Homeगुजरातज्ञान योग तिक्ष्ण है।।

ज्ञान योग तिक्ष्ण है।।

ज्ञान को शास्त्रों ने यज्ञ कहा है।

ज्ञान,स्वाध्याय,योग यज्ञ करने वालों को गीता जी ने तिक्ष्ण कहा है।।

ग्रंथ से भाषांतर मिलता है,भावांतर कहां मिलता है!

अतृप्ति मार देगी,अतृप्ति जीवित अग्नि संस्कार है।।

यहां तीन योग संपन्न हुए हैं:तीव्र भक्ति योग,तिष्ण ज्ञान योग और तृप्ति का कर्म योग।।

ज्ञान में तिष्णता,भक्ति में तीव्रता और कर्म में तृप्ति होनी चाहिए।।

दहशत कुछ देती है,मेहनत कुछ-कुछ देती है लेकिन उनकी रहमत सब कुछ देती है।।

शृंगी ञुषि की आश्रम भूमि,तपस्थली लखीसराय से चल रही रामकथा के छठ्ठे दिन श्रीमद् भागवत का एक मंत्र अकाम: सर्व कामहापरिपूर्णत- यानी जिसको कोई कामना नहीं है और यदि कामना है तो सिर्फ मोक्ष की कामना है,अथवा सर्व काम पूर्ण हो जाए ऐसा यज्ञ श्रृंगी ने करवाया। यहां पुत्र काम शब्द है। ऐसी इच्छा रखने वाला प्रज्ञावन पुरुष कैसे सफल होंगे?एक शब्द लिखा है तिव्रेन भक्ति योगेनयजेतपुरुषम परम… में जीस सराय में बैठा हूं मेरी बुद्धि समझ पा रही है कि यहां तीव्र भक्ति योग से काम यज्ञ हुआ है। भगती समेत मुनि आहुति दिन्ही। एक दूसरा शब्द है तीक्षेण ज्ञान योगेन-ज्ञान योग तिक्ष्ण है।। ज्ञान को शास्त्रों ने यज्ञ कहा है। तो यहां अग्नि से चरुप्रगटेहै।ज्ञान,स्वाध्याय,योग यज्ञ करने वालों को गीता जी ने तिक्ष्ण कहा है।। एक ऐसा ज्ञान योग जो एक प्रहार से सब खत्म कर देता है।। और सकल काज हो सिद्ध तुम्हारा… यह राम रहस्य है।।ग्रंथ से भाषांतर मिलता है भावांतर कहां मिलता है! ऐसे रहस्य गुरु मुख से खुलते हैं। काज का मतलब कर्म है।।मैंने अपना कर्म ठीक से पूरा किया उसकी मुझे तृप्ति है।। तृप्तेन कर्म योगेन.. प्रत्येक व्यक्ति को अपने कार्य की तृप्ति होनी चाहिए।। अतृप्ति मार देगी,अतृप्ति जीवित अग्नि संस्कार है।। फल क्या मिला इसमें ना जाओ। मेरे हिस्से में जो आया मैं ईमानदारी से किया उसकी एक डकार आनी चाहिए।।कर्म करते समय रस आना चाहिए रस ही तृप्ति देगी।। पांच रोटी से भूख जाएगी प्यास नहीं जाएगी।।प्यास पानी या रस से जाएगी। यहां तीन योग संपन्न हुए हैं:तीव्र भक्ति योग,तिष्ण ज्ञान योग और तृप्ति का कर्म योग।। जो भी कर्म करें तसल्ली होनी चाहिए।

श्रृंगी ऋषि बहुत वेदों के ज्ञाता है। लेकिन अथर्ववेद उनका खास था क्योंकि अथर्ववेद में कामना पूर्ण करने वाले मंत्र ज्यादा है। धन प्राप्ति के लिए,प्रतिष्ठा के लिए,यश,कीर्ति के लिए,पुत्र प्राप्ति के लिए मंत्र मिलेंगे। यज्ञ तिष्ण ज्ञान योग है। लेकिन आहुति स्नेह से दी गई वहां भाव है। भक्ति में तीव्रता होनी चाहिए भक्ति प्रमादी ना होनी चाहिए। महाभारत में भी पुत्र कामेष्टी यज्ञ है लेकिन रामचरितमानस मर्यादा का ग्रंथ है इसलिए हम ज्यादा गहराई में नहीं जाएंगे।। अकेले शृंगी से यज्ञ नहीं हो पाएगा इसमें शांता भी साथ चाहिए। शांता का और कोई रोल नहीं दिखता ज्ञान में तिष्णता,भक्ति में तीव्रता और कर्म में तृप्ति होनी चाहिए।। दहशत कुछ देती है,मेहनत कुछ-कुछ देती है लेकिन उनकी रहमत सब कुछ देती है।।

कथा प्रवाह में बालकांड में राम की लीलाओं, अहल्या की मुक्ति का प्रसंग और फिर धनुष्य यज्ञ का गान किया गया। राम सहित चारों भाइयों का विवाह प्रसंग और सीता सहित चारों राजकुमारी का करुण विदाई प्रसंग और अयोध्या में उत्सव हुआ और बाद में अयोध्या से विश्वामित्र जी की विदाई हुई और बालकांड का समापन हुआ।।

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