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आशीर्वाद पांच जगह,पांच स्थान से मिले तो अस्तित्व भी उसे पूरा करते हैं:पूजान्ते, संध्यान्ते,भोजनान्ते,निशान्ते और ध्यानान्ते।।

हमारे २४ तत्वों की रक्षा राम करता है।।
हमें काम,क्रोध और लोभ से राम बचाता है।।
आंतर जगत में शब्द की कोई जरूरत नहीं।
शब्द ब्रह्म है अशब्द परब्रह्म है।।
सुरक्षा बहिर है और संरक्षण भीतर होता है।।
रक्षक बाहर होता है,संरक्षक अंदर होता है।।
रामकथा विरह,विवेक,विचार,विश्वास और विराग की कथा है।।

मोम्बासा की सुहानी भूमि पर चल रही रामकथा तीसरे दिन में प्रवेश कर रही।बापू ने यहां सांध्य कार्यक्रम होते हैं वह याद करते हुए कहा कि कल हमारे गुजरात के सर्जक साहित्यकार गुणवंत भाई शाह की बेटी अमी शाह और मृगांक शाह ने अपनी मौलिक प्रस्तुति की और साथ ही नृत्य,वंदना और अन्य कार्यक्रम भी बहुत अच्छा हुआ वह प्रसन्नता बापू ने व्यक्त की।।
बापू ने कहा आशीर्वाद पांच जगह,पांच स्थान से मिले तो अस्तित्व भी उसे पूरा करते हैं:पूजान्ते, संध्यान्ते,भोजनान्ते,निशान्ते और ध्यानान्ते- मतलब कोई पूजा करके निकले और आशीर्वाद मिल जाए, संध्या के बाद मिले,कोई अतिथि को भोजन करने के बाद अतिथि से आशीर्वाद मिले,शाम को मिले और ध्यान के अंत में किसी के मुंह से निकले आशीर्वाद फल देते हैं।।किसी अतिथि को भोजन करवाओ।।
किसी को मुस्कुराहट दो इससे बड़ा कोई दान नहीं है हमारे यहां क्रियमाण,संचित और प्रारब्ध कर्म है। लेकिन अग्नि की व्यवस्था है कि कर्म की गठरी जल जाएगी यदि हमारे पास ज्ञानाग्नि,योगाग्नि,विरहाग्नि और प्रेमाग्नि है तो हमारे यह कर्म के फल जल जाते हैं।।
स्वामी रामतीर्थ और स्वामी विवेकानंद अमृतसर में एक मंच पर किसी कार्यक्रम में बैठे थे। स्वामी रामतीर्थ ने विवेकानंद जी से पूछा की घड़ी में क्या समय हुआ है? विवेकानंद जी ने कहा एक! 10 मिनट बाद दूबारा पूछा फिर भी विवेकानंद जी ने कहा एक! बार-बार पूछा,सात बार पूछा अलग-अलग समय पर,विवेकानंद जी ने कहा एक! इसका मतलब है कि यहां सब एक है।। मूल को पकड़ो,डाल को मत पकड़ो।।
आज यहां के गवर्नर भी व्यास वंदना के लिए उपस्थित रहे।।
लोक साहित्य की बात करते हुए बापू ने कहा:
आरा न उतराय इ चोमासे न सांभरे।
एना जेठे पाणी जो ने जाए,
पछी एमां कंकर उडे ‘कागड़ा’
दूला भाया काग कि रचना यह कहती है कि कोई विचारधारा थोड़ा समय जाने के बाद सुख जाती है लेकिन सनातनी परंपरा विचारधारा कभी सूखती नहीं क्योंकि वह आकाश से उतरी है।। हमारे काग बापू लिखते हैं:
मीठप वाळा मानवी जे दि जग छोडी जसे
‘कागा’ एनी काण घर-घर मंडासे।।
मतलब की जो आदमी मिठास से भरा हुआ है यदि वह चला जाएगा तो सभी के घरों में उनकी याद रहेगी।।
आज पुष्प वाटिका का प्रसंग राम लक्ष्मण पुष्प लेकर गुरु के चरण में रखते हैं। तब विश्वामित्र कहते ही कि आप दोनों के मनोरथ सफल रहो। राम के तो मनोरथ थे सीता से ब्याह करने का। लेकिन लक्ष्मण मनोरथ शून्य है। भरत जी का अंक नव है, पूर्णांक है राम का अंक एक है,अवधेश कुमार है।। लेकिन भरत और शत्रुघ्न शून्य अंक है।। विश्वामित्र ने शायद पूछा कि तेरा क्या मनोरथ है? तो लक्ष्मण जी ने कहा कि ब्याह होगा जानकी मेरी मां बनेगी, राम मेरे पिता बनेंगे, मैं निरंतर सेवा करूंगा और यही मनोरथ शायद अयोध्या कांड में माता सुमित्रा ने भी पढ लिया था।।
हम्हारे साथ 24 तत्व जुड़े हैं: पांच ज्ञानेंद्रिय, पांच कर्मेंद्रियां, पंचतत्व,पांच प्राण, मन,बुद्धि,चित्त और अहंकार।।यह 24 तत्वों की रक्षा राम करता है। परम तत्व करता है।।
आंतर जगत में शब्द की कोई जरूरत नहीं।इसलिए मैंने कहा था कि शब्द ब्रह्म है अशब्द परब्रह्म है। सुरक्षा बहिर है और संरक्षण भीतर होता है।। यह रामचरितमानस ही मेरा महादेव है।।यह मानस ही मेरा शिवलिंग है इसलिए आप जो भी पत्र लिखते हैं जो भी कुछ लिखकर भेजते हैं सभी बिली पत्र समझकर इन शिवलिंग पर में चढ़ा देता हूं! पंचतत्व में पृथ्वी के तीन लक्षण है:धीरता, क्षमा और सहनशीलता।।हमारा धैर्य, हमारा क्षमा और हमारी सहनशीलता का रक्षण राम करता है।। जल का देवता वरुण है। वरुण की रक्षा राम ने की है।। पवन वायु की रक्षा राम करते हैं।। अग्नि तत्व की रक्षा राम करते हैं।जानकी जी के विरह के अग्नि को राम ने रक्षा की है।।कथाकार ‘नवल’ कथाकार होना चाहिए,नकल कथाकार नहीं।। अनुकरण नहीं अनुसरण होना चाहिए।।
और एक दृश्य कहते हुए बापू ने कहा भरत चित्रकूट मिलने गए और वहां राम अपने अयोध्या माता-पिता परिवार भाई और अपनी प्रजा को याद करके प्रेम से रक्षा करते हैं।। रामकथा विरह,विवेक,विचार, विश्वास और विराग की कथा है।। सबसे बड़ा दोष क्या है?सभी बाबत में मेरे जैसा कोई होशियार नहीं ऐसा मानना यह सबसे बड़ा दोष है।। और गुण और दोष किसी में भी नहीं देखना वह सबसे बड़ा गुण है जब काम कुपित होता है और हमले करने की सोचता है तब काम क्रोध और लोभ से राम हमारा रक्षण करता है।। इसलिए मैं बार-बार कहता हूं रक्षक बाहर होता है,संरक्षक अंदर होता है।।

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