
परमात्मा क्रीडा करता है,कभी कुछ फेंकता है, कभी कुछ खींच लेता है और कभी हमारे आसपास हमें घीर लेता है।।
आश्रित ना समझी पर तुल आये तब परमात्मा कौतुक करते हैं और माया को प्रेरित करते हैं,वही माया को वापस खींच लेता है।।
गुरु की पादूका, यज्ञ, तुलसी, सदग्रंथ और माला-हमारा सौभाग्य है,महालक्ष्मी है।।
हमारा क्रिसमस ट्री तुलसी है।।
सप्त शिखर तिरुमला की चोटी पर भगवान बालाजी तिरुपति के सांन्निध्य में चल रही रामकथा का छठ्ठा दिन बापू ने कहा कि जिन तीन पंक्ति को लेकर हमने कथागान शुरू किया है उन तीन पंक्ति का गहराई से दर्शन करवाते -पहली पंक्ति में प्रेरि शब्द लिखा है।यह प्रेरित करता है।ईश्वर सक्रिय हुए हैं। इसलिए वहां प्रेरित लिखा है।। दूसरी पंक्ति में राम रमापति कर धनु वहां खींचे शब्द, ईश्वर खींचता है। यह अद्भुत ग्रंथ है,यह किताब नहीं है साधुओं का कलेजा है।।एक-एक शब्द महत्व का है। तीसरी बार सप्तसागर मेखला यानी कि ईश्वर हमारे आसपास हमें पूरी तरह से घीरे हुए हैं।। परमात्मा ऐसा करता है क्योंकि परमात्मा विनोदी है। लीला शब्द तो प्यारा है ही लेकिन क्रीडा करता है।। लीला में भी मर्यादा है राम बनकर आए तो वहां मर्यादा का ध्यान रखना पड़ता है। कृष्ण लीला में स्वतंत्रता ज्यादा है।। परमात्मा क्रीडा करता है।। कभी कुछ फेंकता है, कभी कुछ खींच लेता है और कभी हमारे आसपास हमें घीर लेता है।।
बापू ने बताया की प्रतिष्ठा पाई हो लेकिन हरि को नहीं भजा और पैसे है लेकिन राम नाम नहीं लिया वह सब बालीसता है वह सब बच्चे हैं।।अर्थ जैसे हस्तांतरित किया जाता है वैसे धर्म भी हस्तांतरित करना।। एक उम्र हो जाए फिर घर पर बैठना चाहिए गुरु के पास बैठने से बोध प्रकट होता है।। आश्रित ना समझी पर तुल आये तब परमात्मा कौतुक करते हैं और माया को प्रेरित करते हैं। वही माया को वापस खींच लेता है।। हरी संबंधी कोई भूल हो जाए तो प्रायश्चित है शिव नाम।। मस्तिष्क में संशय,वहम भय, संदेह सब कीड़े हैं और परमात्मा यह संदेह खींच लेते हैं तब हम मुक्त हो जाते हैं।।और तीसरी क्रिया है उसे खोजने जाना नहीं पड़ता वह मेखला या कि हमारे आसपास घिरकर ही बैठा है।
माया को प्रेरित की जाती है, संदेह खिंचा जाता है और परमात्मा हमें घेर कर रहते हैं।।
बापू ने आज पांच महालक्ष्मी रूपी पांच सौभाग्य की बात करते हुए कहा पहले सौभाग्य गुरु की पादुका है।। पादुका परम लक्ष्मी है।हमारा सौभाग्य है।।पादूका षडेश्वर छ ऐश्वर्य हमें देता है।। पादुका हमारा रक्षण करती है और पादुका की रक्षा के लिए ईश्वर संपूट देते हैं।। पादुका राम मंत्र रूपी दो अक्षर है।। पादुका हमारे कुल की मर्यादा की रक्षा करती है और पादुका कर्म करने के लिए हमें प्रेरित करती है। दूसरा सौभाग्य-यज्ञ है। यज्ञ में मुख्य देवता अग्नि होता है। ज्ञान यज्ञ,जीवन यज्ञ,प्रेम यज्ञ ऐसे यज्ञ बताएं।। गीता ने सात्विक,राजसी और तामसी तीन प्रकार के यज्ञ कहे हैं। चौथ सौभाग्य है तुलसी।। तुलसी रूपी पौधा वृंदा विष्णु के साथ विवाह होती है।।
आज जिसका दिन बाजपेई का जन्मदिन,इशु ख्रिस्त का जन्मदिन,मदन मोहन मालवीय जी का जन्मदिन और 2014 में आज के दिन को तुलसी दिन घोषित किया गया है।। हमारा क्रिसमस ट्री तुलसी है। तुलसी का पौधा, तुलसीदास जी गोस्वामी भी हमारा सौभाग्य है।। और तुरियातित राम,लक्ष्मण और सीता से बना शब्द तुलसी भी परम लक्ष्मी है।। चौथा सौभाग्य वेद से लेकर मानस तक हमारा परम भाग्य सदग्रंथ हमारा सौभाग्य है।।
और पांचवा माला हमारा सौभाग्य है।। माल हमारी परम लक्ष्मी है।। माला हमें मालामाल कर देती है।। सात प्रकार की माला,माला सप्तक बताते हुए बापू ने कहा एक है करमाला जिसे हम बेरखा बोलते हैं। दूसरी जपमाला, फिर कंठ माला,मंत्र माला,मन माला,सांसों की माला और सातवीं गुरु माला यह हमारा माला सप्तक है।।
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