
भारत से श्रीलंका तक भगवान श्रीराम के पवित्र पदचिह्नों पर पूज्य मोरारी बापू की रामयात्रा
नेगोम्बो (श्रीलंका) | 02 नवंबर 2025: पूज्य मोरारी बापू की ऐतिहासिक मानस रामयात्रा अब एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आध्यात्मिक अध्याय में प्रवेश कर रही है। यह यात्रा भारत से आगे बढ़ते हुए अब श्रीलंका पहुंची है, उस पवित्र भूमि पर, जहां कभी रावण का राज्य था और जहां भगवान श्रीराम का माता सीता जी की मुक्ति का दिव्य अभियान पूर्ण हुआ था। नेगोम्बो में आयोजित होने वाली आगामी रामकथा इस आध्यात्मिक पुनर्स्मरण की अगली कड़ी है, जहां बापू श्रीराम की कथा उस भूमि पर सुनाएंगे, जिसने धर्म, करुणा और सत्य की विजय का दिव्य साक्ष्य देखा था।
श्रीलंका का तलाईमन्नार वह स्थल है, जहां रामसेतु से समुद्र पार करने के बाद भगवान श्रीराम और वानर सेना ने पहली बार लंका की भूमि पर प्रवेश किया था। इसी द्वीप पर सीता एलिया, रावण एला और हनुमान कंदा जैसे तीर्थस्थल भगवान राम की खोज, माता सीता की कैद और रावण के साथ हुए धर्मयुद्ध के प्रतीक हैं।
पूज्य बापू की यह कथा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के दिव्य मार्ग का अनुगमन करते हुए धर्म की पुनः प्रतिष्ठा का प्रतीक है। यह वह भूमि है जहाँ अधर्म पर धर्म की, निराशा पर भक्ति की, और असत्य पर सत्य की विजय हुई थी।
इस यात्रा के दौरान बापू के साथ आए श्रद्धालु विशेष चार्टर्ड विमान से श्रीलंका पहुंचे हैं। यह भगवान श्रीराम के समुद्र पार करने के दिव्य प्रसंग का प्रतीकात्मक पुनर्स्मरण है। नेगोम्बो में कथा खुले पंडाल में आयोजित होगी, जहां श्रीलंका सहित विश्वभर से श्रद्धालु और अध्यात्मप्रेमी सहभागी बनेंगे।
यह श्रीलंका अध्याय मोरारी बापू की मानस रामयात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यात्रा भारत और श्रीलंका में लगभग 8,000 किलोमीटर की दूरी तय कर रही है। यह 11-दिवसीय यात्रा श्रीराम के वनवास, लंका गमन और अयोध्या वापसी की पवित्र यात्रा को पुनर्जीवित करती है। 400 से ज़्यादा श्रद्धालु इस अनोखी आध्यात्मिक यात्रा में सम्मिलित हैं, जो भारत में रेल द्वारा प्रारंभ हुई थी और अब हवाई मार्ग से श्रीलंका तक पहुंची है ।
यात्रा का शुभारंभ 25 अक्टूबर को चित्रकूट स्थित अत्रि मुनि आश्रम से हुआ और इसका समापन 4 नवम्बर को अयोध्या में होगा। यात्रा पंचवटी, सतना, शबरी आश्रम, ऋषिमुख पर्वत, पर्वर्शन पर्वत, रामेश्वरम, और अब नेगोम्बो तक का सफर तय कर चुकी है। यात्रा का समापन अयोध्या में 4 नवम्बर को होगा।
यह पूज्य मोरारी बापू की भगवान श्रीराम के वनवास से जुड़ी दूसरी परिक्रमा यात्रा है। वर्ष 2021 में उन्होंने पहली यात्रा अयोध्या से चित्रकूट और नंदीग्राम तक की थी।
उल्लेखनीय है की मोरारी बापू रामकथा के लिए कोई पारिश्रमिक नहीं लेते।कथा का श्रवण और परोसा जाने वाला प्रसाद (भोजन) पूरी तरह से नि:शुल्क होता है, और कथा का सम्पूर्ण आयोजन सेवा और समर्पण की भावना से किया जाता है।
यह भव्य यात्रा संतकृपा सनातन संस्थान के मदनजी पालिवाल के सौजन्य से आयोजित की जा रही है। यात्रा की समस्त व्यवस्था और आयोजन सनातन धर्म की पवित्रता, एकता और समरसता का सजीव प्रतीक है।
यह रामयात्रा सत्य, प्रेम और करुणा के सनातन मूल्यों पर आधारित है और और इसका ध्येय श्रीराम चरितमानस के प्रकाश को प्रसारित करने और मानवता के सन्देश को सुदृढ़ बनाना है। यह कथा पूज्य मोरारी बापू के 60 वर्षों से भी अधिक की आध्यात्मिक यात्रा की 966वीं रामकथा है।

