Homeगुजरातदंभ कपट और पाखंड यह माया की सेना के योद्धा है।।

दंभ कपट और पाखंड यह माया की सेना के योद्धा है।।

दंभ कपट और पाखंड यह माया की सेना के योद्धा है।।
किसी श्रेष्ठ के ऊपर संशय करने से ज्ञान और वैराग्य का नाश होता है।
वैराग्य एकांत में निवास करता है।।
वाणी का जो ब्रह्मचारी हो ऐसा गृहस्थ बैरागी मार्गी ब्रह्मलोक का अधिकारी है।।
काम क्रोध और लोभ उनके सेनापति है।।
श्री-मद् लक्ष्मी के मद ने किसी को वक्र नहीं बना दिया?
प्रभुता मिलने पर कौन बड़ा नहीं होता?
दूर्वाद और अपवाद करते हैं उसे सन्नेपात होता है।।
मान और मद ने सबको अलग-थलग कर दिया है।।
यौवन के जवर ने किस परेशान नहीं किया?
ममता ने किसके यश का नाश नहीं किया?
उपदेश करना वह आखरी सेवा है।।
कथाओं की संख्या का कोई टारगेट नहीं,मेरा टारगेट आप सब है।।

अत्यंत शुभ वास्तु गुफा से निकलती है ग्रंथ से नहीं निकलती,कोई भी कल्पना और विचार संगम और समन्वय से निकलता है-ऐसा कहते हुए सातवें दिन की कथा का पोलैंड से आरंभ करते हुए बापू ने कहा कि कोई अच्छा श्रोता मिल जाए तो वक्ता के चित् में सूत्र प्रकट होने लगते हैं।।

बापू ने कहा कि तुलसीदास जी ने उत्तरकॉंड में माया रुपी कटक माया का पूरा परिवार लिखा है। वहां कहते हैं दंभ कपट और पाखंड यह माया की सेना के योद्धा है और काम क्रोध और लोभ उनके सेनापति है।।श्री-मद् लक्ष्मी के मद ने किसी को वक्र नहीं बना दिया? अपवाद जरूर होते हैं। प्रभुता मिलने पर कौन बड़ा नहीं होता?दूरवाद और अपवाद करते हैं उसे सन्नेपात होता है।। मान और मद ने सबको अलग-थलग कर दिया है।। यौवन के जवर ने किस परेशान नहीं किया? ममता ने किसके यश का नाश नहीं किया?मत्सर-ईर्ष्या और अदखाइ,जलन के कारण किसको कलंक नहीं लगा? शोक का पवन किसको हीला नहीं देता? भक्ति ही कायम युवान रहती है ज्ञान और वैराग्य बूढ़े हो जाते हैं।।चिंता रूपी सांपिनी ने किसको नहीं खाया? और माया ने किसे नहीं पकड़ा? हर प्रकार की इच्छा रूपी दीमक शरीर रूपी लकड़ी को खाती जाती है।।

तृष्णाओं ने किसी की मत् को मलिन नहीं किया? यह सब माया का परिवार है।। और जगत में माया का कटक व्याप्त है।।

बापू के बारे में वरिष्ठ लेखक और कई पत्रकार अच्छा लिखते हैं, बोलते हैं यह सुनकर बापू ने कहा कि अच्छा लगता है, मैं नहीं कहूंगा कि अच्छा नहीं लगता। दंभ नहीं करूंगा, लेकिन यह कहूंगा कि कोई तो निकला जो व्यास पीठ को समझने वाला निकला है!

कथाओं की संख्या का कोई टारगेट नहीं, मेरा टारगेट आप सब है।।

उपदेश जिन्हें मालूम नहीं होता उसे दिया जाता है क्योंकि उपदेश करना वह आखरी सेवा है।। तुलसी जी लिखते हैं मेरी वाटिका का सुभग मन माली है।। शिव कृपा ही वैराग्य को विकसित करता है।। धर्म का मूल महादेव है।। महादेव नहीं तो कोई धर्म नहीं इसलिए महादेव को पकड़ो! धर्म की जरूरत है,धर्म संस्थाओं की नहीं ऐसा विनोबा जी ने कहा है।। विवेक रूपी समंदर के लिए महादेव पूर्णेन्दु है।बैराग्य रूपी कमल को विकसित करने वाला महादेव रूपी सूर्य है।।वैराग्य का राग सिद्ध करने के लिए महादेव रूपी घराना के पास जाना पड़ेगा।

वैराग्या का नाश कैसे होता है? किसी श्रेष्ठ के ऊपर संशय करने से ज्ञान और वैराग्य का नाश होता है।

वैराग्य एकांत में निवास करता है।।वाणी का जो ब्रह्मचारी हो ऐसा गृहस्थ बैरागी मार्गी ब्रह्मलोक का अधिकारी है।। ज्ञान भक्ति और वैराग्य का निवास स्थान तुलसी जी ने बताया। जैसे पर्णकुटी में राम सीता और लक्ष्मण निवास करते हैं तो लगता है कि ज्ञान भक्ति और वैराग्य है। इसका मतलब वह सादगी में निवास करते हैं।।

कथा को आगे बढाते हुए बताया की अयोध्याकॉंड का आरंभ निवृत्ति से किया गया है।ये भी कहा की किये हुए कर्म का बदला ब्रह्म के बाप को भी देने पडते है।।दशरथ का महागमन,भरत और सारी अयोध्या चित्रकूट और पादूका रुपी आधार पा कर भरत का अयोध्या में लौटना ये पूरा भरत चरित्र भीगी बहती आंखो से सुनाकर आज की कथा भरत जी के चरणों में अर्पित की।।

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