्रति छलका बापु का दर्द।।
ज्ञानी भटकता है और प्रेमी पहुंच जाता है।।
हर गॉंव में पंच देव के मंदिर होने चाहिये
“बोलिंग होती रहेगी तब तक बैटिंग करता रहूंगा” मैं थका नहीं हूं,औरसिक्सर मारता रहूंगा” जगत के चौक में खेल दिली से खेल रहा हूं,सूर्य और चंद्र मेरा अंपायर है।।
बराबर इसलिए खेलूंगा क्योंकि अगली गेम के लिए यानी की मुक्ति के बाद फिर दूसरा टेस्ट-दूसरा जन्म मिले तो मुझे भी सिलेक्ट करें!
गोपनाथ महादेव में आज राम कथा का सातवां दिन और एक सुंदर प्रकल्प से रामकथा का आरंभ हुआ जब गांधी केंद्र लोक भारती सणोसरा के डॉ दीनू भाई चूड़ासमाने यहां के भावनगर सराय के एक साधु पुरुष जैसा सुभाष भट्ट जिसने बहुत से किताबें लिखी है, प्रवचन किए हैं और हिमालय में परिव्राजक बनकर भ्रमण भी किया है।। वह सभी पुस्तक का एक तीसरा पुस्तक जो दिनुभाई ने संपादित किया हुआ है,वह व्यासपीठ की साक्षी और बापू के शुभ और शुध्धहस्तों से ब्रह्मार्पितकिया।।और यह पुस्तक ‘एक शब्द में सब कहा’ जो पुस्तक सुभाष भाई के द्वारा किए हुए प्रवचनों पर से संपादित किया हुआ है।।सुभाष भाई के बारे में दीनू भाई ने बताया कि यह प्रकल्प कैसे हुआ है। सुभाष भट्ट का 66वां जन्मदिन और 3000 से ज्यादा लेख और पन्ने उनमें से 33 लेख संकलित और संपादित कर के बापू के शुभ हस्त जब पुस्तक को स्पर्श करते हैं तो अब यह शब्द नहीं लेकिन शबद बन जाता है।। और 66 साल के अंदर मेरे 33 लेख डालता हूं तो 99 साल होते हैं और बापू खुद नव को शुभ अंक और पूर्णांक कहते हैं तो यह भी डालते हैं तो 108 साल सुभाष भाई निरामयी जीवन जीवेजिए ऐसी मनोकामना के साथ यह संपादन किया हुआ है।। लेकिन यहां ग्राम्य प्रजा उसे कैसे समझे? सुभाष भट्ट एक ऐसा साधु और महा पुरुष है विलक्षण है तीन पुस्तक उन पर किये।। पहली पुस्तक सत्य जहां इस घाट अंतर,दूसरा अनहद बानी, दूसरा प्रेम के ऊपर।। जीवन संवाद,जहां सुभाष भट्ट का साक्षात्कार इंटरव्यू है।।और बहुत आधी आधी लाइन में छोटे-छोटे प्रश्न और त्वरित जवाब ऐसे 84 प्रश्न लिखे हैं ।।और तीसरा यह पुस्तक जो करुणा के ऊपर आधारित है।।
साक्षात्कार में पूछा गया था कि पूज्य बापू को आप क्या समझते हैं? सुभाष भट्ट ने कहा मेरी अनुभूति सत्य प्रेम और करुणा का अघोळ आचरण! कबीर क्यों इतनी तेज दिखते हैं? बताया करुणा के कारण!और सुभाष भट्ट क्या है? मैत्री,मैत्री और केवल मैत्री!!
बापू ने भी इस पुस्तक पर अपना प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा:
राझ कैसे पहुंच गए गैरों तक!
मशवरे तो हमने अपनों से किए थे!!
