Homeगुजरातचोरी करना तो पाप है संग्रह करना भी पाप है।।

चोरी करना तो पाप है संग्रह करना भी पाप है।।

श्रद्धा रूपी माता के तीन रूप भगवत गीता में बताया है:सात्विक,राजसी और तामसी श्रद्धा।।
यह नव दिन सामूहिक श्राद्ध का,मातृ पितृ तर्पण का दिन है।।
शिव जी के पांच मुख विश्वास रूपी शिव के पांच रूप है।।
मंत्र मूर्ति और माला बदलना नहीं चाहिए।।
निरंतर मंत्र जाप से माला का रंग बदलता है और जीवन का ढंग बदलता है।।

यवतमाल विदर्भ महाराष्ट्र से कल से शुरु हूइ रामकथा के आज दूसरे दिन बापू ने बताया कि 100 करोड़ रामायण है।।यहां ली गई दोनों पंक्ति में से पहली पंक्ति में पिता का नाम आगे है दूसरी पंक्ति में माता का नाम पहले लिखा है ऐसा एक अच्छा प्रश्न मिला है।।
बापू ने कहा हमारे शब्दकोश में जननी शब्द का अर्थ है जिनकी कोख से जन्म लिया उसे जननी कहते हैं।।कैकयी राम की जननी नहीं,कौशल्या जननी है।।लेकिन राम का यहां संकेत है रघुवंश के राम को जन्म कौशल्या ने दिया लेकिन मुझे वनवास देकर राम राज्य के राम का जन्म कैकई ने दिया है। वचन कैकयी ने मांगे तब दशरथ ने दो वचन दिए इसीलिए बाप के वचन की प्रतिष्ठा के लिए उसे आगे लिखा गया है।।
हमारे यहां एक आनंद रामायण है। वहां सर्ग है। भगवान राम के पितृओं की बड़ी लंबी लिस्ट 61 पीढ़ी का नाम वहां दिया गया है।। हमें अपने पूर्व की पांच सात पीढ़ी को याद रखना चाहिए। बहुत आगे जाने की जरूरत नहीं।इसलिए लव कुश की कथा मिलती है। सात पीढ़ी याद ना रहे तो पांच पीढी और कम से कम तीन पीढ़ी याद रखनी चाहिए।।
भगवान राम की दिनचर्या का भी आनंद रामायण में लिखा गया है।।
सब अपने मातृ पितृ को याद करना।यह नव दिन सामूहिक श्राद्ध का,मातृ पितृ तर्पण का दिन है। हमारे सबसे पहले माता-पिता पार्वती और शिव है शिव है विश्वास।।शिव अजन्मा है। जन्म नहीं मृत्यु नहीं। वह परमपिता है। सृष्टि जब असत होती है तब शिव तांडव करके सत सृष्टि की रचना करता है। शिव जी के पांच मुख विश्वास रूपी शिव के पांच रूप है।।
इसमें पहला रूप वचन विश्वास। हमें जीवन के लिए कोई श्रेष्ठ के वचन पर परम विश्वास,माता-पिता गुरु शास्त्र के वचन पर विश्वास करना।।
दूसरा ध्रुव विश्वास उसे अचल और अनुपम कहा है। तीसरा मंत्र विश्वास। गुरु ने दिए मंत्र पर विश्वास करना।।
मंत्र जाप मम दृढ़ विश्वासा।
पंचम भजन सो बेद प्रकासा।।
डोंगरे जी महाराज कहते थे मंत्र मूर्ति और माला बदलना नहीं चाहिए।। निरंतर मंत्र जाप से माला का रंग बदलता है और जीवन का ढंग बदलता है।।
चौथा पात्र विश्वास। पात्रता का विश्वास पकड़ कर रखना।
सूफीवाद में कहा है गुरु के पास एक कला होती है सूफीवाद में उसे डिजाइन कहा है।।
पांचवा बट विश्वास।अचल विश्वास। वट फल नहीं विश्राम देता है।।
चोरी करना तो पाप है संग्रह करना भी पाप है।। अच्छी संतान होगी तो कमा लेंगे,बुरे होंगे तो फना कर देंगे!
हद से ज्यादा वस्तु इकट्ठी होती है तो गति नहीं होती आवेग आता है।।
और हमारे मॉं है भवानी। श्रद्धा रूपी माता के तीन रूप भगवत गीता में बताया है:सात्विक,राजसी और तामसी श्रद्धा।। सात्विकी श्रद्धावान देवताओं की पूजा करता है,राजसी श्रद्धा वाला यक्षों की और तामसी श्रद्धा वाला भूत प्रेत की पूजा करता है।। श्रद्धा को गाय सामान भी बताया है।। सात्विकी गाय अच्छा दूध देती है राजसी गाय अंदर से बीमार होती है और तामसी गए अपने शिंग सबको मारती रहती है।।
यहां विविध वंदना प्रकरण के बाद सीताराम की वंदना और राम नाम नाम वंदना का प्रकरण का गान किया गया।।नाम महाराज की वंदना के बाद आज की कथा को विराम दिया गया।।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read