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डलकोफ्लेक्स® ने लॉन्च किया ‘नो कॉन्स्टीपेशन’ कैम्पेन – अब कब्ज़ पर खुलकर होगी बात, मुस्कान के साथ

हास्य और संवेदनशीलता के साथ, डुलकोफ्लेक्स® पेश कर रहा है पाचन स्वास्थ्य पर बातचीत का नया तरीका

मुंबई | 16 अक्टूबर 2025: भारत में हर पाँच में से एक व्यक्तिकब्ज़की समस्या से परेशान है।पाचन स्वास्थ्य के भरोसेमंद नामडलकोफ्लेक्स® ने इस विषय पर खुलकर बातचीत की पहल करते हुए अपना नया कैम्पेन ‘नो कॉन्स्टीपेशन (kNOw Constipation)’ लॉन्च किया है।इस अनूठे अभियान का उद्देश्य देश की सबसे आम लेकिन कम चर्चा वाली स्वास्थ्य समस्या–कब्ज़ – को लेकर लोगों की झिझक दूर करना और जागरूकता बढ़ाना है।

यह नया कैम्पेनहल्के-फुल्के हास्य और सहज संवादके ज़रिए कब्ज़ पर बात को सामान्य बनाने की कोशिश करेगा – खासकरमहिलाओं के बीच, जो अक्सर इस विषय पर बात करने में झिझक महसूस करती हैं।कब्ज़ पुरुषों और महिलाओं दोनों को प्रभावित करता है, लेकिन महिलाएँ जैविक, शारीरिक और हार्मोनल कारणों से इसके प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं।इसके साथ ही, वे चर्चा करने और इलाज करवाने में भी ज़्यादा हिचकिचाती हैं – यही कारण है किडलकोफ्लेक्स® इस विषय को एक नए, संवेदनशील अंदाज़ में सामने ला रहा है।

भारत की सबसे आम लेकिन कम चर्चा वाली स्वास्थ्य समस्या पर चुप्पी तोड़ने के लिए, डलकोफ्लेक्स® ने अपने ‘नो कॉन्स्टीपेशन’ कैम्पेन के ज़रिए कहानी कहने का नया तरीका अपनाया है।इसका मकसद है लोगों कोवैज्ञानिक और समय पर इलाजके महत्व से अवगत कराना।

हास्य को रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जोड़ने और संदेश को प्रभावशाली बनाने के लिए, मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियंस–आंचलअग्रवाल, सृष्टीदिक्षितऔरसौम्‍यावेणूगोपालइसपहलकाहिस्साबनेहैं।जल्दहीगुरलीनपन्‍नू, जेमीलीव्‍हर, श्रेयारॉयभीइससेजुड़नेवालीहैंइस नए और ताज़ा अंदाज़ सेडलकोफ्लेक्स® कब्ज़ पर बातचीत कोखुला, सहज और सशक्त संवादमें बदल रहा है।

इस अवसर पर ओपेला सीएचसी इंडियाकीब्रांड और इनोवेशन हेड, नूपुर गुरबक्षानी ने कहा,“कब्ज़ पर बने ज़्यादातर विज्ञापन पुरुषों पर केंद्रित होते हैं और अक्सर मजाकिया अंदाज़ में पेश किए जाते हैं, जिससे यह गंभीर स्वास्थ्य समस्या छोटी लगने लगती है।हमारा उद्देश्य है कि स्वास्थ्य सेवाएँआसान और सबके लिए सुलभबनें।
‘नो कॉन्स्टीपेशन’ कैम्पेन इसी दिशा में एक कदम है – हम चाहते हैं किमहिलाएँ इस बातचीत की अगुवाई करेंऔर समाज में कब्ज़ को लेकर सोच में बदलाव लाएँ।जब हम कब्ज़ को समझेंगे, तभी हम इसे रोकने और सही तरीके से इलाज करने में सक्षम होंगे।”

यह कैम्पेन सिर्फ डिजिटल प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रहेगा।डलकोफ्लेक्स® इसे एकसमग्र जागरूकता अभियानके रूप में आगे बढ़ा रहा है, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों मेंऑन-ग्राउंड एक्टिवेशन, सामुदायिक कार्यक्रम, औरदेशभर के रेडियो चैनलोंके माध्यम से लोगों से सीधा जुड़ाव किया जाएगा।बातचीत को ऑफलाइन लेकर जाकर, ब्रांड का उद्देश्य है किशहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रोंमें कब्ज़ के प्रति जागरूकता को व्यापक रूप से फैलाया जाए।

नीलसन U&A 2024 (फंक्शनल + परसेप्चुअल)रिपोर्ट के अनुसार,भारत में हर दिन लगभग 27.6 करोड़ लोगकब्ज़ से प्रभावित हैं।इनमें से लगभगएक-तिहाई लोग कभी चिकित्सकीय मदद नहीं लेते, और करीबआधे लोग घरेलू उपायोंपर निर्भर रहते हैं, जो हमेशा कारगर नहीं होते।सालों से लोकप्रिय संस्कृति और विज्ञापनों ने कब्ज़ को मज़ाक का विषय बना दिया है, जिससेमरीजों की असली तकलीफको अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।

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