और राम कथा को आगे ले जाने से पहले यहां हर रोज अलग-अलग कितनी ही चिट्ठी संशय प्रश्न आते हैं।
बापू ने कहा कि आप समझते हैं कि अच्छा ही आता है लेकिन आलोचना टीका के साथ भी प्रश्न आए हैं।।यहां एक किसी ने पूछा की बापू आप जो भी कुछ यहां विचार रखते हैं इनमें से आपने कितने स्विकार्य है? बापू ने बताया कि गोपनाथ की साक्षी से कहता हूं सबसे पहले वैश्विक विचार में सबको वैश्विक परिवार की तरफ स्विकार किया है।। मैंने पहले भी कहीं कहा है कि यह जो देश आपस में लड़ाई करते हैं उन दोनों के बीच में सरहद पर जाकर में बैठकर कथा सुनाउं।। मेरा जो भी कुछ हो और अभी-अभी गाझा और इजरायल के बीच जो संधि की बात आई हो खूब प्रसन्नता देने वाली है।। वो यदि ठीक है तो क्योंकि बच्चों के मुख पर आनंद देखकर बहुत खुशी आती है।। एक वैश्विक विचार अनुभव में लिया कथा ने मुझे विज्ञान विचार दिया मैं केवल धर्म पड़कर नहीं चलता, विज्ञान और अध्यात्म को पकड़ कर भी चलता हूं।। रामचरितमानस में वाल्मीकि और हनुमान को कवीश्वर और कपीश्वर कहा है।। दोनों विज्ञानी है। तीसरा वैराग्य विचार जो मेरे लहू में है।। समय के बाद आदमी को विराग विचार करना चाहिए। सब कुछ छोड़कर भागने की बात नहीं लेकिन घर में रहकर वहां पर वानप्रस्थ बन कर रहना चाहिए।।ज्ञान वैराग्य ऐश्वर्या धर्म यश ऐसे छह भाग जिस में है उसे भगवान कहते हैं।। लेकिन ज्ञानी भटकता है और प्रेमी पहुंच जाता है। ऐसा सुभाष भाई ने कहा हमारे जैसों के लिए भगवान का अर्थ?(भ)जन या सेवा करने वाला,(ग)गन गामी दृष्टि कौन रखने वाला,(वा)नप्राश्त अवस्था तक जीने वाला,(न)कारात्मकता कम करने वाला- वह भगवान है।। विज्ञान गति देता है लेकिन धर्म दिशा दे सकता है।। ऐसा विनोबा जी ने भी कहा।। तो विवेक विचार भी रामायण से मुझे मिला है।। और आप आज आपको ऐसे पत्र को भी विनय पूर्वक जवाब देता हूं।।
दूसरा भी ऐसा पत्र था कि आप की कथा सुनकर दुनिया उब जाएगी क्या? बापू ने कहा कि सब अच्छी ही चिट्ठी आती है ऐसा नहीं है।।गीता में अर्जुन कहता है है योगेश्वर! आपके अमृत वचन सुनकर हमें तृप्ति नहीं होती।।हम कभी थकते नहीं बापू ने कहा कि आप थक जाए मैं थकने वाला नहीं और चुटकी लेते हुए यह भी कहा “बोलिंग होती रहेगी तब तक बैटिंग करता रहूंगा” क्योंकि मैं थका नहीं हूं और सिक्सर मारता रहूंगा” जगत के चौक में खेल दिली से खेल रहा हूं सूर्य और चंद्र मेरा अंपायर है और बराबर इसलिए खेलूंगा क्योंकि अगली गेम के लिए यानी की मुक्ति के बाद फिर दूसरा टेस्ट- दूसरा जन्म मिले तो मुझे सिलेक्शन में भी सिलेक्टहूं।।नरसिंह मेहता ने कहा है हरी ना जन तो मुक्ति ना मांगे, मांगे जन्म जन्म अवतार…
फिर राम जन्म की ओर ले जाते हुए बापू ने बताया कि भल अवसर देखकर पार्वती शिव से प्रश्न करती है और शिव से पूछता है कि राम जन्म के हेतु क्या है वैसे परमात्मा कार्य कारण सिद्धांत उन्हें लागू नहीं होता।।बिना हेतु भी प्रकट हो सकते हैं।।अवतरण कर सकते हैं। लेकिन पांच कारण रामायण में दिखाएं वह सब के गान करके सुना के संवाद करके बापू ने कहा कि विश्वामित्र के कहने पर दशरथ ने पुत्र कामेष्टी यज्ञ करवाया और यज्ञ की अंदर खीर का प्रसाद निकला सब रानियां को बांटा गया और सभी माता के गर्भ में भगवान के अंश अवतरण करने के लिए आए और राजा दशरथ के राजमहल में मां कौशल्या के उदर में भगवान राम ने प्रवेश किया और भगवान का जब जन्म हुआ तब एक माता ईश्वर को आदमी कैसे बनना चाहिए,मानव बनाने का तरीका सीखाकर अपनी गोद में रोते हुए पाए हैं।।
और यहां त्रिभुवन की पूरी वातावरणीय हवा में त्रिभुवानिय व्यास पीठ से पूरे विश्व को राम जन्म की बधाई देते हुए और सबको गाते बजाते हुए आज की कथा को विराम दिया गया।।
राम जन्म के अवसर पर सनातन धर्म पर बापु की पीडा और दर्द छलकता दिखा
अयोध्या श्रीराम मंदिर के अंदर अभी तक ये लोग दर्शन करने तक नहि आये है!!जागो सनातनीओ जागो!!
