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एएससीआई के AdWise कार्यक्रम ने 2,063 स्कूलों के 10 लाख छात्रों तक पहुंच बनाई

  • कक्षा 3 से 8 के 10,66,374 छात्रों ने विज्ञापन साक्षरता सत्रों में भाग लिया।
  • कार्यक्रम ने 13 राज्यों में 8 भाषाओं में पहुंच बनाई और बच्चों को विज्ञापनों को जिम्मेदारी से समझने के लिए जरूरी सोचने की क्षमता दी।
  • कार्यक्रम के असर में विज्ञापन साक्षरता के स्तर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।     

मुंबई | 18 मई 2026 | एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया, यानी एएससीआई, ने आज घोषणा की कि उसके कक्षा-आधारित विज्ञापन साक्षरता कार्यक्रम एडवाइज़(AdWise)ने 10 लाख से अधिक छात्रों तक पहुंच बनाई है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, राजस्थान, छत्तीसगढ़, दिल्ली एनसीआर, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, पंजाब, असम, गुजरात और तमिलनाडु के 2,063 स्कूलों में कुल 10,66,374 छात्रों तक यह कार्यक्रम पहुंचा है।

यह कार्यक्रम खास तौर पर डिजिटल विज्ञापनों के हर जगह मौजूद होने और नए विज्ञापन रूपों, जैसे इन्फ्लुएंसर विज्ञापन, जहां ब्रांड्स को कंटेंट में शामिल किया जाता है, को ध्यान में रखते हुए एएससीआई एकेडमी ने तैयार किया था। इसका मकसद छात्रों को इस नए विज्ञापन माहौल को समझने के लिए जरूरी कौशल देना और विज्ञापनों की व्यावसायिक प्रकृति को पहचानने में सक्षम बनाना था।

कार्यक्रम के बाद छात्रों के विज्ञापन साक्षरता स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है, जैसा कि कार्यक्रम से पहले और बाद में किए गए मूल्यांकन परीक्षणों से पता चला है। 

कक्षा 3 से 5 में सुधार 

  • विज्ञापनों के उद्देश्य को सही ढंग से पहचानने वाले छात्रों का प्रतिशत 43% से बढ़कर 94% हो गया।
  • विज्ञापन के दावों पर आलोचनात्मक सोच रखने वाले छात्र 39% से बढ़कर 90% हो गए।
  • विज्ञापनों की प्रेरक मंशा समझने वाले छात्र 32% से बढ़कर 87% हो गए।
  • कंटेंट की नकल करने वाले विज्ञापनों की पहचान करने वाले छात्र 36% से बढ़कर 90% हो गए।
  • विज्ञापन में दिए गए वादों पर विश्वास करने से पहले क्या करना चाहिए, यह समझने वाले छात्र 37% से बढ़कर 93% हो गए। 

कक्षा 6 से 8 में सुधार 

  • विज्ञापनों के उद्देश्य को पहचानने वाले छात्र 45% से बढ़कर 92% हो गए।
  • इन्फ्लुएंसर प्रमोशन्स को समझने वाले छात्र 39% से बढ़कर 88% हो गए।
  • कंटेंट की नकल करने वाले विज्ञापनों की पहचान करने वाले छात्र 31% से बढ़कर 84% हो गए।
  • ऑनलाइन सुरक्षा को समझने वाले छात्र 45% से बढ़कर 91% हो गए।
  • विज्ञापनों की प्रेरक मंशा समझने वाले छात्र 36% से बढ़कर 88% हो गए। 

इंटरैक्टिव क्लासरूम सत्रों के जरिए यह कार्यक्रम छात्रों को विज्ञापनों की पहचान करने, कंटेंट और प्रमोशन के बीच अंतर समझने, प्रेरक संदेश तकनीकों को समझने और उपभोक्ता तथा डिजिटल नागरिक के रूप में सही फैसले लेने में मदद करता है। 

यह सत्र 8 भाषाओं में संचालित किए गए: अंग्रेजी, हिंदी, मराठी, कन्नड़, तमिल, तेलुगु, गुजराती और असमिया। 

मनीषा कपूर, सीईओ और सेक्रेटरी जनरल, एएससीआई ने कहा, “आज के बच्चे ऐसे माहौल में बड़े हो रहे हैं जहां विज्ञापन और कंटेंट गहराई से जुड़े हुए हैं। कार्यक्रम का असर आंकड़ों से साफ दिखता है – सभी मानकों पर स्कोर क्लासरूम सत्रों के बाद दोगुने से भी अधिक हो गए। इसका मतलब है कि एक कहीं अधिक जागरूक पीढ़ी तैयार हो रही है। मीडिया और विज्ञापन साक्षरता आज की दुनिया में महत्वपूर्ण जीवन कौशल हैं, जहां बच्चे बहुत छोटी उम्र से ही कंटेंट और ब्रांड्स के संपर्क में आ रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि आगे और ऐसे कार्यक्रमों तथा पाठ्यक्रम में इनके समावेश की दिशा में काम होगा। हम अपने पार्टनर SHARP NGO की सराहना करना चाहते हैं, जिन्होंने हमें 10 लाख से अधिक छात्रों तक पहुंचने में मदद की।” 

एडवाइज़कार्यक्रम उम्र के मुताबिक लर्निंग मॉड्यूल, गतिविधियों, वीडियो और क्लासरूम चर्चाओं का उपयोग करता है, जो अलग-अलग छात्र समूहों के लिए तैयार किए गए हैं। छात्रों के अलावा, इस पहल में शिक्षकों और माता-पिता के लिए भी संसाधन सामग्री दी गई है, ताकि क्लासरूम के बाहर भी सीखना जारी रहे। 

एएससीआई लगातार जिम्मेदार विज्ञापन प्रथाओं और उपभोक्ता जागरूकता को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है, खासकर बच्चों और युवा दर्शकों के लिए। एडवाइज़के जरिए संगठन का लक्ष्य पूरे भारत के स्कूलों में विज्ञापन साक्षरता को और फैलाना है।

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