
शहिद हुए हमारे जवानों के प्रति दिलसोजी और श्रध्धांजलि के साथ तुलसीपत्ररुपी राशि अर्पण हुइ।।
परोपकार भी परम धर्म है ।।
जो ग्रंथि मुक्त है ऐसे सब ग्रंथ प्रणाम के योग्य है।। साधु भी सनातन है।।
आज तक पाठ भेद से मुक्त हो ऐसा एकमात्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब बचा है।।
तथाकथित लोगों ने पंडितों को खरीद कर अपने बीन सनातनी श्लोक लिखवा के ग्रंथो में घूसाडे है।।
साधु का परिचय ना आवरण से होता है,ना आचरण से होता है केवल अंतःकरण से पहचाने जाएंगे।।
रामायण,महाभारत इतिहास ग्रंथ है-वह आधा सत्य है पूरा सत्य नहीं है।।
भारत की राजधानी दिल्ही के भारत मंडपम् से प्रवाहित रामकथा रोज नीत नया मोड ले रही है तब आज सातवें दिन की कथा से पहले शहीद हुए हमारे 10 जवानों के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए बापू ने हर एक जवान के लिए 25-25 हजार की राशि और घायलों के लिए ₹11000 की राशि के साथ प्रार्थना और तुलसी पत्र सहित श्रद्धांजलि पेश की।। आज वसंत पंचमी की पूरे जगत को बधाई देते हुए बापू ने कहा कि आज का दिन सनातन सभ्यता में सरस्वती पूजा का दिन माना गया।ज्ञान पूजा का दिन।कईं शास्त्र और ग्रंथ आज के दिन लिखे गए। हर मौसम अपनी जगह। सनातन धर्म का कोई विरोध करें निंदा करें तो समजना की बोध का अभाव है।।लेकिन जहां निंदा होती हो वहां उपस्थित ना रहे।उन सभा से निकल जाना चाहिए।। सनातन धर्म को तुलसी परम धर्म कहते हैं।।परोपकार भी परम धर्म है ।।जो ग्रंथि मुक्त है ऐसे सब ग्रंथ प्रणाम के योग्य है।। साधु भी सनातन है।।
वेद में पाठ भेद ज्यादा नहीं हुआ फिर भी किसी ने यह अनुचित कार्य किया है, पाठ भेद किया है।। लेकिन चिन्मय मिशन, स्वामी गंगेश्वरानंद जी ने अच्छा काम कर के बचाने का काम भी किया है।। आज तक पाठ भेद से मुक्त हो ऐसा एकमात्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब बचा है।।रामचरितमानस में भी पाठ भेद मिलता है।लेकिन गीता प्रेस गोरखपुर ने बहुत बचाया है।।
साधु का आचरण समझ में नहीं आएगा।। साधु का परिचय ना आवरण से होता है,ना आचरण से होता है केवल अंतःकरण से पहचाने जाएंगे।।
ईश्वरीय ग्रंथ किसे कहते हैं वह भी बताते हुए बापू ने युवाओं को कहा कि देह सेवा,देश सेवा,देव सेवा, दिल सेवा और गुरु के आदेश की सेवा करनी चाहिए तथा कथित लोगों ने पंडितों को भी खरीदा और अपने तथाकथित धर्म में ऐसे श्लोक और क्षेपक श्लोक पंडित के पास लिख कर घुसा दिए हैं।।
इस बीच ऐश्वरीय ग्रंथ के पांच लक्षण दिखते हैं:
जो ग्रंथ, आदि ज्ञान जिस ग्रंथ में भरा हो। सृष्टि से पहले का ज्ञान भरा हो वह ग्रंथ सनातन धर्म का ग्रंथ है।। जिस ग्रंथ में इष्ट तर्क की छूट हो, बुद्धि की छूट हो वैज्ञानिक विचार हो वह ऐश्वरीय ग्रंथ है।। जहां कोई भेद न हो। विविधता हो लेकिन विषमता ना हो।। जिसमें इतिहास कम और तात्विक सात्विक बात ज्यादा हो।। रामायण महाभारत इतिहास ग्रंथ है वह आधा सत्य है पूरा सत्य नहीं है।। और जिस ग्रंथ में भक्ति,कर्म,ज्ञान और वैराग्य की परी पूर्णता हो।।जिसे पढ़ने से आंसू आए कर्मम करने की प्रेरणा मिले, हमारी समझ बढे और आखिर सब कुछ छूटे और वैराग्य की ओर गति कराये।।
एक मंत्र जो अथर्ववेद से मिलता है उनका पठन करवा के बापू ने कहा कि जिस विचारधारा का घोड़ा सात रश्मि लेकर काल पर सवार हुआ, सहस्त्र आंखों से उसे घोड़े पर परम पुरुष चारों ओर हर एक भवन में परीक्षण करता हुआ घूमता है यह भी सनातन पुरुष की बात है।।
संक्षिप्त में शिव चरित्र और शिव विवाह के बाद सती के पास राम जन्म के पांच कारण को बताते हुए अयोध्या की तरफ गति करवा के राजा दशरथ के महल में,मां कौशल्या की कूख से राम उर से उदर में अवतरित होते हैं।।
राम जन्म के प्रागट्य का गान करके भारत मंडपम में व्यास पीठ से पूरे त्रिभुवन को राम जन्म की दिव्य बधाइयां देते हुए कथा को विराम दिया गया।।