आज गरिमापुर में लेकिन बिल्कुल सादई से राम प्रागट्य की बात चल रही थी तब बापू ने कहा,और बीच में कथा में भी बार-बार कहा कि आज सनातन धर्म पर चारों ओर से हमले हो रहे हैं।प्रहार हो रहे हैं, तब जाग ने जादवा….! सनातनीओ! जागो!
कोई विचारधारा कहती है कि कृष्ण नरक में जाएंगे और फिर हमारी चौबीसी में आकर तीर्थंकर बनेंगे! किसी ने कहा कि राम ही स्वर्ग में गए,लक्ष्मण गए ही नहीं है!!सब अपनी-अपने विचारधारा से सनातन पर प्रहार कर रहे हैं।। बापू ने कहा कि आप कहां है? अपना एड्रेस तो भेजो!! क्योंकि वेदों में नर्क का वर्णन भी किया है,शास्त्रों में लिखा है और जैसे भादरवा में भिंडी होती है वैसे आप कहां है!
बापू ने कहा कि हर एक गांव में पंचदेव के मंदिर होने चाहिए।। हर एक गांव में शिव मंदिर,राम मंदिर कृष्ण मंदिर,दुर्गा भवानी या माताजी का मंदिर, गणपति दादा का मंदिर, हनुमान जी का मंदिर होना चाहिए।।
यदि आपके गांव में जीर्ण शिर्ण हो गए हैं तो तलगाजरडा-चित्रकूट धाम की तुलसी पत्र के रूप में सवा लाख रुपया मेरे से ले जाना और जिर्णोध्धार करो क्योंकि हमारा सनातन धर्म यह पांच देवों पर आधारित है।।कोई अपने लिए जो भी कुछ करें लेकिन कभी-कभी अब ऐसा होता है कि पूरा गांव सनातनी होता है और कोई बाहर से आकर कानों में जहर उगलता है। अब यह बंद होना चाहिए।। और सनातन को जागने की बहुत जरूरत है।।
बापू ने याद करवाया कि जब अयोध्या में भगवान श्री राम का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव था और हमारे यशस्वी बड़ा प्रधान के साथ हम सब वहां थे तब दिखावा करने के लिए बाहर सब खड़े थे। लेकिन उनमें से एक भी अंदर दर्शन करने के लिए नहीं आया! जब मैं हंस के कहा तो टाल दिया यह कहकर कि हमारी फ्लाइट लेट हो रही है!!
और पास में ही अयोध्या है लेकिन किसी को दर्शन आने के लिए फुर्सत नहीं है।अभी तक कोई अंदर दर्शन करने तक नहीं आया है और गांव में जाकर सनातन धर्म पर चारों ओर से प्रहार करने में सब लगे हैं।।
तो अब यह सनातन वासियों जागो।।जाग ने जादवा कृष्ण गोवालिया… अब आपको जागने की खास जरूरत है।।

