
मानस संत जीवन का प्राण है।।
व्यासप्रीत हमारे श्वास पीठ है।।
उपनिषद हमारा प्रकाश है,भगवत गीता हमारा विश्वास है,श्रीमद् भागवत जी हमारी तलाश है।।
अंधेरे का भी एक अपना उजाला होता है।।
सुंदरता,सुजानता तीन प्रकार की होती है:शारीरिक,मानसिक और आत्मिक।।
लगाया जाए वह ध्यान नहीं लग जाए वह ध्यान है।
मेरे लिए भजन ही ध्याननहै।।
ओशो की चेतना से भरी जबलपुर की भूमि से चल रही रामकथा आज सांतवे दिन राम जन्म की और गति करवाते आरंभ मे सभी विशुध्धचेतनाओं को वंदन करते हुए बापु ने आरंभ से पहले जबलपुर में आगामी दो तीन चार जनवरी को चतुर्थ वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस होने जा रहा है।माननीय अजय जी के हाथों जहां चार प्रकार के आयाम है सांस्कृतिक,आध्यात्मिक,अकादमिक और साहित्यिक। विश्व का यह सबसे अच्छा रामायण पर होने वाला कॉन्फ्रेंस है,उनका ब्राउज़र और आमंत्रण का पत्र बापू के हस्तों व्यास पीठ से लोकार्पण किया गया।।
बापू ने बताया कि वेद में कहा है रामचरितमानस विमल है,निर्मल है,पवित्र है,परम है।। संत जीवन का प्राण है।।संतों के जीव का प्राण है।व्यासप्रीत हमारे श्वास पीठ है।।उपनिषद हमारा प्रकाश है,शीतल प्रकाश।। कभी हम मोह के अंधेरे में जाते हैं तो यह प्रकाश हमें मार्ग दिखाता है और भागवत गीता हमारा विश्वास है।।श्रीमद् भागवत जी हमारी तलाश है,वह हमें मिले।।
गुजराती साहित्य के दिग्गज कवि संपादक सर्जक साहित्यकार हरीन्द्रदवे कृष्ण को खोजने निकले थे और आखिर में कहा माधव कहीं मधुबन में नहीं है रामचरितमानस साधुओं की श्वासपीठहै।।राम की कथा है बहुत गहरी और साधुओं की वह मूडी है।। महाभारत को पंचम वेद कहा गया है। रामचरितमानस भी वेद है।। चार वेद चतुर्मुख ब्रह्मा से निकाला लेकिन रामचरितमानस रूपी वेद भगवान शंकर के पांच मुख से निकला इसलिए इसे पंचम वेद भी कह सकते हैं।।
रामचरितमानस विमल संत जीवन प्राण।
हिंदुअन को वेद सम यवन प्रकट कुर्रान।।
शिवजी तो सकल जग पावनी गंगा कहते हैं।।
यह अंतिम छंद जो हमने लिया है वो रामचरितमानस का आखिरी छंद है।बाद में राम कथा को विराम दिया जाता है।। अंतिम छंद को मैं छांदोग्य उपनिषद कहता हूं।।जिनका जीवन छंद बध्धताहै।स्वतंत्रता के नाम पर स्वच्छंदी जीवन ना हो।।सुंदरता तीन प्रकार की होती है।
एक आम का उदाहरण लेते हैं तो आम की ऊपर की सतह जो तेजस्वी होती है बहुत रंगीन और चमकदार होती है।। भीतर में जाए तो रस है। सुंदरता का दूसरा स्थान है और तीसरी गुठली इसके आधार पर पूरा आम है।।सुंदरता तीन प्रकार की एक शारीरिक।।चर्मचमडी का सौंदर्य। भीतरी अमृत करुणा से भरपूर दूसरी मन की सुंदरता जिसका मन प्रेम तत्व में डूबा है वह सुंदर है।।और तीसरी आत्मा की सुंदरता।। राम तो परमात्मा है कितने सुंदर होंगे! इसलिए सर्वोत्तम सुंदर है।।भगवान कृष्ण और शिव भी ऐसे ही सुंदर है। चैतन्य महाप्रभु बहुत सुंदर है।।
रामदुलारी बापू और ओशो यूनिवर्सिटी में साथ पढ़ते थे रामदुलारी बापू अंधेरे में ही बैठे रहते थे। पूछा गया कि आप अंधेरे में क्यों बैठते हो?बताया की साधना में अंधेरा बहुत उपयोगी है।। अंधेरे का भी एक अपना उजाला होता है।।
आप ओशो पर आश्रित प्रेमी हो तो ओशो को भी ऐसी दृष्टि से देखिए।।
साथ उनके हूं सदा साये की माफिक।
फिर भी दूर हूं क्योंकि लिपटना नहीं आता!
सुजान के भी तीन विभाग है: शारीरिक,मानसिक और आत्मिक।। कहीं कभी-कभी हम किसी को शरीर से जानते हैं। दूसरी मन की सुजानता हम इसका मन पहचानते हैं उनके प्रति संवेदना प्रगटती है।। लगाया जाए वह ध्यान नहीं लग जाए वह ध्यान है। मेरे लिए ध्यान भजन है।।
पर हित सरिसधरम नहीं भाई।
पर पीड़ा सम नहीं अधमाइ।।
में वैसे कृपा भी शारीरिक मानसिक और आत्मिक कृपा होती है।।
रामकथा में शिव जी के पास बैठकर उमा ने राम जन्म के बारे में पूछा और शिव जी ने संक्षिप्त में राम जन्म के पांच कारण बताएं और फिर अयोध्या में राजा दशरथ के वहां पुत्र कामेष्टी यज्ञ के बाद यज्ञ में से खीर निकली और सभी माता सागर्भा हुई और राजा दशरथ के महल में माता कौशल्या की कोख में राम अवतरित हुए।। परम तत्व अवतरण करता है और उतरते ही माता ने राम को छोटे बालक कैसे होते हैं वह सिखाया और राम के प्रागट्य पर जबलपुर की व्यास पीठ से पूरे त्रिभुवन को राम जन्म की बधाई के साथ आज की कथा को विराम दिया गया।।
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