
*आयोजन ही नहि एक दैवी अनुष्ठान संपन्न होने जा रहा है:कोविंद जी।।*
*उपराष्ट्रपति ने बताया की सनातन का नाश जल्द नहि हो सकता क्योंकि हरेक भारतीय के दिल में राम रहते है।।*
*गुरु शरणानंद जी ने कहा की बापु सेतुबंध का आदर्श उतरदायित्व निभा रहे है।।*
*चिदानंद जी ने कहा कि भारत का सौभाग्य है कि यशस्वी तपस्वी प्रधानमंत्री मिले।।*
*सत्य सनातन है,प्रेम सनातन है,करुणा सनातन है, अहिंसा सनातन है।।*
*विश्व में किसी को धिक्कार और तिरस्कार ना करें वह सनातन धर्म का लक्षण है।।*
*राम,कृष्ण,शिव सनातन पुरुष है।।*
*बहिर शत्रु को मारे वह वीर है,आंतरिक शत्रु को मारे वह महावीर है,लेकिन किसी को मारे बिना तारे वह परमवीर है।।*
*परम धरम श्रुति बिदित अहिंसा।*
*पर निंदा सम अघ न गरिसा।।*
*धरमु दूसर न सत्य समाना।*
*आगम निगम पुरान बखाना।।*
*रामहि केवल प्रेम पियारा।*
*जानि लेउ जो जाननिहारा।।*
*जेहि बिधि प्रभु प्रसन्न मन होइ।*
*करुणा सागर किजिअ सोइ।।*
इन चार बीज पंक्तिओं का गायन कर के
प्रोटोकॉल के मताबिक दो बार राष्ट्रगान गवाने के बाद पूर्व राष्ट्रपति कोविंदजी,उप राष्ट्रपति राधाकृष्णन जी और धर्मपीठ के संतो के हसत्तो दीप प्रागट्य एवं भारत सरकार ने प्रकाशित की हूइ रामयात्रा की डाक टिकिट का अनावरण हुआ।।
आयोजन ही नहि एक दैवी अनुष्ठान संपन्न होने जा रहा है ऐसा कोविंद जी ने बताया।।उपराष्ट्रपति ने बताया की सनातन का नाश जल्द नहि हो सकता क्योंकि हरेक भारतीय के दिल में राम रहते है।।
गुरु शरणानंद जी ने कहा की बापु सेतुबंध का आदर्श उतरदायित्व निभा रहे है।।
चिदानंद जी ने कहा कि भारत का सौभाग्य है कि यशस्वी तपस्वी प्रधानमंत्री मिले।दुनिया का सबसे बडा और सब से उंचा राममंदिर बनने जा रहा है।।
यह चार बी पंक्तियों का गायन करके बापू ने कहा कि लाभ के लिए नहीं विश्व के शुभ के लिए और जहां संघर्ष और युद्ध हो रहा है उनके सामने शांति के संदेश के लिए यह संस्था की स्थापना की गई है।। विषय पहले से तय कर लिया गया था। सनातन शब्द का रामचरितमानस में समावेश नहीं है। लेकिन सत्य सनातन है,प्रेम सनातन है,करुणा सनातन है, अहिंसा सनातन है।।इसलिए चार पंक्ति में धर्म,अर्थ, काम और मोक्ष छिपी है।।वैदिक सनातन धर्म है वहां वैदिक शब्द को समझिए तो वैश्विक दिशा जो धर्म वैश्विक दिशा दिखाती हो वह सनातन है।।और एक शब्द है धिक- यह शब्द पर से वैधिक विश्व में किसी को धिक्कार और तिरस्कार ना करें वह सनातन धर्म का लक्षण है।। ना आदि ना अंत।।कइ धर्म को काल गणना में बांधा गया है।। राम,कृष्ण,शिव सनातन पुरुष है।।महावीर,बुद्ध की धारा में सनातन के सूत्र मिलते हैं।। बहिर शत्रु को मारे वह वीर है,आंतरिक शत्रु को मारे वह महावीर है,लेकिन किसी को मारे बिना तारे वह परमवीर है।।
फिर ग्रंथ परिचय वंदना प्रकरण और पहले कांड के सात मंत्र का संक्षिप्त गायन करके आज की कथा को विराम दिया गया।।
यह रामकथा की कुछ विशेष बात यह है कि पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी की अध्यक्षता में एवं विश्व शांति केंद्र और अहिंसा विश्व भारती के स्थापक आचार्य प्रसिद्ध जैनाचार्य लोकेश मुनि जी के मार्गदर्शन में यह कथा होने जा रही है।
जैनाचार्य लोकेश मुनि जी ने व्यक्तिगत रूप से संतो महंतों,अनगिनत धार्मिक लोगों,राजकीय,सामाजिक और समाज के विधविध स्तर के लोगों को व्यक्तिगत जा कर यह रामकथा का निमंत्रण दिया।।
दिल्ली के प्रगति मैदान में प्रतिष्ठित भारत मंडपम में यह कथा हो रही है।
अमेरिका,ब्रिटन,कनाडा सहित विधि देश तथा भारत के विभिन्न राज्यों में से बड़ी तादात में 4000 से ज्यादा श्रद्धालुओं यह कथा में शामिल है।
यहां कथा से पहले सादगी भरा लेकिन दिव्य उद्घाटन समारोह भी हुआ।
विश्व शांति मिशन के लिए यह रामकथा का आयोजन हुआ है।।
रामकथा में सम्माननीय व्यक्तियों को बुलाए गए जिसमें जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि,जगद्गुरु शंकराचार्य राज राजेश्वरानंद,अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी,परमार्थ निकेतन आश्रम अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती,पतंजलि के आचार्य बालकृष्ण जी और योगाचार्य स्वामी रामदेव जी महाराज,महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद जी
साथ ही माननीय वडा प्रधान श्री,केंद्रीय मंत्रिओं, विविध राज्यों के मुख्यमंत्री श्री,आध्यात्मिक गुरुजनों,उद्योगपति,शिक्षण विद, समाज सेवको, चिंतको को विशेष आमंत्रण दिया गया।
सम्माननीय संत जनों में कार्ष्णि पीठाधीश गुरु शरणानंद जी,निरंजन पीठाधीश स्वामी कैलासानंद गिरी,आर्ट ऑफ लिविंग के श्री श्री रविशंकर, पतंजलि योगपीठ के स्वामी रामदेव,राम जन्मभूमि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद दास गिरी,आर्ष विद्या मंदिर राजकोट के स्थापक स्वामी परमात्मानंद जी,आंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लेखक कवि और कथाकार कुमार विश्वास,कृष्ण कृपा धाम संस्था के स्वामी ज्ञानानंद जी-गीता मनीषी,स्वामी चिदानंद सरस्वती,विश्व जागृति मिशन संस्था के स्थापक सुधांशु जी महाराज,सांदीपनी विद्या निकेतन संस्था के स्थापक एवं प्रसिद्ध कथाकार भाई श्री रमेश भाई ओझा,जगतगुरु सतुआ बाबा, संजीव कृष्ण ठाकुर,जया किशोरी जी आदि।
साथ ही दिल्ली के मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने संपूर्ण सहयोग दिया है और भी अनेक जानी-मानी हस्तियां इस रामकथा में जैनाचार्य जी द्वारा निमंत्रित की गई है।।

