जिसका जीवन साबू जैसा,खुद को घीसकर औरों का मेल और मल निकाल दे वो साधु।।
स्वच्छता अभियान जैसे चला वैसे भीतरी पवित्रता का अभियान भी चलना जरूरी है।।
द्वेष,दोष और रोष मिटेगा तब भीतरी शांति प्राप्त होगी।।
घाटकोपर के अत्रे मैदान में चल रही रामकथा आंठवे कदम पर
कथा से पहले सद्भावना परिवार को और वृक्षों के लिए 111 वृक्षों भानुशाली परिवार की ओर से और 51 वृक्ष विपुल भाई दवे द्वारा पालने की घोषणा हुई एक करोड रुपए नरेश भाई और उमा बहन की ओर से और 11 लख रुपए उमाकांत युएसए की तरफ से भी मिले।।वृद्धाश्रम के लिए एक रूम जो 11 लाख में बनता है चंद्रकांत भाई तन्ना की ओर से और नयना बेन शाह की ओर से दो रूम 22 लख रुपए की राशि की घोषणा हुई।।बी.डी. ग्रुप 111 वृक्ष और ब्रिजेश चंद्रानी परिवार की ओर से एक रूम की घोषणा हुई जो मित्तल भाई खेतानी द्वारा कहा गया।
कथा के मनोरथी पराग भाई के मातुश्री आराध्या महासती जी का भी आज जन्मदिन है।।पराग भाई ने अस्पताल,ब्लड बैंक और थैलेसीमिया की प्रवृत्ति के साथ-साथ नम्र मुनि महाराज के आशीर्वचन से बहुत कम दामों में मेडिकल स्टोर-जो जूनागढ़ और मुंबई के साथ-साथ हळवद में भी शुरू करने की बात करी।।
वृध्धाश्रम की ओर से मित्तल भाई कहते हैं बार-बार दोहराते हैं कि हमें मावतर चाहिए और आप वृक्ष लेकर जाइए यही हमारी मांग है।।
आज कथा के आरंभ में बापू ने पूर्व प्रधानमंत्री और कवि वाजपेई जी जो राष्ट्र को राष्ट्रपुरुष कहते हैं उसने लिखा है:
भारत जमीन का टुकड़ा नहीं है। जीता जागता राष्ट्र पुरुष है।।हिमालय जिसका मस्तक है। कश्मीर किरीट मुकुट है।पंजाब और बंगाल दो विशाल कंधे है।।पूर्वी और पश्चिमी घाट दो विशाल झंघायें हैं।। कन्याकुमारी चरण है और सागर पग पखरता है। यह वंदन की भूमि है।यह अभिनंदन की भूमि है। यह तर्पण की और अर्पण की भूमि है।। यह भूमि के कंकर कंकर शंकर है और बिंदु बिंदु गंगाजल है। हम जिएंगे तो भी इसके लिए और मरेंगे तो भी इसके लिए!
फूलछाब दैनिक अखबार के पूर्व तंत्री कौशिक भाई ने भी अपना भाव वंदे मातरम लिखकर जताये। आज एक और मातृ पंचक के बारे में बताते हुए बापू ने कहा राम मातु- कौशल्या,भरत मातु-कैकयी, लक्ष्मण मातु- सुमित्रा,सीतामातु-त्रिजटा और मारुति मातु- सीता जी भी मातृ पंचक है।।
यदि पूर्व ग्रह छोड़कर माने तो यह माता ने वैश्विक सभ्यता में बड़ा योगदान दिया है।।
राममातु- कौशल्या भी साधु है,राम भी साधु है। साधु शब्द की अनंत व्याख्या है। जिसका जीवन साबू जैसा खुद को घीसकर औरों का मेल और मल निकाल दे।। स्वच्छता अभियान जैसे चला वैसे भीतरी पवित्रता का अभियान भी चलना जरूरी है। हम पहुंचे हुए किसी साधु पुरुष का संग करें तो भीतर से तत्काल हमें शुद्ध करता है।। द्वेष, दोष और रोष मिटेगा तब भीतरी शांति प्राप्त होगी।। जिनका जीवन अच्छा बिल्कुल सादा जीवन वह साधु है।। अच्छा-सारु-जीवन वह भी साधु है।। जिनका जीवन सब के सामने हो वह भी साधु है।। साधु माता कौशल्या से वैष्णवों जैसे सुख की प्राप्ति होती है।। भरत माता-कैकयी मां साधु नहीं है भरत साधु है।।कैकयी से यह सीख मिलती है विश्व मंगल के लिए विष पीना सीखे।।
लक्ष्मण माता सुमित्रा समर्पण और त्याग का शिखर है और सीता माता-त्रिजटा, वैसे धरती और सुनयना सीता की माता है लेकिन त्रिजटा को सीता जी ने माता कहा है।। सीता माता-त्रिजटा को ज्ञान कर्म और भक्ति तीनों है।।जो जानकी जी को विपत्ति में बहुत साथ देती है।।
पांचवी मारुति माता सीता है वैसे अंजनी माता है लेकिन सीता माता अजर अमर का आशीर्वाद देती है।।
बहुत लंबी रामकथा को संक्षिप्त रूप में गाते हुए अयोध्या कॉंड के महत्व के प्रसंग को लेकर गान करते हुए संवाद करते हुए बापू ने रामकथा में राम,लक्षमण,विश्वामित्र जनकपुर में ठहरे वहां कथा को विराम दिया।।कल रामकथा का विराम का दिन है।।
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