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जगत की कोई भी सभ्यता जिन्होंने मातृ स्वरूपों को स्विकारा नहीं वह कालांतर में विफल गई है।।

है वंदे मातरम! तुं आदिशक्ति,परामाया,तुम ब्रह्मांड भांडोदरी है।।
पांचो माता सुजलाम-सजल होती है।।
पांचो माता सुफलाम है।।
स्मरण छूट जाए तो चिंता नहीं स्मृति बनी रहनी चाहिए।।
स्मरण प्रयास से और स्मृति प्रसाद से मिलती है।।

घाटकोपर से आयोजित राम कथा के दूसरे दिन के आरंभ में सद्भावना वृद्धाश्रम के संयोजक मित्तल खेताणी ने बताया कि कल बापू ने पहले आहुति दी और आज दानगंगा का प्रवाह बहने लगा।। अमेरिका से नरेश भाई पटेल ने एक 1 करोड़ रुपए की धन राशि की घोषणा की।। अमेरिका से निशा डेदिया ने 50000 वृक्ष के उछेर के लिए।क्रीसन्ट ग्रुप ने 3000 वृक्ष, रीना डेवलपर्स से हरेशभाइ संघवी ने 3000 वृक्ष,गार्डीयन के कौशल भाई ने 3000 वृक्ष के बारे में अपनी सहायता घोषित की।। इन दिनों माहाराष्ट्र के गृह मंत्री देवेंद्र फड़नवीस जी और कथा मनोरथी पराग भाई के बीच मीटिंग हुई और पुरे माहाराष्ट्र को ग्रीन करने के लिए भी विचार प्रस्तुत किया गया।।आज राम कथा में सोलीसिटर देसाई साहब की विशेष अपस्थिति रही।।

कथा के आरंभ में पांच माता को प्रणाम करते हुए बापू ने बताया जगत की कोई भी सभ्यता जिन्होंने मातृ स्वरूपों को स्विकारा नहीं वह कालांतर में विफल गई है। क्योंकि उद्धव स्थित संहारकारिणीं क्लेश हारिणीं सर्वश्रेयस्करीं मां जानकी, मां पार्वती भव भाटव विभव पराभव कारिणीं है।। जगत माता पराशक्ति मूल में है उसको स्वीकार्य नहीं वह सभ्यता ज्यादा टिकती नहीं।।

यूनान में सुकरात सोक्रेटीस पूरा छाया है फिर भी डेल्फी देवी को स्विकारा गया है।। खुद सोक्रेट्स भी डेल्फी देवी से मार्गदर्शन पाता था।।

कोई विचारधारा में मरियम को माना गया, जेरूसलम के चर्च में मदर मैरी की गोद में सोए हुए इशु ख्रीस्त के शिल्प को देखते हैं तो लगता है कि इशु ख्रीस्त से कई गुना ज्यादा मदर मेरी अच्छी है।। कहीं राबिया है कहीं और मातृ शक्ति पड़ी है जो बल देती है।।

पूरा महाराष्ट्र मावली ज्ञानदेव मावली तुकाराम सबको मां के साथ जोड़ते हैं।। चैतन्य महाप्रभु शशि माता और विष्णु प्रिया ना होती तो गौरांग के रूप में हमें ना मिलते। मूल में मातृत्व पड़ा है।।

बौध धर्म में यशोधरा और भगवान बुद्ध की माता का महिमा है। महावीर की धारा में महावीर की माता को सपने आए।।नींव में मॉं है।। वैदिक परंपरा में पराम्बा जगदंबा है। इसलिए बंकिम बाबू ने वंदे मातरम के आखिर में मां दुर्गा की स्तुति की है।। 1947 में आजादी की पूर्व रात्रि को संविधान सभा में सलाहकार के रूप में गुरुदेव टैगोर के साथ जो मीटिंग हुई वहां सबसे पहले वंदे मातरम का गान शुरू हुआ और आखिर में जन गण मन का गान हुआ था।। वेद को मानते हैं वहां वेदमाता गायत्री है ब्रह्मा विष्णु और महेश को याद करते हैं तो माता अनुसूया याद आती है।।

कोई विचारधारा है जो मातृशक्ति,देवी,दुर्गा को नहीं मानते ऐसी विचारधारा वाले लोग भूल गए हम भी किसी मां के पेट से निकले हैं।।

है वंदे मातरम! तुं आदिशक्ति परामाया है तुम ब्रह्मांड भांडोदरी है।।

मैं ऐसा मानता हूं कि व्यक्ति को आंख-दृष्टि मॉं से मिलती है। आंख भीगे मॉं की करुणा से है।।आवाज बाप से और हृदय गुरु से मिलता है।।

पूरा वंदे मातरम बिना काट कर बापू ने पेश किया बंकिम बाबू ने मातृभूमि को जगदंबा का रूप देखकर वर्णन किया है।
पांचो माता सुजलाम-सजल होती है। मां के पास दो प्रकार का जल-परिश्रम का और संवेदना का जल है धरती में पानी तीन भाग है,भारत माता में बारिश का पानी,जन्मभूमि में नदी का जल और जन्मदात्री में सदैव सुजलाम होती है।। पांचो माता सुफलाम है रामायण रूपी माता चारों फल-धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष देती है।।

समाज का तेज कम पड़ता है तब बाती को संकोरने का काम व्यास पीठ करती है।।इसलिए आदमी धार्मिक नहीं धर्मशील होना चाहिए।। सर्जक भी सर्जनशील होना चाहिए।।सबसे बड़ा बल आत्म बल से भी बड़ा शील बल होता है।। भारत में जन्म हुआ वही शुभ फल है।।

शंकराचार्य शंकर का अवतार है क्योंकि मूल शंकर अजन्मा है उसे कोई मॉं नहीं मिली तो मां के उदर से प्रकट होने के लिए शंकराचार्य के रूप में आए।। पांचो माता शीतल वायु है सश्य श्यामला होती है। स्मरण छूट जाए तो चिंता नहीं स्मृति बनी रहनी चाहिए।। स्मरण प्रयास से और स्मृति प्रसाद से मिलती है।।

अगली 25 तारीख को अयोध्या में राम मंदिर का ध्वजारोहण हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री के हस्तों होगा वह केवल राम मंदिर के शिखर पर नहीं पूरी पृथ्वी पर ध्वजारोहण होगा।।

फिर वंदना प्रकरण में नाम वंदना का बहुत बड़ा प्रकरण कहते हुए बापू ने कहा कि आपको कोई भी नाम अच्छा लगे वह नाम जप करना।। क्योंकि राम नाम भी है मंत्र भी है।।तुलसी के विचार में रामनाम श्रेष्ठ है।।

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