Homeगुजरातवाणी के पीछे अर्थ दौड़े वह साधु बानी और ऋषि वाणी है।।

वाणी के पीछे अर्थ दौड़े वह साधु बानी और ऋषि वाणी है।।

अर्थ के पीछे वाणी दौडे वो असाधु वाणी है।।

गौरी,गायत्री,गंगा,गीता और गौमातामातृपंचक है।।

माता रूपी गुरु संशय,संदेह और भ्रम मिटाता है,यह तीनों के कारण हमें मोह होता है गुरु मुख मिटाता है।।

गायत्री माता हमारी बुद्धि को प्रकाशित करती है,शुद्ध करती है।

बुद्धि को प्रभावित करने वाले बहुत क्षेत्र है लेकिन  प्रकाशित करना आसान नहीं है ।

रामकथा के तीसरे दिन आरंभ में कल हुए सायंकालीन कार्यक्रमो में पद्मश्री जगदीश त्रिवेदी दिगु बापू और बापू सौरभ शाह से मिले वो सभी सर्जक,गुजराती सर्जक की उपस्थिति के बारे में बताया। कविता का पठन करके कथा का आरंभ किया।।

बापू ने कहा कि सतयुग में धर्म के चार चरण थे लेकिन कलयुग आते-आते एक चरण खत्म हुआ और कलयुग में सिर्फ एक ही चरण बाकी रहा वह है दान। सतयुग के बाद त्रेता युग में दो चरण रहे।। लंडन से आए एक परिवार ने 100 करोड़ का दान का संकल्प किया और मनोरथ है कि 300 करोड़ का दान करके सब कुछ लूटाना है। और कीर्तिदान और मायाभाई का कल का कार्यक्रम के बारे में कहा और बताया की वाणी के पीछे अर्थ दौड़े वह साधु बानी और ऋषि वाणी है।।और अर्थ के पीछे वाणी दौडे वो असाधु वाणी है।।शब्द मरता नहीं लेकिन अदृश्य रहता है कोई ऋषि बोलता है तब प्रकट होता है।।

दुर्गा का स्वभाव है हमें दुर्ग से मुक्त करती है। गोस्वामी जी ने राम को कोटि-कोटि दुर्गा का रूप कहा है।मातृपंचक में सबसे पहले वंदे मातरम के लिए भगवती पराम्बा मूल आदि शक्ति,दूसरी वेद माता गायत्री,तीसरी गीता माता और पांचवी गौ माता के बाद बापू ने कहा कि मूल में गौरी है।।बंकिम बाबू कहते हैं हमारे हाथ में तेरी ही शक्ति और हृदय में तूने दी हुई भक्ति है। गुरु ही मा है गुरु ही गौरी है माता रूपी गुरु संशय, संदेह और भ्रम मिटाता है। यह तीनों के कारण हमें मोह होता है गुरु मुख मिटाता है।।गायत्री माता हमारी बुद्धि को प्रकाशित करती है, शुद्ध करती है। बुद्धि को प्रभावित करने वाले बहुत क्षेत्र है लेकिन  प्रकाशित करना आसान नहीं है ।मदारी भी प्रभावित कर सकता है। शास्त्र हमें प्रकाशित करता है।।गंगा माता हमें पाप से मुक्त करती है और गीता माता हमें विषाद से मुक्त करती है। इसलिए प्रथम अध्याय अर्जुन विषाद योग है।।

विनोबा जी पांडुरंग दादा अखंड आनंद सरस्वती ज्ञानानंद जी बहुत गीता पर काम कर रहे हैं डॉक्टर राधाकृष्णन स्वामी प्रभुपाद और कहीं विदेशियों ने गीता के ऊपर भाष्य किया है।। जोड़ियों में हर साल विराग मुनि के वहां शुरू की गई गीता जयंती होती है। युवा भाई बहनों को अपील करता हूं कि अपनी झोली में गीता और रामायण साथ रखो। भगवत गीता विश्व ग्रंथ है।।

और गौ माता से प्रेम करो गौ माता के पंचगव्य का सेवन करो।।

कथा प्रवाह में कथा का प्रागट्य रामनवमी के दिन कैसे हुआ वह बताते हुए कहा हरि अनंत है और हरि कथा भी अनंत है।।

हमें कथा में ञुचि क्यों है?लोगों को भूख और तरस है इसलिये कथा माता के पीछे भागते है।।

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